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    Published On : Mon, Dec 4th, 2017
    nagpurhindinews / News 3 | By Nagpur Today Nagpur News

    Video: निसर्ग को तबाह करने के लिए सत्तापक्ष-प्रशासन एकजुट

    नागपुर: गोरेवाड़ा जंगल के मध्य ‘डैम’ व आसपास की जमीन अंग्रेजों ने नागपुर शहर के अधीन किया था. फिर ८० से ९० के दशक के दरम्यान जब गंठबंधन सरकार थी, इसे वन विभाग के अधीन कर दिया गया था. इस सूरत में भी तालाब व आसपास के इलाकों पर कब्ज़ा मनपा के जलप्रदाय विभाग के पास ही था.अब जबकि राज्य और नागपुर मनपा में भाजपा की सरकार है, इस दौरान भाजपा समर्थक व्यवसायी को डैम के आसपास की जगह पसंद आ गई तो सफेदपोशों ने मनपा प्रशासन पर भारी दबाव बनाकर इस जमीन को वन विकास महामंडल को लौटाने का प्रस्ताव तैयार कर तीसरी बार मनपा की आमसभा में मंजूरी के लिए विषय पत्रिका में शामिल किया. जब इस परिसर का मुआयना किया गया तो सत्तापक्ष द्वारा निसर्ग को तबाह करने वाला प्रस्ताव लाया जाना कहा जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.

    २४ घंटे ऑक्सीजन रहता है परिसर में
    यह परिसर ब्रिटिशकालीन है, जिसे आज की भाषा में हेरिटेज की संज्ञा दी गई है. इसका जतन करने के बजाय उजाड़ने पर सत्तापक्ष के दबाव में प्रशासन आमादा है. तब इस परिसर में तात्कालीन रानी का आगमन होने वाला था, इसलिए ब्रिटिश सरकार ने ( विषय पत्रिका{११८} में लौटने के लिए प्रस्तावित जगह) आसपास २४ घंटे ऑक्सीजन छोड़ने वाले वृक्षों का रोपण किया था. स्थानीय पुराने पीढ़ी के अनुसार आज भी वे पेड़ जिंदा हैं, इस परिसर में १५०-२०० वर्ष के हज़ारों पेड़ हैं. परिसर में वर्ष भर निर्मल वातावरण के लिए विभिन्न प्रकार के फूलों के पौधे-वृक्षों को देखा जा सकता है.


    जब मनपा की नहीं तो मुआवजा किसलिए
    मनपा आमसभा की मंजूरी के बाद मनपा प्रशासन खुद का ७/१२ दर्शाते हुए उक्त जगह वनविकास महामंडल को सौंप देगी. इसके बदले में वन विभाग मनपा को इतनी ही जमीन पिटासुर परिसर में देने वाली है. फ़िलहाल इस जमीन के कुछ हिस्सों में झोपड़पट्टियां बस गई हैं, जिसे खाली व सुरक्षा दीवार खड़ी कर मनपा को हस्तांतरित किए जाने की योजना है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि बारबार सत्तापक्ष यह प्रचारित कर रहा है कि यह जमीन वन विभाग की है, जब वनविभाग की जगह है तो लौटाने का मुआवजा किसलिए ?

    वनाधिकारी काले ने ग्वालवंशी से की गुजारिश
    भाजपा के नगरसेवक जगदीश ग्वालवंशी और कांग्रेस के वरिष्ठ नगरसेवक हरीश ग्वालवंशी ने सत्तापक्ष की योजना पर पानी फेरते हुए उक्त प्रस्ताव का शुरुआत से विरोध किया. इसकी जानकारी मिलते ही वन विभाग के अधिकारी काले ने जगदीश ग्वालवंशी से संपर्क कर उनसे विरोध त्यागने की गुजारिश की. काले के अनुसार वन विभाग आय के स्त्रोत ईजाद करने के उद्देश्य से उक्त जमीन मनपा से मांग रहा है.

    प्रस्तावित बीओटी प्रकल्प में कई सत्ताधारी निवेश ?
    स्थानीय नागरिकों के अनुसार जब उक्त जगह की मांग करनेवालों ने इस परिसर का दौरा किया तो पहले उन्हें पिटासुर की पहाड़ी दिखाई गई. फिर गोरेवाड़ा डैम परिसर दिखाया गया. यह जगह देख मुख्य निवेशक ने इस जगह की मांग करते हुए दौरा करवाने वालों से दो टूक कहा कि यह जगह मिलेगी तो ही निवेश करेंगे. इस दौरान उनके साथ दौरे में शामिल कुछ भाजपाई दिखे गए, उनके अनुसार शहर के भाजपा समर्थक इस प्रकल्प में बतौर निवेशक नज़र आ सकते हैं.

    चतुराई से दिलाई जाएंगी विषय को मंजूरी
    आगामी आमसभा में या तो हंगामे के बीच या फिर बहुमत के आधार पर सूचना सहित शब्द अंकित कर उक्त विषय को मंजूरी प्रदान की जाएगी. दरअसल इस विषय से एक दर्जन सफेदपोश व अधिकारी वर्ग अवगत हैं. शेष को तो इस ओर झांकने की फुर्सत तक नहीं. सत्तापक्ष के उक्त प्रयोग को ही मोदी ने ‘अच्छे दिन’ तो मनपा प्रशासन ने ‘स्मार्ट सिटी’ की संज्ञा दी है.

    —राजीव रंजन कुशवाहा

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