नागपुर: केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी स्मार्ट सिटीज मिशन आधिकारिक रूप से समाप्त हो चुकी है, लेकिन नागपुर में इसके अधूरे काम और भविष्य को लेकर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। स्मार्ट सिटी परियोजनाओं का संचालन करने वाली Nagpur Smart and Sustainable City Development Corporation Limited (NSSCDCL) अब अपने अंतिम चरण में है और उसकी अधिकांश परिसंपत्तियां नागपुर महानगरपालिका (NMC) को सौंपी जा रही हैं।
7 परियोजनाएं अब भी अधूरी
नागपुर में स्मार्ट सिटी के तहत कुल 47 प्रमुख परियोजनाएं शुरू की गई थीं। इनमें से अधिकांश पूरी हो चुकी हैं, लेकिन 7 परियोजनाएं अभी भी अधूरी हैं। इनमें से छह पर काम जारी है, जबकि ईंट-भट्ठा मजदूर परिवारों के पुनर्वास से जुड़ी एक परियोजना भूमि संबंधी विवाद के कारण अटकी हुई है।
NMC पर बढ़ेगा करोड़ों का बोझ
स्मार्ट सिटी के तहत लगाए गए हजारों CCTV कैमरे, इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम और अन्य हाई-टेक सुविधाओं का रखरखाव अब नागपुर महानगरपालिका को करना होगा। रिपोर्टों के अनुसार, केवल CCTV नेटवर्क के संचालन और रखरखाव पर ही हर साल करोड़ों रुपये खर्च होंगे।
कुछ प्रोजेक्ट सफल, कुछ बने ‘व्हाइट एलिफेंट’
जहां स्मार्ट CCTV नेटवर्क ने अपराध नियंत्रण, ट्रैफिक मॉनिटरिंग और आपदा प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, वहीं कई स्मार्ट कियोस्क जैसी परियोजनाएं उपयोग के अभाव में बंद पड़ी हैं। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद ये सुविधाएं नागरिकों के लिए प्रभावी साबित नहीं हो सकीं।
पूर्वी नागपुर के विकास पर भी सवाल
स्मार्ट सिटी के Area Based Development (ABD) के तहत पूर्वी नागपुर के पर्डी, भारतवाड़ा, भांडेवाड़ी और पुनापुर क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर सड़कें, सार्वजनिक भवन और अन्य बुनियादी ढांचे विकसित किए गए। लेकिन कई स्थानों पर अधूरी कनेक्टिविटी और बुनियादी सुविधाओं की कमी के कारण इन निवेशों की उपयोगिता पर सवाल उठ रहे हैं।
अब असली परीक्षा NMC की
विशेषज्ञों का मानना है कि स्मार्ट सिटी मिशन के बंद होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती इन परिसंपत्तियों का नियमित रखरखाव और प्रभावी संचालन होगा। यदि समय रहते पर्याप्त बजट और प्रबंधन नहीं किया गया, तो करोड़ों रुपये की परियोजनाएं धीरे-धीरे निष्प्रभावी हो सकती हैं।
Nagpur Today View
सवाल सिर्फ इतना नहीं कि स्मार्ट सिटी में कितना पैसा खर्च हुआ। असली सवाल यह है कि क्या नागपुर वास्तव में ‘स्मार्ट’ बना, या फिर कई परियोजनाएं उद्घाटन तक ही सीमित रह गईं? अब जब जिम्मेदारी NMC के हाथ में है, तो आने वाले वर्षों में ही तय होगा कि यह निवेश शहर के लिए स्थायी संपत्ति साबित होगा या रखरखाव के अभाव में बोझ बन जाएगा।




