
नागपुर – प्राणघातक नायलॉन मांजे की बिक्री, भंडारण और उपयोग पर रोक के बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने पर बंबई उच्च न्यायालय की नागपुर खंडपीठ ने सोमवार को पुलिस प्रशासन को कड़ी फटकार लगाई। न्यायालय ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि संबंधित पुलिस अधिकारी अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रहते हैं तो जुर्माने की राशि दोषी अधिकारियों के वेतन से वसूल करने पर भी विचार किया जा सकता है।
नायलॉन मांजे के कारण होने वाली दुर्घटनाओं और इससे आम नागरिकों तथा पक्षियों की जान को पैदा होने वाले खतरे को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने वर्ष 2021 में स्वयं जनहित याचिका दर्ज की थी। इस मामले की सुनवाई सोमवार को न्यायमूर्तिद्वय अनिल किलोर और रजनीश व्यास के समक्ष हुई।
पुलिस से पूछा- कितने मामले दर्ज किए, कार्रवाई कहां तक पहुंची?
सुनवाई के दौरान न्यायालय ने राज्य सरकार से जानना चाहा कि नायलॉन मांजे के उत्पादन, संग्रहण, बिक्री और उपयोग के संबंध में पिछले वर्ष कितने मामले दर्ज किए गए। साथ ही इन मामलों की जांच के दौरान पुलिस ने नायलॉन मांजे के मूल स्रोत तक पहुंचने का प्रयास किया या नहीं, यह भी पूछा गया।
हालांकि, इस संबंध में राज्य सरकार की ओर से न्यायालय को दिया गया जवाब संतोषजनक नहीं रहा। इससे नाराज हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए।
‘मांजे का स्रोत पता करना भी पुलिस को बताना पड़ेगा क्या?’
न्यायालय ने नाराजगी व्यक्त करते हुए कहा कि नायलॉन मांजे का स्रोत पता कर उसके उत्पादन और बिक्री से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई करना पुलिस की जिम्मेदारी है। इसके लिए न्यायालय को पुलिस को अलग से दिशा-निर्देश देने की आवश्यकता नहीं होनी चाहिए।
न्यायालय ने सवाल किया कि मामले की जांच किस तरह करनी है, क्या यह भी पुलिस को अदालत को बताना पड़ेगा? पांच वर्ष से मामला लंबित होने के बावजूद यदि नायलॉन मांजे की बिक्री और उपयोग जारी है तो यह पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
2023 में जारी हुई थी प्रतिबंध की अधिसूचना
नायलॉन मांजे की बिक्री और उपयोग पर रोक लगाने के लिए राज्य के पर्यावरण विभाग ने 1 मार्च 2023 को अधिसूचना जारी की थी। इसके बावजूद प्रतिबंध का प्रभावी तरीके से पालन नहीं होने की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं।
शहर में कई स्थानों पर नायलॉन मांजे की बिक्री और भंडारण होने तथा पतंग उड़ाने के लिए इसका इस्तेमाल किए जाने की स्थिति को देखते हुए न्यायालय ने पुलिस प्रशासन से सख्त कार्रवाई की अपेक्षा जताई।
अब सिर्फ कार्रवाई नहीं, परिणाम चाहिए
हाईकोर्ट ने पुलिस प्रशासन को केवल औपचारिक कार्रवाई करने के बजाय नायलॉन मांजे के पूरे नेटवर्क और स्रोत तक पहुंचकर कठोर कार्रवाई करने की इच्छाशक्ति दिखाने के निर्देश दिए।
न्यायालय ने आगामी 12 अक्टूबर को नायलॉन मांजे के खिलाफ की गई ठोस कार्रवाई की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत करने का निर्देश राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को दिया है।
इस मामले में एडवोकेट निश्चय जाधव ने न्यायालय मित्र (Amicus Curiae) के रूप में पैरवी की।



