
नागपुर, :नागपुर महानगरपालिका (मनपा) का शहर भर में 5 लाख पौधे लगाने का महत्वाकांक्षी अभियान बुरी तरह लड़खड़ा गया है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि 3.67 लाख पौधों के मैप किए गए लक्ष्य में से मनपा अब तक महज 97,181 पौधे ही लगा पाई है, जो कुल 5 लाख के लक्ष्य का 20 प्रतिशत से भी कम है।
इस कमी के पीछे क्षेत्र में उभरता जल संकट है, जिसने युवा पौधों को जिंदा रखने को लेकर प्रशासनिक चिंता बढ़ा दी है और अधिकारियों को आगे के पौधरोपण पर पुनर्विचार करने पर मजबूर कर दिया है।
गार्डन विभाग से प्राप्त आधिकारिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, स्थिति बेहद निराशाजनक है। सरकारी और निजी परिसरों में एक लाख पौधे लगाने के आवंटन के मुकाबले केवल 3,000 पौधे लगे हैं। इसी तरह, रिंग रोड के किनारे 20,000 पौधे और डिवाइडर पर चंपा के 10,000 पौधे लगाने का लक्ष्य शून्य प्रगति पर है, जबकि ब्लॉक प्लांटेशन में 50,000 के लक्ष्य के मुकाबले केवल 500 पौधे लगे हैं।
एकमात्र उल्लेखनीय प्रगति गोरेवाड़ा जैव विविधता पार्क में हुई है, जहां 40,000 नियोजित पौधों में से 28,325 पौधे लग चुके हैं।
‘सूखे में लाखों पेड़ लगाना बेकार’
मौसम की बाधा को रेखांकित करते हुए गार्डन विभाग के एक अधिकारी ने कहा, “यह सूखे का साल है। अगर हम उन्हें पानी नहीं दे सकते तो लाखों पेड़ लगाना व्यर्थ है। शहर की जल आपूर्ति पर एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय हमारे अगले कदम तय करेगा। पानी की गारंटी के बिना आक्रामक पौधरोपण का कोई व्यावहारिक मतलब नहीं है।”
पौधों को बिना पीने योग्य पानी के भंडार को खाली किए मुरझाने से बचाने के लिए, मनपा उपचारित अपशिष्ट जल के विकल्प तलाश रही है।
मनपा के गार्डन विभाग के उपायुक्त गणेश राठौड़ ने कहा, “लगाए गए पौधों को बचाए रखना ही असली परीक्षा है। आयुक्त डॉ. विपिन इटनकर ने पब्लिक हेल्थ इंजीनियरिंग विंग को निर्देश दिया है कि सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से उपचारित पानी की आपूर्ति को हाइड्रेंट और टैंकरों के जरिए रोडसाइड डिवाइडर और बगीचों के लिए माइक्रो-प्लान किया जाए। हाईवे स्ट्रेच के लिए सीएसआर फंड मिलने में देरी हुई है, लेकिन यह अभियान साल भर चलने वाला है और फील्ड अधिकारी विकास पर नजर रख रहे हैं।”



