Published On : Tue, Dec 27th, 2016

नागपुर सुधार प्रन्यास भंग करने की प्रक्रिया शुरु

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नागपुर:
नागपुर सुधार प्रन्यास (नासुप्र) अब इतिहास की बात हो जाएगा। एक अहम फैसले में आज महाराष्ट्र सरकार के मंत्रिमण्डल ने नासुप्र को भंग करने के प्रस्ताव को सिद्धांततः स्वीकार कर लिया है और भंग की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। हालाँकि इस प्रक्रिया को अमलीजामा पहनाने मसौदा तैयार किया जाएगा और इसके एक साल का वक़्त मुकर्रर किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि १ जनवरी २०१८ से नागपुर शहर के विकास का यह समांतर तंत्र पूरी तरह विलुप्त होकर इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा।

नासुप्र को भंग करने के लिए राज्य की शहरी विकास द्वितीय विभाग के सचिव की अध्यक्षता में एक समिति बनायी गयी है, जो भंग की प्रक्रिया को पूर्ण करते हुए क्षेत्र परिसीमन एवं अधिकार नागपुर महानगर पालिका प्रशासन को हस्तांतरित किए जाने की सिफारिश करेगी। इस समिति में नासुप्र अध्यक्ष एवं मनपा आयुक्त बतौर सदस्य शामिल रहेंगे। भंग करने की प्रक्रिया ३१ दिसंबर २०१७ तक निपटा ली जाएगी और नासुप्र को उसी रोज से भंग माना जाएगा, जिस रोज सरकार इस संबंध में अधिसूचना जारी करेगी। नासुप्र को भंग करने का निर्णय नागपुर विकास प्रन्यास न्यास अधिनियम में विहित नियम १३६ की तहत लिया गया है।

महापौर का दावा : भाजपा ने वादा पूरा किया
नासुप्र भंग करने की प्रक्रिया शुरु होते ही श्रेय लेने का खेल भी शुरु हो गया है। नागपुर के महापौर प्रवीण दटके ने दावा किया कि भारतीय जनता पार्टी ने अपना एक और चुनावी वादा पूरा किया है। उन्होंने कहा कि राज्य की शहरी विकास द्वितीय विभाग की सचिव मनीषा म्हैसकर की अध्यक्षता में बनी त्रि-सदस्यीय समिति में नासुप्र अध्यक्ष डॉ. दीपक म्हैसकर तथा मनपा आयुक्त श्रवण हर्डीकर एक साल में हस्तांतरण प्रस्ताव प्रक्रिया तैयार करेंगे, उसी के हिसाब से नासुप्र की समस्त योजनाएं एवं व्यावसायिक परियोजनाएं मनपा को हस्तांतरित की जाएंगी। नासुप्र की तिजोरी भी मनपा को सौंपी जाएगी। अब तक मनपा अपनी अधीनस्थ जगहों को लीज पर देने का काम किया करती थी, ये सभी जमीनें भी मनपा को हस्तांतरित की जाएगी। इसी तरह नासुप्र के अधीन आने वाले समस्त क्षेत्र नगर प्रशासन के अधीन जाएंगे। महापौर ने यह भी कहा कि एक बार जीएसटी लागू हो जाएगा तो नासुप्र के नहीं रहने से मनपा काफी बेहतर अवस्था में दिखेगी।

टकराव
नासुप्र और मनपा के बीच क्षेत्रों को अपने-अपने अधीन करने को लेकर लगातार टकराव होता रहा है। नासुप्र को भंग करने की मांग की मुख्य वजह अधिकारों का यह टकराव भी रहा है। नासुप्र के भंग होते ही उसके अधीनस्थ २१७ वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र मनपा के अधीन हो जाएगा। हालाँकि राज्य सरकार ने नासुप्र के पंख कतरने की प्रक्रिया बहुत पहले से शुरु कर दी थी और जैसे ही भाजपा राज्य की सत्ता में आयी, मुख्यमंत्री देवेंद्र फड़णवीस ने इस तरह के फैसले लिए जाने के संकेत देने शुरु कर दिए थे। नासुप्र के भंग होने के बाद नागपुर मेट्रो क्षेत्र विकास प्राधिकरण की भूमिका उभर कर आगे आएगी। शहर की सीमा के भीतर विकास कार्य मनपा करेगी और शहर के बाहर चिन्हित मेट्रो क्षेत्र के हिस्से का विकास नागपुर मेट्रो क्षेत्र विकास प्राधिकरण करेगी।