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    Published On : Sat, Sep 6th, 2014

    मनपा सत्तापक्ष प्रमुख पद को लेकर फडणवीस-गडकरी में ठनी

    Girish Deshmukh ( Left ) and Sandip Joshi ( Right )

    Girish Deshmukh ( Left ) and Sandip Joshi ( Right )

    नागपुर टुडे

    नागपुर शहर के सभी विधानसभा सीट जीतने का दावा करनेवाली भाजपा में गुटबाजी चरम सीमा तक देखने को मिल रहा है.इसका ताजा उदाहरण यह है कि मनपा सत्तापक्ष नेता पद के लिए फडणवीस और गडकरी समर्थक एक दूसरे के विरुद्ध खंभ ठोक कर पद प्राप्ति हेतु भिड़े हैं. आलम यह है कि यह विवाद प्रदेश भाजपा तक पहुँच गया है और उनके लिए सिरदर्द बन गया है.

    शहर के सांसद व् केंद्रीय परिवहन मंत्री नितिन गडकरी और भाजपा प्रदेशध्यक्ष देवेन्द्र फडणवीस के मध्य अंदरुनी कलह ख़त्म होने का नाम नहीं ले रही है,आये दिन कभी दोनों तो कभी दोनों के समर्थक एक-दूसरे के खिलाफ सक्रिय रहते हैं लेकिन कभी कोई भी कार्यकर्ता खुलकर सामने नहीं आता है. आज के हालात यह हैं कि भाजपा के संसदीय मंडल ने मनपा में रिक्त हुए सत्तापक्ष नेता पद पर नगरसेवक गिरीश देशमुख को बिठाने का निर्णय लिया गया.संसदीय मंडल के निर्णय से प्रदेशाध्यक्ष फडणवीस खुश नहीं है,जिसके कारण नया विवाद जन्म ले लिया है.फडणवीस की इच्छा यह है कि सत्तापक्ष का नेता पद गिरीश देशमुख जैसे डमी की बजाय उनके कट्टर समर्थक व् तेजतर्रार संदीप जोशी को दिया जाये।जोशी ने स्थाई समिति अध्यक्ष रहते अपना कार्य-कौशल पहले ही दिखा चुके हैं.

    फडणवीस ने जोशी के लिए स्नातक मतदार संघ के चुनाव में भाजपा की तरफ से उम्मीदवार बनाने के लिए काफी प्रयत्न किया था,लेकिन गडकरी के कारण जोशी को उम्मीदवारी नहीं मिल पाई.

    संसदीय मंडल ने दक्षिण-पश्चिम के खामला के नगरसेवक गिरीश देशमुख को अगला सत्तापक्ष नेता बनाने की सहमति दर्शाई। देशमुख को पूर्व महापौर अनिल सोले और सोले को गडकरी का कट्टर समर्थक माना जाता है. सत्तापक्ष नेता गडकरी गुट का हो, इसके लिए फडणवीस कतई तैयार नहीं है.

    भाजपा में परंपरा रही है कि इनकी सिफारिश को अधिकांश समय मान्य किया जाता है,कभी अड़चन आई तो वरिष्ठ नेता के हस्तक्षेप से सुलझा लिया जाता है. उक्त प्रकरण में गडकरी समर्थक फडणवीस के रवैये से खुश नहीं है और गडकरी समर्थक अपनी नाराजगी से गडकरी को अवगत करवा चुके है. फ़िलहाल इस मुद्दे पर गडकरी मौन है,जबकि ऐसा नहीं होता है.गडकरी चाहेंगे तो देशमुख जैसे डमी को नेता पद दान में मिल सकता है.दूसरी और गडकरी के मौन से फडणवीस समर्थक फुले नहीं समां रहे है.वह इसलिए भी कि फडणवीस को प्रदेशध्यक्ष होने के नाते संसदीय मंडल के निर्णय में हस्तक्षेप का अधिकार प्राप्त है,इसका उपयोग कर वे संदीप जोशी को सत्तापक्ष नेता नियुक्त कर सकते हैं. इस मामले में शहर भाजपा अध्यक्ष कृष्णा खोपडे का कहना है कि गडकरी-फडणवीस दोनों शहर के बाहर है,आते ही दोनों मिलकर इस मामले में संयुक्त निर्णय लेंगे।आज गडकरी नागपुर पहुँच चुके है.जल्द ही सत्तापक्ष नेता पद की घोषणा हो सकती है.

    द्वारा:-राजीव रंजन कुशवाहा


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