नागपुर: Nirmal Ujjwal Credit Cooperative Society को लेकर बढ़ती चिंता और सवालों के बीच संस्था के संस्थापक एवं निदेशक प्रमोद मनमोडे का एक वीडियो संदेश सामने आया है। इसमें उन्होंने ठेवीदारों से घबराने की अपील नहीं करने, संस्था की वित्तीय स्थिति मजबूत होने और जमा राशि सुरक्षित होने का दावा किया है।
लेकिन इस वीडियो संदेश ने स्थिति स्पष्ट करने के बजाय एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है-अगर सब कुछ इतना सुरक्षित और मजबूत है, तो पिछले कुछ समय से परेशान ठेवीदारों के सामने स्वयं प्रमोद मनमोडे क्यों नहीं आ रहे?
Nirmal Ujjwal की स्थापना 27 मार्च 1989 को हुई थी। संस्था की अपनी वेबसाइट प्रमोद एन. मनमोडे को इसका संस्थापक बताती है। यानी संस्था के साथ उनका जुड़ाव लगभग 37 वर्षों का है।
ऐसे में वर्षों से संस्था पर भरोसा करने वाले ठेवीदारों का यह सवाल स्वाभाविक है कि उन्हें सीधे आमने-सामने जवाब देने के बजाय वीडियो संदेश क्यों दिया जा रहा है?
CRCS ने वास्तव में क्या रोका है?
यहां तथ्यों को लेकर भी भ्रम दूर करना जरूरी है।
Central Registrar of Cooperative Societies (CRCS) ने 24 अप्रैल 2026 के आदेश के जरिए Nirmal Ujjwal को नए deposits, contributions और investments लेने तथा मौजूदा deposits को renew करने से रोका था।
यानी उपलब्ध आदेश को केवल इस रूप में समझना सही नहीं होगा कि CRCS ने हर मौजूदा ठेवीदार को उसकी जमा राशि लौटाने पर blanket रोक लगा दी है।
तो फिर असली सवाल यह है—
अगर मौजूदा FD लौटाने पर कोई blanket regulatory prohibition नहीं है, तो जिन ठेवीदारों को अपनी जमा राशि चाहिए, उनके भुगतान की स्थिति क्या है?
यही वह सवाल है जिसका स्पष्ट, दस्तावेजी और ठेवीदारों को संतुष्ट करने वाला जवाब सामने आना चाहिए।
‘पैसा सुरक्षित है’-तो फिर आंकड़े सार्वजनिक क्यों नहीं?
संस्था के संस्थापक का दावा है कि Nirmal Ujjwal के पास पर्याप्त से अधिक संपत्ति और वित्तीय क्षमता है तथा ठेवीदारों को डरने की जरूरत नहीं है।
लेकिन ऐसे दावे केवल वीडियो संदेश से नहीं, audited और independently verifiable financial data से साबित होते हैं।
ठेवीदारों को बताया जाना चाहिए:
- कुल वर्तमान deposits कितने हैं?
- कुल liquid assets कितने हैं?
- तत्काल भुगतान योग्य राशि कितनी उपलब्ध है?
- कुल outstanding loans कितना है?
- कितने loans NPA या doubtful category में हैं?
- संस्था की कुल संपत्ति और कुल liabilities कितनी हैं?
- किन संबंधित संस्थाओं या enterprises में funds लगाए या transferred किए गए?
- और सबसे महत्वपूर्ण—अगर पैसा सुरक्षित है तो eligible FD payments की स्पष्ट timeline क्या है?
कोर्ट रिकॉर्ड में उठे वित्तीय सवालों का क्या?
यह मामला केवल सोशल मीडिया पर चल रही अफवाहों तक सीमित नहीं है।
Bombay High Court के 2026 के proceedings में SIT investigation और संस्था से जुड़े गंभीर वित्तीय आरोपों का उल्लेख हुआ है। रिकॉर्ड में deposits, कथित fund diversion, कुछ enterprises को loans/funds transfer और financial irregularities से जुड़े आरोपों का उल्लेख है।
इन आरोपों का अंतिम सत्य न्यायिक प्रक्रिया और जांच से ही तय होगा। लेकिन ठेवीदारों का सवाल बिल्कुल वैध है—जब इतने गंभीर सवाल उठ चुके हैं, तो संस्था management को प्रत्येक आरोप और प्रत्येक financial concern पर detailed public clarification क्यों नहीं देना चाहिए?
