
नागपुर – नागपुर में घरों को निशाना बनाकर वारदात करने वाले आरोपी को पुलिस ने आखिरकार गिरफ्तार कर लिया है। गिट्टीखदान थाना क्षेत्र में राजा शरीफ के घर में घुसकर उनकी बुजुर्ग मां को घायल करने और लूटपाट करने के मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच तेज की और करीब 80 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। आरोपी ने चेहरे पर नकाब लगा रखा था, जिससे उसकी पहचान करना पुलिस के लिए चुनौती बन गया था। लेकिन पुलिस ने हार नहीं मानी और ‘गेट एनालिसिस’ यानी चाल-ढाल के विश्लेषण की मदद से संदिग्ध की पहचान कर उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपी की पहचान मानकापुर के किराड लेआउट निवासी क्लेमेंट उर्फ रोहित यूजीन पिल्ले (35) के रूप में हुई है। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी ने गड्डीगोदाम परिसर में एक अन्य वृद्ध महिला के घर में भी प्रवेश किया था। हालांकि, वहां महिला की चीख-पुकार सुनकर पकड़े जाने के डर से वह मौके से भाग निकला था। पुलिस अब दोनों घटनाओं के बीच संबंधों की जांच कर रही है।
बुजुर्ग महिला को घायल कर घर में की लूटपाट
मिली जानकारी के अनुसार, गिट्टीखदान थाना क्षेत्र में राजा शरीफ के घर में घुसे आरोपी ने उनकी बुजुर्ग मां को घायल कर दिया और लूटपाट की वारदात को अंजाम दिया। घर में घुसकर बुजुर्ग महिला को निशाना बनाए जाने से मामला गंभीर हो गया था। वारदात के बाद पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की।
घर में घुसकर की गई इस वारदात को देखते हुए पुलिस ने आसपास के इलाकों में संदिग्ध गतिविधियों की जानकारी जुटाई। घटनास्थल और आसपास के रास्तों पर लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग की जांच की गई। पुलिस के सामने सबसे बड़ी समस्या यह थी कि आरोपी ने अपना चेहरा ढंक रखा था। ऐसे में केवल चेहरे के आधार पर उसकी पहचान करना संभव नहीं हो पा रहा था।
इसके बाद जांच टीम ने पारंपरिक तरीकों के साथ तकनीकी विश्लेषण का सहारा लिया। अलग-अलग कैमरों में कैद संदिग्ध की गतिविधियों का बारीकी से अध्ययन किया गया। इसी दौरान पुलिस को आरोपी की पहचान तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सुराग मिला।
80 सीसीटीवी फुटेज की जांच, नकाब के बावजूद नहीं बच सका आरोपी
इस मामले की जांच में पुलिस ने अलग-अलग स्थानों पर लगे करीब 80 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। संदिग्ध किस दिशा से आया, किस रास्ते से गुजरा और वारदात के बाद किस ओर गया, इन तमाम पहलुओं की जांच की गई।
चेहरे पर नकाब होने के कारण संदिग्ध का चेहरा स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था। इसके बावजूद पुलिस ने फुटेज में दिखाई देने वाली उसकी शारीरिक गतिविधियों और चलने के तरीके का विश्लेषण किया। अलग-अलग कैमरों में दर्ज तस्वीरों और वीडियो की तुलना कर संदिग्ध की पहचान करने का प्रयास किया गया।
लगातार जांच के बाद पुलिस को क्लेमेंट उर्फ रोहित यूजीन पिल्ले तक पहुंचने में सफलता मिली। इसके बाद पुलिस ने उसकी गतिविधियों और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।
पुलिस की इस कार्रवाई में तकनीकी जांच ने अहम भूमिका निभाई। चेहरे पर नकाब लगाकर पहचान छिपाने की कोशिश करने के बावजूद आरोपी पुलिस की नजरों से बच नहीं सका।
क्या है ‘गेट एनालिसिस’, जिसने आरोपी तक पहुंचाया?
