Published On : Sat, Jun 9th, 2018

शब्द वहीं,आंकड़े नई,प्रस्तुति में नयापन

नागपुर: लगभग २ माह देरी से मनपा का वर्ष २०१८-१९ का आर्थिक बजट आगामी सोमवार ११ जून को स्थाई समिति सभापति वीरेंद्र कुकरेजा पेश करेंगे। अर्थात विशेष सभा में सभापति द्वारा पठन किया जाएगा। जिसे तैयार करने में सभापति के निजी सहायक फरकासे अहम् भूमिका निभाई। यह कोई नहीं बात नहीं काफी अर्शे से फरकासे ही दिग्गज भाजपा नेताओं के दिशा-निर्देशों पर मनपा बजट का निर्माण कर रहे.इस बजट में शब्द वहीं होता हैं,परिस्थिति अनुसार मद्द में फेरबदल,आंकड़ों को उलट-पुलट कर नए सभापति के हिसाब से प्रस्तुति में नयापन दिखलाया जाता रहा हैं.इस बार भी वैसा ही कुछ रहेंगा।

इसी आर्थिक वर्ष में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं.इसलिए भी कुकरेजा को सभापति पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई हैं.अनुमान यह भी हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव के वक़्त पश्चिम नागपुर से मुख्यमंत्री के एकदम करीबी नगरसेवक स्थाई समिति सभापति रह सकते हैं.व्यापारिक समुदाय से ताल्लुक रखने के कारण कुकरेजा से व्यावसायिक समुदाय काफी आशांविन्त हैं कि बजट में उनके हितार्थ योजनाए आदि हो.निसंदेह यह बजट आगामी लोकसभा और फिर विधानसभा चुनाव को ध्यान में रख तैयार किया जा चूका हैं.बजट के तथाकथित निर्माणकर्ता अन्य कई स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं के बजट का भी निर्माण कर चुके हैं.इस बार भी ‘कैरी-फॉरवर्ड’ से नए प्रस्तावों पर ग्रहण लग सकता हैं.पिछले आर्थिक वर्ष में तो पिछले कार्यकाल के मंजूर प्रस्तावों को जिन्दा करने का काम स्थाई समिति के कर्मियों ने किया था.इस चक्कर में निधियों का कमतरता देखि गई थी.

जहाँ तक मनपा की आर्थिक स्थिति का सवाल हैं,मनपा आयुक्त के अनुसार ४ माह और समय लग सकती हैं सुधरने में.इसके बाद सबकुछ खासकर भुगतान में देरी का मसला ही नहीं रह जाएगा। आज पूर्व मनपा के वित्त व लेखा अधिकारी मदन गाडगे द्वारा विशेष निधियों से किये गए खिलवाड़ से हुए गड्डे भरपाई में वर्त्तमान आयुक्त व लेखाधिकारी लीन हैं.इस आर्थिक तंगी से दरअसल बदहाल सिर्फ और सिर्फ छोटे-छोटे सैकड़ों ठेकेदार हैं,जिनका कोई वाली नहीं। इनमें से कुछ दो-ढाई दर्जन अल्पसंख्यक समुदाय के ठेकेदारों ने निष्क्रिय ठेकेदार संगठन को दरकिनार कर आयुक्त से मिले और रमजान माह को ध्यान में रखते हुए ५-५ लाख रूपए बकाया में से देने की गुहार लगाई।आयुक्त ने बिना आंकड़ों का वादा किये आश्वस्त किया कि रमजान पूर्व भुगतान किया जाएगा।

आर्थिक स्थिति इतनी चरमरा गई कि कुछ ठेकेदार वर्क आर्डर प्राप्त करने के बाद भी काम नहीं कर रहे.मजेदार बात यह भी हैं कि प्रत्येक सप्ताह टेंडर जारी हो रहे और कोई भी टेंडर खाली नहीं जा रहा.आजकल ठेकेदारों के बजाय नगरसेवक ठेकेदारों के फाइल मंजूर करवाने के लिए घूमते नज़र आ रहे.उल्लेखनीय यह हैं कि इस बार का आर्थिक बजट केंद्र-राज्य सरकार के अनुदानों पर आश्रित बजट प्रस्तुत किया जाना तय हैं.क्यूंकि मनपा का आय का प्रमुख स्त्रोत संपत्ति कर,जल कर,बाजार और नगर रचना विभाग से होने वाली आय पर मनपा प्रशासन और सत्ताधारी गंभीर नहीं हैं.इन विभागों में कुंडली मार कर बैठे अधिकारी- कर्मियों का जबतक तबादला नहीं किया जाता तब तक मनपा की आर्थिक स्थिति सुधर ही नहीं सकती। संभवतः १३ जून को बजट पर चर्चा की चर्चा हैं.