नागपुर: भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के बीच लागू हुए कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (CETA) के तहत अब नागपुर के आईसीडी (इनलैंड कंटेनर डिपो) मिहान से भी यूके के लिए निर्यात शुरू होगा। नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स (NVCC) ने इसे विदर्भ के व्यापार और निर्यात क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि बताया है।
चेंबर के अनुसार, 15 जुलाई 2026 से लागू हुए CETA समझौते के तहत भारतीय निर्यातकों को यूके में लगभग 99 प्रतिशत तक टैरिफ (कर) छूट का लाभ मिलेगा। इससे भारतीय उत्पाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे और विदर्भ के निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
इस संबंध में नाग विदर्भ चेंबर ऑफ कॉमर्स के प्रतिनिधिमंडल ने सहायक आयुक्त (कस्टम) संजय नंदेश्वर, सुपरिंटेंडेंट अजय शिलेदार, कॉनकॉर के चीफ मैनेजर अविनाश पाल से आईसीडी में मुलाकात की तथा जॉइंट डीजीएफटी एवं डेवलपमेंट कमिश्नर, मिहान एसईजेड डॉ. प्रवीण कुमार को पत्र भेजकर विदर्भ से यूके निर्यात शुरू कराने में सहयोग के लिए अभिनंदन किया।
प्रतिनिधिमंडल में चेंबर के पूर्व अध्यक्ष अश्विन प्रकाश मेहाड़िया, उपाध्यक्ष स्वप्निल अहिरकर, उमेश पटेल, सचिव सीए हेमंत सारडा, निर्यात-आयात समिति के सदस्य अधिवक्ता निखिल अग्रवाल तथा सुधीर अग्रवाल (रिलायबल लॉजिस्टिक्स) उपस्थित थे।
पूर्व अध्यक्ष अश्विन प्रकाश मेहाड़िया ने कहा कि नागपुर से यूके निर्यात शुरू होने से विदर्भ के व्यापारियों के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार के नए द्वार खुलेंगे और क्षेत्र के आर्थिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि CETA के कारण भारतीय उत्पाद कीमत के लिहाज से अधिक प्रतिस्पर्धी और आकर्षक बनेंगे।
उपाध्यक्ष स्वप्निल अहिरकर ने बताया कि विदर्भ से पहले ही चावल, फार्मा, टेक्सटाइल, मिनरल्स सहित कई उत्पादों का निर्यात होता है। साथ ही क्षेत्र अब सर्विस एक्सपोर्ट का भी महत्वपूर्ण केंद्र बन रहा है। ऐसे में CETA के तहत यूके निर्यात शुरू होने से स्थानीय उद्योगों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिलेगा।
चेंबर के सचिव सीए हेमंत सारडा ने कहा कि यदि सरकार निर्यात से जुड़ा बुनियादी ढांचा और मजबूत करती है, तो विदर्भ से वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात तेजी से बढ़ेगा और क्षेत्र की वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता और मजबूत होगी।





