
जमाकर्ताओं का कहना है कि उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) और अन्य जमा राशि की अवधि पूरी होने के बावजूद उन्हें भुगतान नहीं मिल रहा है। कई लोगों ने आरोप लगाया कि वे महीनों से बैंक और अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिलता है।
हालांकि, प्रदर्शन के दौरान प्रमोद मानमोडे घर पर मौजूद नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति में उनकी पत्नी निर्मला मानमोडे ने जमाकर्ताओं से बातचीत की और स्थिति शांत कराने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि प्रमोद मानमोडे फिलहाल शहर से बाहर हैं और उनके लौटने के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर पूरे मामले पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
लेकिन इस आश्वासन से नाराज़ जमाकर्ताओं का गुस्सा कम नहीं हुआ। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि जब आलीशान जीवनशैली और महंगी गाड़ियों पर खर्च किया जा सकता है, तो वर्षों की मेहनत की कमाई जमा करने वाले लोगों को उनका पैसा लौटाने में देरी क्यों हो रही है। उनका कहना था कि अब उन्हें वादे नहीं, बल्कि अपना पैसा चाहिए।
जमाकर्ताओं ने बताया कि कई परिवार गंभीर आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं। किसी को इलाज के लिए पैसों की आवश्यकता है, किसी के बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है, तो कई परिवार शादी और अन्य जरूरी खर्च पूरे नहीं कर पा रहे हैं। उनका आरोप है कि जमा राशि समय पर नहीं मिलने से उनका जीवन पूरी तरह प्रभावित हो गया है।
गौरतलब है कि निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी पहले से ही जांच के दायरे में है। सोसायटी की वित्तीय स्थिति और जमाकर्ताओं के भुगतान को लेकर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। इसी बीच प्रमोटर के घर पहुंचकर किए गए विरोध ने मामले को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।
अब सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि प्रमोद मानमोडे कब सामने आते हैं और प्रस्तावित प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या कोई ठोस समाधान सामने रखा जाता है। फिलहाल जमाकर्ताओं की एक ही मांग है-उन्हें उनकी जीवनभर की मेहनत की कमाई जल्द से जल्द वापस मिले।
..पारस बैसवारे