प्रमोद मनमोडे ठेवीदारों से सीधे क्यों नहीं मिल रहे?
यह सबसे बड़ा सवाल है।
जिस व्यक्ति ने 1989 में संस्था की नींव रखी और जिसने वर्षों तक लोगों से विश्वास के आधार पर deposits जुटाए, उनसे ठेवीदारों की अपेक्षा स्वाभाविक है कि वे उनके सामने बैठकर सवालों के जवाब दें।
क्या प्रमोद मनमोडे नागपुर में ठेवीदारों की खुली बैठक बुलाएंगे?
क्या वे-
“पूछिए, मैं जवाब दूंगा”
के आधार पर ठेवीदारों के सामने आएंगे?
अगर संस्था वास्तव में मजबूत है, तो ऐसा संवाद संस्था के लिए भी राहत का रास्ता हो सकता है।
नए deposits पर रोक-क्या यह warning signal नहीं?
CRCS ने fresh/new deposits लेने और existing deposits renew करने पर रोक लगाई है।
ऐसे regulatory restrictions को सामान्य घटना बताकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
नई FD नहीं।
नई deposit mobilisation नहीं।
Existing deposits का renewal नहीं।
ऐसे प्रतिबंध किसी भी financial cooperative के लिए गंभीर regulatory warning signs हैं।
इसका अर्थ यह नहीं कि संस्था निश्चित रूप से डूब गई है या हर deposit असुरक्षित है। लेकिन यह जरूर बताता है कि regulators ने स्थिति को इतना गंभीर माना कि fresh funds जुटाने पर रोक लगाना जरूरी समझा।
और यही वजह है कि ठेवीदारों को भावनात्मक आश्वासन से ज्यादा ठोस financial transparency चाहिए।
संस्था को अब क्या स्पष्ट करना चाहिए?
यदि Nirmal Ujjwal वास्तव में ठेवीदारों का विश्वास कायम रखना चाहती है, तो केवल यह कहना पर्याप्त नहीं होगा कि—
“घबराने की जरूरत नहीं है।”
उसे बताना होगा:
- कुल deposits कितने हैं?
- कुल assets कितने हैं?
- कितनी रकम तुरंत उपलब्ध है?
- कितने ठेवीदारों की FD maturity हो चुकी है?
- कितनी राशि का भुगतान लंबित है?
- लंबित भुगतान कब तक किए जाएंगे?
- CRCS order के बाद existing depositors के लिए क्या payment mechanism है?
- SIT investigation में उठाए गए financial issues पर संस्था का जवाब क्या है?
- कथित fund diversion की वास्तविक स्थिति क्या है?
- क्या संस्था independent forensic audit report सार्वजनिक करेगी?
- क्या प्रमोद मनमोडे स्वयं ठेवीदारों के साथ खुली बैठक करेंगे?
ठेवीदारों को सिर्फ भरोसा नहीं, जवाब चाहिए
Nirmal Ujjwal लगभग चार दशक से लोगों के विश्वास पर खड़ी संस्था होने का दावा करती है।
लेकिन 37 साल का विश्वास किसी एक वीडियो संदेश से कायम नहीं रहेगा।
विश्वास तब कायम रहेगा जब ठेवीदारों को उनके सवालों के जवाब मिलेंगे, audited figures सामने आएंगे, payment mechanism स्पष्ट होगा और management खुद सामने आकर जवाब देगा।
आज सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि “अफवाहों पर विश्वास करें या नहीं?”
सबसे बड़ा सवाल यह है:
अगर संस्था के पास पर्याप्त संपत्ति और वित्तीय क्षमता है, तो ठेवीदारों को अपनी जमा राशि की स्थिति जानने के लिए इतने सवाल क्यों करने पड़ रहे हैं?
और प्रमोद मनमोडे से सबसे सीधा सवाल-
आपके साथ 37 वर्षों से जुड़े ठेवीदार आज आपको सीधे सामने देखना चाहते हैं। क्या आप उनके बीच आकर, खुले मंच पर, उनके हर सवाल का जवाब देंगे?
क्योंकि इस समय Nirmal Ujjwal को सबसे ज्यादा जरूरत वीडियो संदेश की नहीं, खुले संवाद और ठोस वित्तीय पारदर्शिता की है।




