नागपुर: निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसायटी को लेकर पिछले कुछ महीनों से ठेवीदारों के बीच उठ रहे सवालों के बीच अब 24 सितंबर 2026 को होने वाली संस्था की 37वीं वार्षिक आमसभा (AGM) पर भी नजरें टिक गई हैं।
संस्था की ओर से जारी AGM नोटिस में सदस्यों से बैठक में शामिल होने का अनुरोध किया गया है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि यदि कोरम पूरा नहीं होता है तो बैठक आधे घंटे के लिए स्थगित कर उसी दिन और उसी स्थान पर दोबारा आयोजित की जाएगी, जिसमें कोरम की आवश्यकता नहीं होगी।
लेकिन नोटिस में बैठक के दौरान “maintain decorum” बनाए रखने की बात भी कही गई है।
यहीं से एक बड़ा सवाल सामने आता है—
क्या यह सामान्य प्रशासनिक सावधानी है या ऐसी स्थिति की पूर्व तैयारी, जिसमें तीखे सवालों को ‘डेकोरम’ का मुद्दा बनाकर बैठक को जल्द समाप्त किया जा सके?
यह कहना अभी संभव नहीं है कि संस्था की ऐसी कोई योजना है। लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यह सवाल उठना स्वाभाविक है।
ठेवीदारों के सवाल अभी भी कायम
निर्मल उज्ज्वल को लेकर 2026 में सबसे बड़ा विवाद ठेवीदारों की जमा राशि और मैच्योर FD के भुगतान को लेकर सामने आया।
कई ठेवीदारों ने आरोप लगाया है कि उनकी FD मैच्योर होने के बावजूद भुगतान में देरी हो रही है। कुछ ठेवीदारों ने शाखाओं के चक्कर लगाने और भुगतान के लिए इंतजार करने की बात कही है।
अगस्त में स्थिति और गंभीर नजर आई, जब ठेवीदार संस्था के संस्थापक के निवास पर पहुंचे और अपनी जमा राशि वापस करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों ने मैच्योर FD के भुगतान में देरी के आरोप लगाए थे।
चंद्रपुर में भी खातेदारों की ओर से जमा राशि निकालने में परेशानी की शिकायतें सामने आईं और स्थानीय स्तर पर जांच की मांग उठी।
दूसरी तरफ नियामकीय कार्रवाई
मामला केवल ठेवीदारों की शिकायतों तक सीमित नहीं है।
Central Registrar of Cooperative Societies (CRCS) की ओर से अप्रैल 2026 में निर्मल उज्ज्वल को नए deposits, contributions और investments लेने तथा मौजूदा deposits को renew करने पर रोक लगाए जाने की कार्रवाई सामने आई थी।
इस कार्रवाई में संस्था के कामकाज को लेकर financial irregularities, funds के diversion, conflict of interest और regulatory non-compliance से जुड़े prima facie concerns का उल्लेख किया गया था।
मामले से जुड़े न्यायिक रिकॉर्ड में भी इन जांच और नियामकीय कार्रवाइयों का उल्लेख सामने आया है।
हालांकि, इन observations और आरोपों को अंतिम रूप से सिद्ध अपराध के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
‘क्लीन चिट’ के दावे के बावजूद सवाल बरकरार
जून में संस्था को SIT से कथित तौर पर ‘क्लीन चिट’ मिलने की खबर सामने आने के बाद भी कई सवाल उठे।
एक तरफ संस्था की ओर से राहत मिलने के दावे सामने आए, तो दूसरी तरफ नियामकीय कार्रवाई और ठेवीदारों की भुगतान संबंधी शिकायतें भी चर्चा में रहीं।
यानी ठेवीदारों के सामने मूल सवाल अब भी वही है—
अगर संस्था की वित्तीय स्थिति को लेकर सब कुछ स्पष्ट है, तो मैच्योर जमा राशि के भुगतान की स्थिति क्या है?
संस्था की ओर से यह भी कहा गया है कि जमा राशि सुरक्षित है, लेकिन ठेवीदार भुगतान की समयसीमा और अपनी व्यक्तिगत जमा राशि की वापसी को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
अब AGM में क्या पूछा जाना चाहिए?
24 सितंबर की AGM में सिर्फ Balance Sheet, Profit & Loss और Budget पर चर्चा काफी नहीं होगी। मौजूदा विवाद को देखते हुए सदस्यों और ठेवीदारों के सामने कई सीधे सवाल हैं:
1. कितनी FD वर्तमान में मैच्योर हो चुकी हैं लेकिन उनका भुगतान लंबित है?
2. कुल लंबित भुगतान की राशि कितनी है?
3. जमाकर्ताओं के भुगतान की स्पष्ट समयसीमा क्या है?
4. CRCS की कार्रवाई के बाद संस्था की वर्तमान वित्तीय स्थिति क्या है?
5. नए deposits और existing deposits के renewal पर लगी रोक के संदर्भ में संस्था ने क्या कदम उठाए हैं?
6. SIT जांच की वर्तमान स्थिति क्या है और उसका आधिकारिक निष्कर्ष क्या है?
7. AGM के सामने संस्था की संपत्ति बेचने का प्रस्ताव क्यों लाया जा रहा है और उससे प्राप्त धन का उपयोग किस उद्देश्य से किया जाएगा?
8. और सबसे अहम-
जिन ठेवीदारों का पैसा मैच्योर हो चुका है, उन्हें उनका पैसा कब मिलेगा?
‘डेकोरम’ जरूरी है, लेकिन जवाब भी जरूरी हैं
AGM में अनुशासन और शालीनता बनाए रखना निश्चित रूप से जरूरी है। लेकिन डेकोरम का अर्थ यह नहीं होना चाहिए कि सदस्य अपने पैसे और संस्था के कामकाज से जुड़े कठिन सवाल ही न पूछ सकें।
24 सितंबर की बैठक इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह सिर्फ एक औपचारिक AGM नहीं होगी। संस्था से जुड़े विवादों और ठेवीदारों की चिंताओं के बीच यह वह मंच है जहां प्रबंधन के पास दस्तावेजों और आंकड़ों के साथ जवाब देने का अवसर होगा।
और अगर सवाल पूछे जाते हैं, तो सबसे जरूरी बात यह होगी कि उन्हें “डेकोरम” का मुद्दा बनाकर टालने के बजाय रिकॉर्ड पर जवाब दिया जाए।
AGM होगी… सवाल भी होंगे।
अब देखना है-जवाब कितने मिलते हैं।




