Published On : Thu, Jul 26th, 2018

निर्मल उज्वल सहकारी संस्था के संचालक प्रमोद मानमोड़े पर 14.34 करोड़ की धोखाधड़ी

नागपुर: निर्मल नगरी में फ्लैट और घर धारकों के साथ 14.34 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी होने का मामला सामने आया है. प्राथमिक जांच के बाद नंदनवन पुलिस ने निर्मल उज्वल सहकारी संस्था के संचालक मंडल सहित 15 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है.

आरोपियों में संस्था के अध्यक्ष निर्मल गंगा अपार्टमेंट, नंदनवन निवासी प्रमोद नत्थू मानमोड़े, जयप्रकाशनगर निवासी वामनराव भलवतकर, रेशिमबाग निवासी सत्येंजय आर. त्रिवेदी, कावरापेठ निवासी विट्ठलराव एम. गावंडे, मोर्शी निवासी प्रदीप गोवर्धनराव राउत, मौदा निवासी शिवराज विजयकुमार गुजर, वर्धा निवासी लक्ष्मी नारायण चांडक, सावनेर निवासी बबनराव पिलाजी तिड़के, वर्धा निवासी नरेश यश लखोटिया, आशीर्वादनगर निवासी रश्मि संजय ठाकरे, वाठोड़ा निवासी सविता पी. बोबड़े, न्यू सहकारनगर निवासी धनंजय बालाजी धकाते, बाजारगांव, कोंढाली निवासी धनश्याम आर. गांधी, नंदा बांते और प्रतिमा खाड़े का समावेश है.

निर्मलनगरी निवासी प्रफुल्ल नामदेवराव करपे (44) की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है. प्रफुल्ल की शिकायत के अनुसार वर्ष 2008 में उन्हें निर्मल उज्वल सोसायटी लि. द्वारा उमरेड रोड पर 21 एकड़ जमीन पर निर्मल नगरी बनने की जानकारी दी गई. वहां उन्होंने ने भी रो हाउस बुक किया.

2013 में उन्हें पजेशन देते समय वन टाइम मेंटनेन्स, विकास, इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर, वाटर मैनेजमेंट सहित विविध शुल्क बताकर 1.25 लाख रुपये लिए गए. उसके बाद ही पजेशन दिया गया. कालोनी में घर और फ्लैट लेने वाले सभी लोगों से इस तरह पैसे लिए गए, लेकिन प्रत्यक्ष रूप से इस पैसे का उपयोग कालोनी के विकास के लिए नहीं किया गया. कुल 14.34 करोड़ रुपये जमा किए गए.

सोसायटी के संचालकों ने अपने और अपने रिश्तेदारों के नाम पर कर्ज लेकर इस पैसे का उपयोग खुदके फायदे के लिए किया. कर्ज डुबा दिया और वसूली करने की कोई कार्रवाई नहीं हुई. ऑडिट में यह बात सामने आई. कई दिनों तक दस्तावेजों की छानबीन करने के बाद नंदनवन पुलिस ने विविध धाराओं के तहत 15 लोगों पर एफआईआर दर्ज की है.

लगाए गए आरोप तथ्यहीन – मानमोड़े
निर्मल उज्वाल सोसायटी के अध्यक्ष प्रमोद मानमोड़े ने कहा कि निर्मल नगरी के संबंध में नंदनवन पुलिस थाने में दर्ज की गई शिकायत के बारे में आज ही मालूम पड़ा. यह शिकायत पूरी तरह फर्जी है और लगाए गए आरोप तथ्यहीन है. निर्मल नगरी में हमने लोगों को घर बनाकर बेचे है. ऐसे में 14 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाना समझ से परे है. पुलिस से इस संबंध में विस्तृत जानकारी लेकर ही कुछ कहा जा सकता है.