नागपुर: कथित करोड़ों रुपये के अवैध रेत खनन घोटाले से जुड़े मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने शुक्रवार को नागपुर जिले में बड़ी और समन्वित कार्रवाई करते हुए कई इलाकों में एक साथ छापेमारी की। इस कार्रवाई से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में खलबली मच गई।
ED की टीमों ने सावनेर, खापा, पतानसावंगी और आसपास के क्षेत्रों में कुल 56 ठिकानों पर एक साथ तलाशी ली। इन ठिकानों में अवैध रेत उत्खनन और उससे जुड़े कथित वित्तीय लेन-देन से जुड़े संदिग्धों के आवासीय और व्यावसायिक परिसर शामिल हैं।
एक टीवी न्यूज चैनल की रिपोर्ट के अनुसार, ED ने शिवसेना (UBT) के नागपुर जिला अध्यक्ष उत्तम कापसे के आवास और कार्यालय पर भी तलाशी ली है। हालांकि प्रवर्तन निदेशालय की ओर से किसी भी व्यक्ति के नाम को लेकर आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई थी।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला उस अवधि से जुड़ा है जब अमितेश कुमार नागपुर के तत्कालीन पुलिस आयुक्त थे और उन्होंने जिले में अवैध रेत खनन के खिलाफ सख्त अभियान शुरू किया था। बाद में इस मामले को धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के एंगल से जांच के लिए ED को सौंप दिया गया, जिसके बाद केंद्रीय एजेंसी ने जांच तेज कर दी।
जांच से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, ED बड़े पैमाने पर हुए वित्तीय लेन-देन, बेनामी संपत्तियों और अवैध रेत खनन से अर्जित कथित अपराध की आय की जांच कर रही है। तलाशी के दौरान दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और अन्य अहम साक्ष्य जब्त किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
उच्च पदस्थ सूत्रों ने यह भी दावा किया कि जिन कुछ लोगों के ठिकानों पर तलाशी ली गई है, उनके संबंध कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री सुनील केदार से बताए जा रहे हैं। हालांकि इस संबंध में भी ED की ओर से कोई औपचारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
एक साथ कई स्थानों पर की गई यह व्यापक कार्रवाई इस बात का संकेत है कि मामला अब निर्णायक चरण में पहुंच चुका है।
जैसे-जैसे छापेमारी की खबर फैली, नागपुर के राजनीतिक हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया। इस कार्रवाई को विदर्भ में रेत माफिया के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक माना जा रहा है। जांच में आगे और अहम खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।








