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    Published On : Mon, Nov 20th, 2017
    nagpurhindinews | By Nagpur Today Nagpur News

    अनिधिकृत निर्माण कार्य पर गिरेगी NIT की गाज

    NIT Nagpur
    नागपुर: अनिधिकृत रूप से तैयार की गई ईमारतों पर आगामी दिनों में गाज गिर सकती है। नागपुर सुधार प्रन्यास ने वर्ष 2010 के बाद से उसके हस्तक्षेप वाले इलाकों में हुए निर्माण कार्यो का ख़ाका तैयार किया है। सैटेलाईट पिचर्स के माध्यम से बीते सात वर्ष के दौरान किये गए काम का सारा रिकॉर्ड एनआइटी के पास है। इसके माध्यम से अब विकास शुल्क वसूलने की तैयारी एनआइटी द्वारा की जा रही है। सोमवार को पत्रकारों से बातचीत में एनआइटी चैयरमेन दीपक म्हैसेकर ने बताया की अनधिकृत रूप से किये गए निर्माण कार्यो की खोजबीन करने का सिलसिला शुरू किया गया। 31 अगस्त 2010 से महानगर क्षेत्र अंतर्गत एनआइटी को ईमारत निर्माण विकास कार्य की इजाज़त देने का अधिकार प्राप्त है। इसलिए तब से लेकर अब तक जिन्होंने ने भी विकास शुल्क अदा किये बिना या नियमों की अवहेलना करते हुए निर्माण कार्य किया है उनसे वसूली की जाएगी।

    एनआइटी चैयरमेन ने यह भी साफ़ किया की निर्माण कार्य के लिए जिन्होंने ग्राम पंचायत या जिलाधिकारी कार्यालय से इजाज़त ली है उन्हें किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। 7 अक्टूबर 2017 के जीआर का हवाला देते हुए उन्होंने यह भी साफ किया की जिन्होंने ने अब तक नियमो का उल्लंघन कर निर्माण कार्य किया भी हो वह अब विकास शुल्क की आदायगी कर प्रॉपर्टी को नियमित कर सकते है।

    बिल्डर एनआइटी के टार्गेट पर
    एनआइटी चैयरमैन के मुताबिक ज्यादातर अवैध निर्माण कार्य बेसा और बेलतरोड़ी में हुए है। गौरतलब हो की इस क्षेत्र में बीते दौर में कई बड़ी स्किम तैयार हुई। इनमे से कई स्किम में नियमो की अनदेखी भी की गयी। खुद चैयरमेन का मानना है की यहाँ अवैध निर्माण कार्य हुआ ऐसे में जिन बिल्डरों ने ऐसा किया वह एनआइटी के टार्गेट पर है। इन दोनों क्षेत्रों में हालहीं में हुए अवैध निर्माण कार्य की पहचान कर 833 लोगो को नोटिस जारी किया गया है जिसमे से 135 लोगो ने अपना लिखित जवाब एनआइटी को भेजा भी है।

    2 हज़ार स्क्वेयर फ़ीट में निर्माण कार्य के लिए नक़्शे को ऑनलाइन मिलेगी मंजूरी

    राज्य सरकार के ताज़ा निर्णय के अनुसार अब 2 हज़ार स्क्वेयर फ़ीट में निर्माण कार्य के नक़्शे की मंजूरी के लिए एनआइटी की इजाज़त लेने की आवश्यकता नहीं है। यह अधिकार अब आर्किटेक के पास है वह खुद नक़्शे को मंजूर कर सकता है। लेकिन निर्माण कार्य नियम के साथ किया गया हो। एनआइटी चैयरमैन ने यह भी साफ किया की अब विकास शुल्क भरने के लिए भी किसी को एनआइटी के कार्यालय में आने की आवश्यकता नहीं होगी। एनआइटी द्वारा नक़्शे की मंजूरी और विकास शुल्क की अदायगी के लिए ऑनलाइन व्यवस्था का जनता फ़ायदा ले सकती है।


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