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    Published On : Thu, Dec 6th, 2018

    स्वच्छ भारत अभियान टीम के फरवरी दौरे से पहले फूले मनपा के हाथ पांव

    शहर स्वच्छ दिखाने जनता और व्यवसायियों पर जुर्माने का बनाया जा रहा दबाव

    नागपुर : नागपुर मनपा स्वास्थ्य विभाग के सैंकड़ों अधिकारी-कर्मचारी हैं, साथ ही घन कचरा प्रबंधन करनेवाली निजी कम्पनी कनक की सहायता ली जाती है, बावजूद इसके स्वच्छ भारत अभियान के लक्ष्य को पाने के लिए सभी के हाथ पांव फूलने लगते हैं. अगले साल फरवरी में स्वच्छ भारत अभियान के दल का नागपुर में दौरा प्रस्तावित है. इसकी सुगबुगाहट से मनपा स्वास्थ्य विभाग सकते में आ गया है.

    इतना ही नहीं स्वच्छ भारत मिशन के तहत मनपा को मिली निधि का बंटाधार कर अवैध जगहों पर सार्वजानिक शौचालयों का निर्माण किया गया. अब जबकि फरवरी में एसबीएम का निरिक्षण दौरा और दौरे बाद मिलने वाले अंक पर शहर की पोजीशन तय होना हैं लिहाजा अपना दोष छुपाने के लिए स्वास्थ्य विभाग अब बड़े होटलों पर खुद कचरा प्रक्रिया और जनता को १८० रूपए से लेकर ५०० रुपए तक का जुर्माना ठोंकने की चेतावनी दे रही है. इस चेतावनी के तहत कार्रवाई की शुरुआत १७ दिसंबर से की जाएगी.

    नागरिकों से सूखा-गीला कचरा संकलन को एक ओर मनपा अनिवार्य करने पर लगी हुई है. लेकिन कनक को यही गीला-सूखा कचरा मिला हुआ भांडेवाडी में डम्प करने की छूट देना समझ से परे है.

    मनपा में सफाई कर्मी का ४०% हिस्सा काम नहीं करता. ट्रैकिंग घडी नहीं पहनता. फिर भी उनकी हाज़री रोज लगाई जा रही है. यही नहीं जोन में इंस्पेक्टर राज है जो जनता पर दबाव बना रहे हैं वहीं कचरा करने वाले व्यवसायियों से वसूली में मदमस्त हैं.

    उल्लेखनीय यह है कि कनक ने कमोबेश १० साल मनपा पर एकाधिकार कायम रखा. जिसमें पूर्व स्वास्थ्य विभाग प्रमुख और अधिकांश नगरसेवकों का सहयोग रहा. प्रशासनिक अड़चनों से उक्त अधिकारी जो सेवानिवृत हो गए उन्होंने बचाए रखा तो नगरसेवकों ने अपने-अपने प्रभागों के बेरोजगारों को कनक के तहत रोजगार दिलाकप चुप्पी साधे रखा. वहीं इस एक दशक में कुछ पदाधिकारी कनक का शोषण करते रहे.

    कामगार न्यायालय के सूत्रों के अनुसार कनक जैसे ठेकेदार भले ही बदल दिए जाएं लेकिन कनक के तहत काम कर रहे कर्मियों का रोजगार न छीनने का निर्देश भी मनपा को दिया जा चुका है. पिछले एक वर्ष से अधिक समय से कनक ने प्रकल्प के तहत निवेश करना बंद कर दिया है और सिर्फ किए गए निवेश की वसूली के लिए वजनदार कचरा उठाने पर जोर दे रही है. क्योंकि १३०३ रुपए टन के हिसाब से मनपा कनक को भुगतान कर रही है लिहाजा रोज १३०० टन के आसपास कचरा संकलन होता है, जिसे भांडेवाड़ी में डाला जाता है.


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