Published On : Sat, May 19th, 2018

ऑटो से मर्सडीज तक, 12 हजार से 500 करोड़ तक


नागपुर: लाखों युवा सपने देखते है कोशिशें करते है मेहनत करते है पर मंजिल तक कुछ लोग ही पहुंच पाते है। सफलता के परिमाण या पैमाने उन्हीँ के आगे झुकते है जो सची लगन के साथ ऊपरवाले पर भी भरोसा रखते है । जी हा वही छिपी हुई शक्ति जो राई को पहाड़ बना दे, असम्भव सा बदलाव करा दे, जिसे ईश्वर या अल्लाह कहा जाता है ।

नागपुर के दीघोरी इलाके के स्लम में रहने वाले प्यारे खान जो कुछ सालों पहले ऑटो चलाया करते थे । गेराज में काम किया करते, कभी ऑर्केस्ट्रा में की बोर्ड बजाते तो कभी रास्तों पर फिंगर्स बेचा करते थे । आज अपनी मा ने दिये हुए 12 हजार के लागत रूपी आशीर्वाद से सैकड़ों करोड़ रुपयों का कारोबार स्थापित कर चुके है और इसके पीछे है उनकी लगन, ईमानदारी , और पुरे भरोसे से रोजाना नमाज ।

चालीस वर्षीय प्यारे खान ने हर तकलीफ झेली ऑटो चलाते हुए बस खरीदी फिर ट्रक और फिर खड़ी कर दी सैकड़ों ट्रक और ट्रैलर की कतारें इतने पर भी बस नहीं हुआ उनके मालकियत की ट्रेनें भी परिवहन का काम करने लग गयी और देश के जाने माने व्यापारी संस्थान टाटा , सान्ग्वी , जेएसडब्लू , जिंदल ग्रूप , के साथ ही साथ भूटान नेपाल बर्मा जैसे देशों में भी अपने करोबार को बढाया है । आज देश के कई शहरों में उनके कार्यालय मौज़ूद है सैकड़ों लोग मौज़ूद है सैकड़ों वाहन मौजूद है मौज़ूद है बड़ा नाम और अगर मौज़ूद नहीं है तो सिर्फ सफलता का घमंड । हमेशा अल्लाह पर भरोसा रख काम करने वाले प्यारे खान कैसे सफल होते चले गये उन्हें भी नहीं पता ।

उसपर भी उनके कारोबार का हर व्यवहार बेंकिंग द्वारा किया जाने के साथ हर तरह से पारदर्शक है । टेक्स की चुकाना वे अपना सामजिक कर्तव्य समझते है और यही वजह है के जिस इलाके में कोई बेंक कर्ज नहीं देती थी जिसे ब्लेक लिस्ट स्लम माना जाता रहा है आज उसी इलाके में कई बेंक कर्ज देने तैयार खड़ी है ।

प्यारे खान घर की माली हालात के चलते पढ़ाई पुरी नहीं कर पाये थे कक्षा दसवीं भी वे पास नहीं कर पाये और घर चलाने गेराज में काम करना मज़बूरी बन गया था । कारोबार की बढ़त के बाद अपने ही वाहनों के ईंधन के लिये एक पेट्रोल पम्प भी स्थपित किया उस पम्प को प्राप्त करने की पात्रता में दसवींकक्षा पास होनी जरूरी था । सो उस के लिये भी व्यवसाय के साथ पुरे ईमानदारी से पढ़ाई कर ही पहले परीक्षा पास की फिर आवेदन किया । आज भी आगे की पढ़ाई उन्होंने जारी रखते हुए प्यारे ख़ान – कारोबारी ।

किसी की नौकरी न कर खुद अख्तियार होकर काम करने का अपने लाडले बेटे का जज्बा जब परिस्थिति की मारी एक माँ ने पहचाना तो अपने जेवर गिरवी रख कर बारह हजार रूपी आशीर्वाद और दुवाये दे लोन पर एक ऑटो खरीद दिया अपनी मेहनत के बल पर केवल छः माह में उस का समूचा लोन चुका जो सफलता की बढ़त हासिल कर इस लायक बेटे ने उस माँ का सर गर्व से ऊंचा कर रखा है । और आज करोड़ों की आमदनी करने वाली उस माँ का स्वाभिमान और सादगी भी देखने लायक है । जिस छोटीसी किराना दुकान के बल पर अपने बीमार पति की सेवा की तीनों बेटों की परवरिश की उन्हें इतना बड़ा बनाया उस दुकान पर आज भी बैठकर अपने स्वाभिमान का परिचय देने वाली माँ लाखों में एक है ।

Video Credit: JK 24×7 News