Published On : Sat, Aug 1st, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

RTI EXCLUSIVE: नाले साफ करने पर करोड़ों खर्च, फिर भी हर बारिश में क्यों डूबता है नागपुर?

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नागपुर : नागपुर में हर मानसून के दौरान जलभराव की समस्या लगातार गंभीर होती जा रही है। सड़कें तालाब बन जाती हैं, घरों और दुकानों में पानी भर जाता है और आम नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब हर साल नालों और नदियों की सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, तो आखिर शहर पानी में क्यों डूब जाता है?

इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए RTI कार्यकर्ता अभय कोलारकर द्वारा सूचना के अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी में कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं। नागपुर महानगरपालिका के घनकचरा व्यवस्थापन विभाग और यांत्रिकी (कारखाना) विभाग ने अपने जवाब में सफाई कार्यों पर हुए खर्च, कर्मचारियों की संख्या और ठेकेदारों से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई है।

हर साल बढ़ता गया सफाई का बजट

आरटीआई में दी गई जानकारी के अनुसार बड़े नालों और नदियों की सफाई के लिए स्वीकृत राशि लगातार बढ़ाई गई।

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  • 2022-23 : ₹99 लाख
  • 2023-24 : ₹1.93 करोड़
  • 2024-25 : ₹7 करोड़
  • 2025-26 : ₹8 करोड़
  • 2026-27 : ₹9 करोड़ का प्रावधान रखा गया है।

यानी चार वर्षों में नालों की सफाई पर बजट में कई गुना वृद्धि हुई।

मशीनों पर भी करोड़ों का खर्च

दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2024 में नदियों की सफाई के लिए मशीनें किराये पर लेने पर लगभग ₹2.89 करोड़ खर्च किए गए, जबकि वर्ष 2025 में यह खर्च बढ़कर ₹5.30 करोड़ पहुंच गया।

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इसके अलावा वर्ष 2026 में मनपा की अपनी लॉन्ग-बूम पोकलेन मशीन के ईंधन पर भी लगभग ₹8.79 लाख खर्च किए गए।

1669 कर्मचारी तैनात

घनकचरा व्यवस्थापन विभाग ने अपने जवाब में बताया है कि नदियों और नालों की सफाई के लिए जोनवार कुल 1,669 कर्मचारी नियुक्त हैं।

2026 में किन नदियों की हुई सफाई?

आरटीआई के अनुसार वर्ष 2026 में नाग, पिवली और पोहरा नदी की सफाई कराई गई।

अब सबसे बड़ा सवाल…

जब…

  • करोड़ों रुपये का बजट मंजूर हुआ,
  • मशीनों पर करोड़ों रुपये खर्च हुए,
  • 1,669 कर्मचारी तैनात रहे,

तो फिर हर मानसून में नागपुर के कई इलाके जलमग्न क्यों हो जाते हैं?

क्या सफाई कार्य पर्याप्त नहीं हैं?

क्या ड्रेनेज नेटवर्क की क्षमता कम पड़ रही है?

क्या नालों की नियमित निगरानी और गुणवत्ता जांच में कमी है?

इन सवालों के जवाब आरटीआई दस्तावेज में नहीं दिए गए हैं। दस्तावेज केवल बजट, खर्च और विभागीय जानकारी उपलब्ध कराते हैं।

जवाबदेही तय होगी?

हर साल मानसून के दौरान जलभराव को लेकर प्रशासनिक दावे किए जाते हैं। लेकिन अब, RTI कार्यकर्ता अभय कोलारकर द्वारा प्राप्त आधिकारिक दस्तावेजों ने एक बार फिर यह बहस छेड़ दी है कि जब सफाई पर करोड़ों रुपये खर्च हो रहे हैं, तब भी शहर के नागरिकों को जलभराव से राहत क्यों नहीं मिल रही।

अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या प्रशासन इन सवालों का जवाब देगा, या फिर इस बार भी बारिश को ही जलभराव की एकमात्र वजह बताया जाएगा।

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