
नागपुर। शहर की सड़कों पर नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने की बढ़ती प्रवृत्ति पर लगाम कसने के लिए नागपुर शहर यातायात पुलिस ने अभिभावकों और वाहन मालिकों के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने के लिए देना अब अभिभावकों को भारी पड़ सकता है। यातायात विभाग की ओर से वर्ष 2026 में दर्ज किए गए मामलों में से 26 मामलों में न्यायालय ने संबंधित आरोपियों को दोषी ठहराया है। दोषसिद्धि के इन मामलों में प्रत्येक आरोपी पर 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया है। इसके साथ ही संबंधित वाहन चालक के ड्राइविंग लाइसेंस पर 12 महीने के लिए रद्दीकरण अथवा अपात्रता की कार्रवाई भी की गई है।
शहर में सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और नाबालिगों के हाथों में वाहनों की चाबी पहुंचने से रोकने के उद्देश्य से यातायात पुलिस द्वारा लगातार अभियान चलाया जा रहा है। पुलिस का मुख्य जोर केवल नाबालिग वाहन चालकों पर कार्रवाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन अभिभावकों और वाहन मालिकों को भी कानून के दायरे में लाना है, जो अपने नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति देते हैं।
26 मामलों में अदालत ने माना दोषी
यातायात विभाग द्वारा वर्ष 2026 में नाबालिगों को वाहन चलाने देने के संबंध में कई मामले दर्ज किए गए। इनमें से 26 मामलों में न्यायालयीन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आरोपियों को दोषी ठहराया गया। अदालत ने संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत आर्थिक दंड के साथ ड्राइविंग लाइसेंस के संबंध में भी कार्रवाई के आदेश दिए।
इन मामलों में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199ए के तहत 25 हजार रुपए का दंड लगाया गया। इसके अलावा धारा 199(4) के तहत 12 महीने के लिए ड्राइविंग लाइसेंस रद्द अथवा वाहन चलाने से अपात्र किए जाने की कार्रवाई की गई। इस तरह प्रत्येक दोषसिद्ध मामले में कुल 30 हजार रुपए का आर्थिक दंड लगाया गया।
बच्चे के हाथ में चाबी देना पड़ सकता है महंगा
अक्सर अभिभावक कम दूरी तय करने, बाजार जाने या अन्य छोटे-मोटे काम के लिए अपने नाबालिग बच्चों को दोपहिया या अन्य वाहन चलाने की अनुमति दे देते हैं। कई बार बच्चों की जिद पूरी करने या उन्हें वाहन चलाना सिखाने के नाम पर भी वाहन सौंप दिया जाता है। लेकिन यातायात पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस तरह की लापरवाही न केवल बच्चे की जान को खतरे में डालती है, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा बन सकती है।
नाबालिगों के पास वैध ड्राइविंग लाइसेंस नहीं होता। इसके अलावा कम उम्र में वाहन चलाने के लिए आवश्यक शारीरिक और मानसिक परिपक्वता भी पूरी तरह विकसित नहीं होती। ऐसे में अचानक सामने आने वाली यातायात स्थिति, तेज रफ्तार, ब्रेकिंग, मोड़ या अन्य वाहनों के बीच सुरक्षित निर्णय लेने में चूक होने की आशंका अधिक रहती है। यही कारण है कि नाबालिगों को वाहन देने के मामले में अभिभावकों की जिम्मेदारी तय की जा रही है।
अभिभावकों की लापरवाही पर भी पुलिस की नजर
यातायात पुलिस का कहना है कि नाबालिग के वाहन चलाने की स्थिति में केवल बच्चे को जिम्मेदार मानना पर्याप्त नहीं है। जिस अभिभावक अथवा वाहन मालिक ने उसे वाहन उपलब्ध कराया, उसकी भूमिका भी महत्वपूर्ण है। इसलिए ऐसे मामलों में वाहन उपलब्ध कराने वाले व्यक्ति के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस की इस कार्रवाई का उद्देश्य अभिभावकों को दंडित करना भर नहीं है, बल्कि उन्हें यह संदेश देना है कि नाबालिग बच्चे के हाथ में वाहन की चाबी सौंपना गंभीर लापरवाही है। एक छोटी-सी लापरवाही सड़क हादसे का कारण बन सकती है और इसके परिणामस्वरूप बच्चे के साथ-साथ दूसरे निर्दोष नागरिकों की जान भी खतरे में पड़ सकती है।
सड़क सुरक्षा को लेकर लगातार कार्रवाई
नागपुर शहर में सड़क दुर्घटनाओं को नियंत्रित करने के लिए यातायात विभाग द्वारा विभिन्न स्तरों पर कार्रवाई की जा रही है। नाबालिग वाहन चालकों पर विशेष नजर रखी जा रही है। स्कूल-कॉलेज जाने वाले मार्गों, प्रमुख चौराहों और व्यस्त सड़कों पर यातायात पुलिस की मौजूदगी के साथ नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
यातायात विभाग का मानना है कि नाबालिगों द्वारा वाहन चलाने पर रोक लगाने के लिए केवल पुलिस की कार्रवाई पर्याप्त नहीं है। इसमें अभिभावकों, स्कूल प्रशासन और समाज की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। यदि अभिभावक स्वयं अपने बच्चों को वाहन चलाने से रोकें तो दुर्घटनाओं के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
आगे भी जारी रहेगी सख्ती
नागपुर शहर यातायात विभाग ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों को वाहन चलाने के लिए देने वाले अभिभावकों और वाहन मालिकों के खिलाफ भविष्य में भी कठोर कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने नाबालिग बच्चों को मोटरसाइकिल, स्कूटर अथवा अन्य मोटर वाहन चलाने की अनुमति न दें।
यातायात विभाग ने अभिभावकों से विशेष रूप से अपील करते हुए कहा है कि बच्चों की सुरक्षा को प्राथमिकता दें और उन्हें वाहन की चाबी सौंपने से बचें। नियमों का पालन करने से न केवल बच्चों का जीवन सुरक्षित रहेगा, बल्कि सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
यातायात पुलिस का संदेश स्पष्ट है—नाबालिग को वाहन देने से पहले अभिभावक कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सड़क दुर्घटना के गंभीर परिणामों को भी ध्यान में रखें।




