नागपुर: राज्य सरकार की ओर से सिकल सेल के मरीज के साथ को एक परिजन को मुफ्त एसटी बस सहूलियत देने के लिए राज्य सरकार से निधि उपलब्ध कराने की मांग सिकल सेल सोसाइटी ऑफ इंडिया की ओर से मांग की गई थी.

नागपुर शहर में सिकलसेल रोग से पीड़ित मरीजों की संख्या करीब 15 हजार है. विदर्भ में इनकी संख्या लगभग डेढ़ लाख है और पूरे महाराष्ट्र में ढाई लाख से ज्यादा है. बात अगर नागपुर शहर की करें तो जिले के कई गावों से इन मरीजों को दवाईयों के शहर के बड़े अस्पतालों में आना होता है. इनमें से सैकड़ों मरीज ऐसे होते हैं, जो काफी गरीब होते हैं. नागपुर तक आने जाने के लिए पैसे नहीं होने की वजह से कई मरीज दवा लेने नही आ पाते और बिना दवाई के ही उनकी तबियत बिगड़ जाती है .कई बार इलाज के अभाव में इन मरीजों की मौत भी हो जाती है.
10 मार्च 2015 को राज्य सरकार की ओर से 5 करोड़ रुपए की निधि मंजूर की गई थी. लेकिन स्वास्थ्य आयुक्त ने 72 दिनों के बाद, 21 जनवरी 2016 को 37 लाख रूपए की निधी एसटी परिवहन में जमा कराया था .लेकिन उसके बाद भी सिकलसेल पीड़ितों को एसटी की मुफ्त सेवा नहीं मिली. एसटी की सेवा नहीं मिलने की वजह से स्वास्थ्य आयुक्त और राज्य के मुख्य सचिव ने भी परिवहन विभाग से पूछने की जहमत नहीं उठाई और ना ही सरकार ने इस बारे में परिवहन विभाग से अब तक जवाब ही तलब किया.
दूसरी बार स्वास्थ्य सेवा आयुक्त ने 29 मार्च 2016 को राज्य से निधि की मांग की और केवल तीन दिनों में अर्थात 31 मार्च 2016 को 1.42 करोड़ रुपए दिए गए.लेकिन अब तक आयुक्त द्वारा यह रकम भी परिवहन मंडल में जमा नहीं की गई. तीसरी बार भी मार्च 2016 में ही 20 लाख रूपए दिए गए, लेकिन यह रकम भी अब तक परिवहन विभाग में जमा नहीं कराई गई है.
चौथी बार भी सरकार द्वारा 2.99 करोड़ रुपए दिए गए, लेकिन यह निधि भी अब तक जमा नहीं की गई है. इस निधि का सही उपयोग और इसको जमा करने का कार्य सरकार ने मुम्बई के स्वास्थ्य सेवा संचालनालय के प्रशासकीय अधिकारी और पुणे के स्वास्थ्य सेवा के सहायक संचालक को नियंत्रण अधिकारी के रूप में जिम्मेदारी सौंपी थी. लेकिन दोनों ही अधिकारियों ने अब तक यह निधि परिवहन विभाग में जमा कराने की जहमत नहीं उठाई है.
यह निधि अगर समय रहते परिवहन विभाग में जमा कराई गई होती तो सिकलसेल से पीड़ित मरीजों को मुफ्त में एसटी का पास मिल सकता था. लेकिन सरकार ने निधि तो मंजूर कर दिया लेकिन यह जानने की कोशिश नहीं की आखिर यह निधि का सही उपयोग हो रहा है या नहीं.
इस बारे में सिकलसेल सोसाइटी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष संपत रामटेके ने अपनी नाराजगी जताते हुए बताया कि अज्ञानी गरीब सिकलसेल पीड़ितों का लाभ सरकार और अधिकारी ले रहे हैं. सरकार ने अब तक कोई भी सराहनीय कदम सिकलसेल पीड़ितों के लिए नहीं उठाया है. उन्होंने बताया कि निधि परिवहन विभाग में जमा नहीं करने के कारण ही वे कोर्ट का दरवाजा भी खटखटाने वाले हैं.
—शमानंद तायडे
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