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    Published On : Wed, Sep 5th, 2018

    मनपा: एक रिटायर्ड तीन युवाओं की खा रहे नौकरी

    NMC Nagpur

    नागपुर : नागपुर शहर स्मार्ट सिटी के साथ ‘सेवानिवृत्तों का शहर’ के लिए पहली पसंद बनता जा रहा है. वहीं दूसरी ओर शहर व जिले के युवा वर्ग उच्च शिक्षा के बाद सम्मानजनक नौकरी के लिए पिछले डेढ़ दशक से लगातार पलायन करते जा रहे हैं. इस पलायन को मनपा प्रशासन का बढ़ावा मिल रहा है.

    याद रहे कि वर्ष २०१४ में लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवार नितिन गडकरी ने सार्वजानिक सभाओं में जिले में युवाओं को रोजगार देकर शहर के विकास में उनकी भागीदारी को बढ़ाने का वादा किया था. इसके लिए वे मुंबई से लेकर दिल्ली तक बड़े-बड़े उद्योगपतियों को नागपुर में प्रकल्प शुरू करने के लिए अपने अंदाज में गिड़गिड़ाते रहे. लेकिन यह और बात है कि पिछले ४ वर्ष में एक भी उद्योग न खड़ा हो पाया और न ही रोजगार के साधन हू उपलब्ध हो पाए.

    वहीं गडकरी के पक्ष की ही सत्ता मनपा में पिछले तीन टर्म से है. यहाँ गडकरी के सपनों के २ प्रकल्प लड़खड़ाते चल रहे हैं और उनके ही सपनों को चूर-चूर करते हुए मनपा के खादी-खाकी मनपा और अन्य विभागों के सेवानिवृत्तों को तरजीह देती जा रही है. मनपा में पिछले ४-५ वर्षों में मनपा से सेवानिवृत्त होने वाले अधिकारी-कर्मचारियों को नई-नई योजना के तहत पुनः ठेकदारों पद्दति के तहत नौकरी पर रखने का क्रम जारी है.

    कड़वा सत्य है कि मनपा से सेवानिवृत्त जिन अधिकारी-कर्मियों को मनपा ने पुनः सेवा में शामिल किया है, उन्होंने अपने मूल कार्यकाल में कोई उल्लेखनीय कार्य नहीं किया. बल्कि विवादों में अंत तक बने रहे. सेवानिवृत्त होने के बाद इन्हें अच्छी-खासी पेंशन मिल रही. सरकार ने सेवानिवृत्त की योजना बनाते वक़्त काफी मंथन किया होगा कि ५८ या ६० साल के बाद कार्यक्षमता पर असर पड़ता है, इसलिए शेष जीवन इस रोजमर्रा के कामकाज से मुक्त कर दिए गए सेवा के एवज में पेंशन देकर मदद की जाए.

    आज के महंगाई के युग में पेंशन की रकम मामूली नहीं है. यह निजी क्षेत्र के उच्च श्रेणी का वेतन के बराबरी का हैं.ऐसे पेंशनधारियों को पुनः मनपा में विशेष प्रधानता देते हुए पेंशन की राशि को दोगुणा-चौगुणा राशि मासिक वेतन पर नियुक्ति का क्रम जारी है. अर्थात एक सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मी जो मनपा में पुनः सेवारत है, वह कम से कम २ से ३ ऊर्जावान युवाओं की नौकरी खा रहा है. इसके बदले में मनपा को कोई लाभ नहीं हो रहा, तो दूसरी ओर जिले के उच्च शिक्षित युवा वर्ग प्रति वर्ष नौकरी की तलाश में पिछले डेढ़ दशक से नियमित पलायन करते जा रहे हैं.

    उल्लेखनीय यह है कि पलायन करने वाले युवा एक बार शहर छोड़ने के बाद २ से ५ % ही नागपुर लौट कर आ रहे हैं शेष वहीं बसते जा रहे हैं.
    नागपुर महानगरपालिका में लगभग ७ दर्जन सेवानिवृत्त कर्मी/अधिकारी पुनः सेवारत हैं. नागपुर शहर को पिछले कुछ वर्ष पूर्व ‘लिवेबल सिटी’ का भी तमगा मिला था. ऐसा ही आलम रहा तो देश का ‘रिटायरमेंट लोगों के लिए सर्वश्रेष्ठ शहर’ का मान भी भविष्य में मिलते देर नहीं लगेगी.

    मोदी फाउंडेशन ने मनपा प्रशासन से मांग की है कि सेवानिवृत्तों को घर बिठा कर शहर व जिले के युवाओं पर विश्वास जताते हुए उन्हें अवसर प्रदान की जाएं. साथ ही मनपा की नई भर्ती में जिले के युवाओं को पहली प्राथमिकता दी जाये ताकि बुजुर्ग परिवार के साथ उनका भविष्य भी शहर में रहने को मजबूर हो सके और उनकी देखभाल में कोई कमी न रहे.

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