नागपुर: नागपुर महानगरपालिका चुनाव के लिए मतदान में अब कुछ ही दिन शेष हैं। चुनाव प्रचार अपने अंतिम चरण में पहुंच चुका है और शहर की सियासत में प्रमुख दलों की स्थिति धीरे-धीरे स्पष्ट होती जा रही है। हालिया राजनीतिक गतिविधियों और मीडिया रिपोर्ट्स के आधार पर देखा जाए तो भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) फिलहाल बढ़त में नजर आ रही है, जबकि विपक्षी दल अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में जुटे हुए हैं।
बीजेपी को इस चुनाव में संगठनात्मक मजबूती का लाभ मिलता दिखाई दे रहा है। वार्ड स्तर पर कार्यकर्ताओं की सक्रियता, बूथ प्रबंधन और संसाधनों की उपलब्धता ने पार्टी को अन्य दलों की तुलना में मजबूत स्थिति में खड़ा किया है। हालांकि टिकट वितरण के बाद कुछ क्षेत्रों में अंदरूनी नाराज़गी की खबरें भी सामने आई हैं, लेकिन इसका प्रभाव सीमित वार्डों तक ही सिमटा हुआ माना जा रहा है।
कांग्रेस इस बार पिछले चुनावों की तुलना में अधिक सक्रिय दिखाई दे रही है। पार्टी ने बड़ी संख्या में उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं और कुछ शहरी इलाकों में स्थानीय मुद्दों को लेकर उसे समर्थन भी मिल रहा है। इसके बावजूद राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कांग्रेस के पास फिलहाल ऐसा कोई शहर-व्यापी मुद्दा या माहौल नहीं है जो सत्ता परिवर्तन की स्थिति बना सके। कांग्रेस की कोशिश मुख्य रूप से अपनी सीटों की संख्या बढ़ाने और विपक्ष में मजबूत भूमिका निभाने तक सीमित नजर आ रही है।
शिवसेना के विभिन्न गुटों के लिए यह चुनाव चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। पार्टी की आंतरिक टूट और स्पष्ट पहचान के अभाव का असर जमीनी स्तर पर दिखाई दे रहा है। नागपुर जैसे शहर में, जहां संगठनात्मक मजबूती अहम भूमिका निभाती है, शिवसेना गुटों की स्थिति कमजोर मानी जा रही है।
बीएसपी और अन्य छोटे दल इस चुनाव में निर्णायक भूमिका में नहीं हैं, लेकिन वे कुछ वार्डों में प्रमुख दलों के वोट शेयर को प्रभावित कर सकते हैं। खासकर आरक्षित और समुदाय-आधारित क्षेत्रों में इन दलों की मौजूदगी मुकाबले को रोचक बना सकती है।
इसके अलावा, कुछ निर्दलीय उम्मीदवार भी चुनावी मैदान में चर्चा में हैं। ये उम्मीदवार किसी पार्टी के बजाय स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत प्रभाव के आधार पर चुनाव लड़ रहे हैं। हालांकि इनकी संख्या सीमित है, लेकिन कुछ वार्डों में ये बड़े दलों के लिए चुनौती बन सकते हैं।
कुल मिलाकर, मतदान से पहले के संकेत बताते हैं कि बीजेपी इस चुनाव में आगे चल रही है, लेकिन पूरी तरह निश्चिंत नहीं है। वहीं कांग्रेस और अन्य दल सीटों में सुधार की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन सत्ता की दौड़ में उनकी स्थिति कमजोर मानी जा रही है।
अंतिम फैसला मतदाता और मतगणना के बाद ही सामने आएगा, लेकिन फिलहाल नागपुर की राजनीति में सत्ताधारी दल का पलड़ा भारी दिख रहा है।








