Published On : Tue, Feb 7th, 2017

राष्ट्रभाषा सभा और वोकहार्ड अस्पताल को 163 करोड़ 75 लाख रूपए देना है नासुप्र को

Wockhardt
नागपुर
: एक चौंकाने वाला कदम उठाते हुए नागपुर सुधार प्रन्यास (नासुप्र) ने महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा और उसके किरायेदार वोकहार्ड अस्पताल से जमीन की पुनरीक्षित कीमत के हिसाब से क्षतिपूर्ति रकम और जमीन के किराए के तौर पर 163 करोड़, 75 लाख, 63 हजार, 6 सौ 88 रूपए की मांग की है. नासुप्र से यह कदम उच्च न्यायालय के आदेश के बाद उठाया है. नासुप्र को यह कदम उठाने के लिए ‘सिटीज़न फोरम’ के मधुकर कुकड़े ने बाध्य किया. मधुकर कुकड़े ने सिटीज़न फोरम के माध्यम से उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका दायर कर नासुप्र द्वारा महाराष्ट्र राष्ट्र भाषा सभा पर की जा रही मेहरबानी रोकने और नए सिरे से जमीन का किराया वसूले जाने की मांग की थी. उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में महाराष्ट्र राष्ट्र भाषा सभा और वोकहार्ड अस्पताल को दो महीने के भीतर लगभग मांगी गयी रकम की पहली क़िस्त के रुप में लगभग 32 करोड़ रूपए नासुप्र में जमा कराने को कहा है. शेष रकम 12 बराबर की क़िस्त में जमा कराने की मोहलत प्रदान की गयी है.

उच्च न्यायालय ने नासुप्र के उस विधान को भी ख़ारिज कर दिया जिसके तहत नासुप्र ने जमीन की कीमत के रुप में 2005 में 30 लाख रूपए महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा से लेने का प्रस्ताव पारित किया था. उच्च न्यायालय ने कहा कि सिर्फ 30 लाख रूपए वर्ष 2005 के बाजार भाव के हिसाब से नाकाफी हैं. उच्च न्यायालय ने निर्देश दिया कि वर्ष 2005 में जमीन महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा को दिए जाने के समय के बाजार मूल्य के हिसाब से कीमत लगायी जाए और अब तक की अवधि का जमीन का किराया आज के हालात के मद्देनजर तय किए जाएं और सारी रकम एक वर्ष के भीतर महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा से वसूली जाए.
उच्च न्यायालय के आदेश के बाद नासुप्र के सभापति डॉ. दीपक म्हैसकर की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय समिति बनी और इस समिति ने नए सिरे से गणना कर महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा की तरफ लगभग 164 करोड़ का बकाया निकाला. उच्च न्यायालय ने इस साल 3 जनवरी को इस संदर्भ में आदेश दे दिए थे.

इस तरह की गयी गणना
– 2005 में जमीन की कीमत 31 करोड़, 83 लाख, 17 हजार 300 जिसमें से अग्रिम राशि के तौर पर तीस लाख पहले ही मिल चुके है, अतः जमीन की कीमत हुयी 31 करोड़, 53 लाख, 12 हजार, 225 रूपए.
– उक्त राशि पर वर्ष 2005 से 2017 की अवधि के लिए सालाना 12 प्रतिशत की दर से ब्याज राशि 106 करोड़, 3 लाख, 95 हजार, 12 रूपए. इस तरह ब्याज और मूल राशि मिलाकर 137 करोड़, 57 लाख, 7 हजार और 237 रूपए.
– 1991 से वर्ष 2004 की अवधि तक का जमीन का पुनरीक्षित किराया सालाना 12 प्रतिशत ब्याज की दर से 6 करोड़, 29 लाख, 68 हजार और 427 रूपए.
– वर्ष 2005 से 2017 तक की अवधि का पुनरीक्षित किराया 12 प्रतिशत सालाना ब्याज की दर से 19 करोड़, 88 लाख, 88 हजार और 24 रूपए.
– इस तरह सकल वसूली जाने वाली राशि हुयी 163 करोड़, 75 लाख, 63 हजार और 688 रूपए.

फ़िलहाल कितनी रकम भरी जानी है
महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा और उनके किरायेदार अस्पताल वोकहार्ड को दो महीने के भीतर 31 करोड़, 53 लाख, 12 हजार और 225 रूपए जमीन की कीमत की क़िस्त और 63 लाख, 66 हजार और 346 रूपए की क़िस्त नासुप्र को अदा करनी है और शेष रकम को बराबर बांटकर 12 किस्तों में अनिवार्यतः जमा करानी है.

उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा की ओर से उक्त जनहित याचिका को ख़ारिज किए जाने की मांग को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में अपील की गयी थी, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने इस मांग को ही ख़ारिज कर दिया था.

शंकरनगर चौक के पास स्थित महाराष्ट्र राष्ट्रभाषा सभा की विशालकाय इमारत स्थित है. अपनी जनहित याचिका में मधुकर कुकड़े की सिटीज़न फोरम ने उक्त इमारत के लिए जमीन देने, उस पर गैर कानूनी निर्माण करने और फिर उस गैर कानूनी इमारत में निजी किरायेदार रखने के साथ यह कीमती जमीन कौड़ियों के मूल्य दिए जाने पर आपत्ति उठाते हुए, जमीन की समुचित कीमत और किराया वसूले जाने की मांग की थी.