इस मामले में पुलिस ने ‘गेट एनालिसिस’ तकनीक का इस्तेमाल किया। इस तकनीक में किसी व्यक्ति के चलने के तरीके और उसकी शारीरिक गतिविधियों का विश्लेषण किया जाता है। व्यक्ति के कदमों की गति, चलने की शैली, पैरों की चाल और शरीर की गतिविधियों जैसे पहलुओं का अध्ययन कर उपलब्ध वीडियो फुटेज की तुलना की जा सकती है।
जब किसी संदिग्ध का चेहरा सीसीटीवी कैमरे में स्पष्ट नहीं दिखाई देता, तब इस तरह का विश्लेषण जांच में सहायक हो सकता है। हालांकि, केवल चाल-ढाल के आधार पर किसी व्यक्ति को दोषी नहीं माना जा सकता। इसकी पुष्टि अन्य तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से करना आवश्यक होता है।
गिट्टीखदान क्षेत्र की वारदात में भी चेहरे पर नकाब होने के बावजूद पुलिस ने फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया और संदिग्ध की पहचान करने में सफलता हासिल की।
गड्डीगोदाम में भी वृद्ध महिला के घर में घुसा था
पुलिस जांच के दौरान एक अन्य घटना की जानकारी भी सामने आई। बताया गया कि इसी आरोपी ने गड्डीगोदाम परिसर में एक वृद्ध महिला के घर में प्रवेश किया था। हालांकि, वहां महिला की चीख-पुकार होने लगी, जिससे आरोपी को पकड़े जाने का डर सताने लगा। इसके बाद वह मौके से भाग निकला।
इस घटना के सामने आने के बाद पुलिस दोनों वारदातों के बीच संबंधों की जांच कर रही है। जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी है कि आरोपी ने किन परिस्थितियों में इन घरों को निशाना बनाया और क्या वह पहले भी इस तरह की वारदातों में शामिल रहा है।
पुलिस अब आरोपी से पूछताछ कर उसके संभावित आपराधिक रिकॉर्ड और अन्य मामलों में उसकी संलिप्तता की जानकारी जुटा सकती है। हालांकि, अन्य वारदातों में उसकी भूमिका की पुष्टि जांच और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही होगी।
क्राइम ब्रांच यूनिट-2 की टीम ने की कार्रवाई
इस मामले में क्राइम ब्रांच यूनिट-2 की इंस्पेक्टर शुभांगी देशमुख और उनकी टीम ने समानांतर जांच शुरू की थी। टीम ने तकनीकी साक्ष्यों, सीसीटीवी फुटेज और संदिग्ध की गतिविधियों का विश्लेषण करते हुए जांच को आगे बढ़ाया।
एसीपी जाधव ने बताया कि इंस्पेक्टर शुभांगी देशमुख और उनकी टीम ने कुशल तकनीकी जांच तथा पेशेवर तरीके से मामले का पर्दाफाश किया। पुलिस ने रविवार रात आरोपी को गिरफ्तार कर लिया।
इस कार्रवाई में क्राइम ब्रांच यूनिट-2 की इंस्पेक्टर शुभांगी देशमुख, एपीआई चेतन बोरखेड़े, पीएसआई मनोज राऊत, हेड कांस्टेबल नरेश तुमडाम, विजय यादव, प्रवीण शेलके, अर्जुन यादव, महेंद्र सड़माके, कमलेश गणेर, मंगल जाधव, संदीप पांडे, आशीष धंदरे, संजीव दहीफले और कमलेश गहलोद ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
तकनीकी जांच से अपराधियों तक पहुंचने में मिली मदद
नागपुर में हुई इस कार्रवाई ने एक बार फिर दिखाया कि अपराध की जांच में सीसीटीवी फुटेज और तकनीकी विश्लेषण कितने उपयोगी साबित हो सकते हैं। कई बार आरोपी अपनी पहचान छिपाने के लिए नकाब का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन अलग-अलग स्थानों पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग और संदिग्ध की गतिविधियों का विश्लेषण जांच को नई दिशा दे सकता है।
गिट्टीखदान क्षेत्र में बुजुर्ग महिला को घायल कर लूटपाट करने के मामले में पुलिस ने इसी तरह तकनीकी सुरागों को जोड़ते हुए आरोपी तक पहुंच बनाई। गड्डीगोदाम की घटना भी जांच के दायरे में है।
फिलहाल आरोपी की गिरफ्तारी के बाद पुलिस की जांच का अगला चरण दोनों घटनाओं के संबंध, संभावित अन्य वारदातों और उपलब्ध साक्ष्यों की पुष्टि करना है। बुजुर्ग महिलाओं को निशाना बनाए जाने से जुड़े इन मामलों में पुलिस की कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
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