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    Published On : Thu, Apr 19th, 2018
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    ‘जेई’ बनाएगा मनपा का बजटीय भाषण, सभापति करेगा पठन

    NMC-Nagpur
    नागपुर: इस बार नागपुर महानगरपालिका का बजट पूर्णतः राजनीति प्रेरित चुनावी बजट रहेगा. वजह है आगमी लोकसभा और विधानसभा चुनाव. इसलिए वर्ष २०१८-१९ के बजट को आकर्षक बनाने की कवायद अभी से शुरू हो चुकी हैं. चर्चा है कि अइस बार का बजटीय भाषण नगर रचना विभाग के कनिष्ठ अभियंता तैयार कर रहे हैं जिसे स्थाई समिति सभापति पढ़ेंगे. बाद में बजटीय चर्चा सत्र में ज्यादा से ज्यादा निधि अर्जित करने के लिए सत्तापक्षीय नगरसेवक के साथ कुछ खास विपक्षी नगरसेवक बजट की वाहवाही करते दिखेंगे.

    भाजपाई सूत्रों की माने तो मनपा में सत्ता किसी भी पक्ष का रहा हो, पिछले डेढ़ दशक से स्थाई समिति द्वारा निर्माण भाजपा के साये में ही होता रहा है. इस मसले पर वर्तमान विपक्ष याने कांग्रेस हमेशा से ही चुप्पी साधे रही, जिससे उनके दामन के पाक साफ होने के दावों को लेकर भी संदेह के घेरे में देखा जा रहा है.

    विडम्बना यह है कि मनपा के वित्त विभाग में प्रदीर्घ, अनुभवी व जानकारों की फेरहिस्त बतलाई जाती है, इसके बावजूद मनपा का वार्षिक बजट मनपा का कनिष्ठ अभियंता द्वारा बनाए जाने को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है. इसके बाद बजट के अनुसार मनपा प्रशासन व पक्ष-विपक्ष के तथाकथित दिग्गजों के मार्गदर्शन और उससे नीचे के अधिकारियों, पदाधिकारियों व नगरसेवकों के साथ स्थाई समिति सदस्यों को निर्देश इन्हीं कनिष्ठ अभियंता द्वारा दिया जा रहा है. अर्थात मनपा स्थाई समिति में स्थाई व प्रभावी उक्त कनिष्ठ अभियंता ही है और रहेगा, यह विडम्बना नहीं तो और क्या है.

    चुनावी वर्ष होने के कारण बजट में कई आश्चर्यजनक रौनक नज़र आएगा. मनपा का बजट और इसका निर्माण कार्य हमेशा की तरह महल इलाके में उक्त कनिष्ठ अभियंता के निजी कार्यालय में किया जा रहा है. जिसमें सत्तापक्ष से जुडे मुद्दों को जगह देने के लिए मार्गदर्शन का क्रम जारी है.

    पिछले वर्ष के बजट में कई नए कोष का निर्माण कर उसमें प्रस्तावित राशि रखी गई थी. इन विशेष मदों का लाभ चुनिंदा नगरसेवक अधिकांश सत्तापक्ष के, ने उठाया. शेष आम कोष से निधि प्राप्त करने के लिए अंतिम समय तक जूझते रहे.

    उक्त कनिष्ठ अभियंता का कार्यक्षेत्र स्थाई समिति ने इतना बढ़ा दिया है कि अमूमन ठेकेदारों से समझौता और सभापति से सवाल करनेवाले खुद भिड़ अनभिज्ञ सभापति का बचाव करते पाए गए. गत दिनों स्थाई समिति सभापति ने १५ मई तक बजट पेश करने का वादा किया था, अब देखना यह है कि उनके वादे पर प्रशासन कितना खरा उतरता है.

    …शायद इसलिए हमेशा होती है पीएमसी की दरकार
    जब मनपा का डेढ़ दशक से बजट एक तत्काल में पदोन्नत कनिष्ठ अभियंता ( इसके पूर्व तक तकनीकी सहायक ) बना रहा तो मनपा के वर्तमान सभी विभागों में तैनात विभिन्न संकाय के अभियंता सिर्फ नाम के हैं. प्रकल्प निर्माण व संचालन मामले में इनसे कोई उम्मीद या इन पर विश्वास नहीं होने के कारण मनपा प्रशासन पिछले कुछ दशक से प्रत्येक प्रकल्प के लिए ‘प्रोजेक्ट मॅनेजमेंट कंसलटेंट’ की नियुक्ति कर सालाना करोड़ों खर्च करने को मजबूर है. सवाल तो यह भी उठता है कि क्या मनपा के अभियंता की डिग्री बोगस तो नहीं ! या फिर सफेदपोशों ने कमीशन खाने के लिए ‘पीएमसी’ की तैनातगी के लिए निरंतर मनपा प्रशासन पर दबाव बनाए रखा है.

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