नागपुर: शीतकालीन अधिवेशन कामकाज का पहला हफ्ता डिमोनिटाइजेशन की भेंट चढ़ गया। ईद की छुट्टी बाद मंगलवार से फिर एक बार अधिवेशन का कामकाज शुरू होगा इसलिए फिर एक बार सबकी निगाहे अधिवेशन पर लगी है की क्या आखिरी हफ्ते में विदर्भ से जुड़े मुद्दों पर बहस होगी। ज्ञात हो की विदर्भ के प्रश्नों को सुलझाने के लिए ही नागपुर में शीतकालीन अधिवेशन लिया जाता है। पर आम तौर पर होता यही आया है की विदर्भ के मुद्दों पर चर्चा की बजाय अधिवेशन हंगामे की भेंट ही चढ़ जाता है।
विपक्ष की भूमिका में रहते हुए बीजेपी थोड़ा बहुत विदर्भ पर चर्चा के लिए पहल करती थी। पर अब वो सत्ता में काबिज है वो भी विदर्भ के भरोषे पर ऐसे में उसकी जिम्मेदारी बड़ी है की जिस विदर्भ की राजनीति करते हुए विदर्भ के भरोषे पर देवेंद्र फडणवीस मुख्यमंत्री पद पर काबिज हुए वो अपनी उपलब्धियां बताए।
सिंचन, रोजगार, किसान आत्महत्या, भौतिक विकास को लेकर हो रहे कामो को लेकर विशेषज्ञ असंतुस्ट ही नज़र आ रहे है। ऐसे में जरुरी है की विदर्भ की मौजूद स्थिति की समीक्षा अधिवेशन के माध्यम से की जाये। विदर्भ का महाराष्ट्र में विलय कुछ खास संवैधानिक मुद्दों के साथ हुआ था। पिछली सरकारों पर करारो की अवहेलना करने का लगातार आरोप लगता रहा है। सरकार विदर्भ के विकास के लिए खुद को कटिबद्ध बता रही है पर वास्तव में कितना काम विदर्भ के विकास के लिए हुआ यह तो चर्चा से ही साफ हो पायेगा। इसलिए नजर मंगलवार से शुरू विधिमंडल की कार्यवाही पर टिकी है की आखरी हफ्ते में विदर्भ के मुद्दों पर चर्चा होगी भी या हंगामा ही होगा।
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