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    Published On : Fri, Jul 27th, 2018

    हफ्ते भर की ट्रक हड़ताल से उपराजधानी को अकेले 200 करोड़ का नुकसान

    नागपुर : पिछले सात दिनों से देश भर में अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ट्रक ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल जारी है. जिसके कारण करोड़ों रुपये का नुक्सान हो रहा है. नागपुर शहर में ही हड़ताल के कारण करीब 200 करोड़ का नुक्सान अब तक हो चुका है. बुधवार को केंद्रीय मंत्री पियूष गोयल के साथ दिल्ली में ट्रक एसोसिएशन के पदाधिकारियों के साथ उनकी मुलाक़ात हुई. लेकिन यह मुलाक़ात बेनतीजा रही.

    इन्हें आश्वसन दिया गया था कि तीन महीने बाद इस पर निर्णय लिया जाएगा. फिलहाल हड़ताल को स्थगित कर दिया जाए. लेकिन ट्रक एसोसिएशन ने इसके लिए मना कर दिया. ट्रक की हड़ताल होने के कारण सीधे सीधे इसका व्यापक असर रोजमर्रा की उपयोग में लायी जानेवाली वस्तुओं पर पड़ा है. दूध, सब्जी, सभी चीजे महंगी हो गई हैं.

    नागपुर ट्रक यूनिटी एसोसिएशन के अध्यक्ष कुकू मारवाह ने जानकारी देते हुए बताया कि हड़ताल समाप्त नहीं हुई है. समाप्त होने की अफवाह फैलाई गई है. हड़ताल के कारण मजदूर, चालक सभी बेकार हो चुके हैं. टोल, पेट्रोल पम्प पर भी ट्रक नहीं दिखाई दे रहे हैं. सरकार हमारी नहीं सुन रही है.

    नागपुर के एक हजार के करीब ट्रक और हजार से 1200 एसोसिएशन इस हड़ताल में शामिल हैं. सभी संगठनों ने इस हड़ताल को समर्थन दिया है. उन्होंने बताया कि मुख्य मांगों में डीजल पेट्रोल को जीएसटी के दायरे में लाने, टोल मुक्त करने, थर्ड पार्टी इन्शुअरेंस को कम करना चाहिए. साथ ही एक ट्रक से साढ़े सात हजार रुपए इनकम टैक्स लिया जाता है जो अभी बढ़ाकर 30 हजार रुपये किया जानेवाला है.

    इसका भी विरोध ट्रक एसोसिएशन कर रहा है. मारवाह ने बताया कि ट्रक चालकों को घर से 5 से 10 हजार रुपए का खर्च आ रहा है. कुछ भी नहीं बच रहा है. सरकार को लगता है की बहुत कमाई हो रही है. लेकिन ऐसा नहीं है लाखों रुपए डीजल में जा रहा है. अगर ऐसी ही हालत रही तो हमें आत्महत्या करने की नौबत आ जाएगी.

    मारवाह का कहना है कि राज्य के मुख्यमंत्री ने, न तो शहर के केंद्रीय मंत्री दोनों में से किसी ने भी बातचीत के लिए हमें नहीं बुलाया. बुधवार को पियूष गोयल के साथ मीटिंग हुई. जिसमे ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस असोसिएशन के अध्यक्ष एस. के. मित्तल भी शामिल थे.

    जिसमें सरकार ने 3 महीने का समय माँगा था. लेकिन असोसिएशन के पदाधिकारियों ने यह कहते हुए मना किया कि 30 से 35 सालों से ऐसे ही आश्वासनों पर हड़ताल स्थगित की जा रही है. हड़ताल के कारण जो भी नुक्सान या जनहानी होगी उसके लिए केंद्र सरकार और राज्य सरकार जिम्मेदार होगी. मारवाह के अनुसार पूरा कारोबार बंद है. व्यापारी परेशान हो चूका है. लेकिन सरकार की ओर से कोई सुनवाई नहीं हो रही है. दूधवालों का आंदोलन हुआ उसमे सरकार ने जल्द से उनके पैसे बढ़ा दिए. लेकिन हम पर सरकार ध्यान नहीं दे रही है.

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