Published On : Tue, Dec 5th, 2017

मनपा को कम ‘जीएसटी’ से नेतृत्वकर्ता कटघरे में

GST Bill
नागपुर: सीपी एंड बेरार की तत्कालीन राजधानी जब से महाराष्ट्र में समाहित की गई है, तब से नागपुर समेत विदर्भ के साथ पश्चिम महाराष्ट्र-मुंबई ने छल का सिलसिला जारी रखा. अब विदर्भ में निर्मित बिजली से रोशन हो रहे सम्पूर्ण महाराष्ट्र एवमं विदर्भ की हरियाली से राज्य का अस्तित्व होने के बावजूद चुंगी-एलबीटी की बंदी के बाद अनुदान के रूप में दिए जाने वाले ‘जीएसटी’ देन के मामले में विदर्भ के जिलों के साथ नाइंसाफी का क्रम जारी है. इसके जिम्मेदार पहले भी नेतृत्व क्षमता रही आज भी जिम्मेदार नागपुर के साथ विदर्भ के नेतृत्वकर्ताओं पर ही है.

बीमारी झेल राज्य को रोशनी पहुंचा रही विदर्भ
कोयला खदान और कोयले से बिजली निर्माण विदर्भ में ही होता है. कोयला उत्खनन व बिजली उत्पादन से अनगिनत विदर्भवासी ‘लंग्स’ के रोगों से ग्रषित हैं. उत्खनन-उत्पादन के दौरान प्रदूषण की मार वर्षों से विदर्भ की जनता सहन कर रही हैं. कोयला-बिजली आधारित उद्योग विदर्भ के बाहर, बिजली उत्पादन करने के बाद भी विदर्भ को महंगी बिजली दी जाने से विदर्भ के युवा वर्ग रोजी-रोटी के लिए वर्षों से प्रत्येक माह विदर्भ के बाहर जा रहे रहे हैं. उक्त मामलों के मुख्य जिम्मेदार विदर्भ के नेतृत्वकर्ता सफेदपोशों की क्षमता में कमी को ठहराया जाए तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी.

बीमारियों से निजात के लिए सेस दें अन्यथा ‘जीएसटी’ बढ़ाएं
विदर्भ के नेताओं की दूरदृष्टि की कमी की वजह से विदर्भ के साथ अन्याय का सिलसिला लगातार जारी है. नागपुर में हर वर्ष राज्य विधि मंडल का शीतकालीन अधिवेशन होता है जिसमें विदर्भ को सिवाय आश्वासनों के कुछ नहीं मिलता. मोदी फाउंडेशन के राज्य सरकार सहित विदर्भ के जनप्रतिनिधियों से मांग की हैं कि विदर्भ के कोयला उत्खनन व बिजली उत्पादन से ‘लंग्स’ संबंधी बीमारियों के निवारण के लिए विदर्भ के मनपा और ज़िलापरिषदों को सेस के रूप में अनुदान दिया जाए या फिर ‘जीएसटी’ में बढ़ोतरी की जाए. इस ओर ध्यान देने के बजाय पश्चिम महाराष्ट्र, मराठवाड़ा व मुंबई के जनप्रतिनिधियों के दबाव में नागपुर से छोटी नासिक मनपा को ज्यादा ‘जीएसटी’ देना सीधे तौर पर अन्याय है.

जिस क्षेत्र को नेतृत्व मिला वहां संपन्नता बढ़ी
राज्य का कप्तान या प्रमुख विभागों का मंत्री जिस भी शहर या जिले से अब तक हुआ, वह शहर व जिला अगले पांच वर्षों में संपन्नता की सारी ऊंचाइयां को छू लेता है. वहीं विदर्भ के जनप्रतिनिधियों खासकर नागपुर-चंद्रपुर जिले के मुख्यमंत्री, वित्तमंत्री, ऊर्जा- राजस्व मंत्री, केंद्रीय भूतल परिवहन मंत्री एवं प्रमुख विभाग के केंद्रीय राज्यमंत्री होने के बावजूद विदर्भ को ‘जीएसटी’ से लेकर प्रत्येक मामले में कम आंका जाना सिर्फ और सिर्फ विदर्भ के नेतृत्वकर्ताओं की क्षमता पर सवाल खड़े करता है.


‘जीएसटी’ बढ़ेगा, तो नागपुर मनपा में आएगी बहार
नागपुर मनपा की आय के साथ अनुदान कम होने से यह आर्थिक संकट से जूझ रही है. मनपा के जारी व प्रस्तावित प्रकल्प अटक गए हैं. कर्मचारी व पेंशन धारकों को बकाया व मासिक वेतन-पेंशन समय पर नहीं मिल पा रहा है. कर्मचारी पिछले २ सप्ताह से वेतन-बकाया के लिए रोजाना दोपहर को एकजुटता के साथ आंदोलन कर रहे हैं. विकास ठेकेदारों का भुगतान रोक दिया गया है. परिवहन विभाग अंतर्गत ठेकेदारों के ‘स्क्रो अकाउंट’ के लिए निधि का आभाव की वजह से खाता नहीं खुल पाया. हाल ही में सेवानिवृत्त हुए वित्त व लेखा विभाग प्रमुख के अनुसार ‘जीएसटी’ बढ़ेगी तो मनपा परिवहन विभाग से सम्बंधित कंट्राक्टरो का ‘स्क्रो’ अकाउंट खोलने में आसानी होगी.

पृथक विदर्भ पर भ्रमित सत्तापक्ष
वर्ष २०१९ में लोकसभा फिर ६ माह बाद विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इस चुनाव के पहले केंद्र व राज्य में सत्ताधारी अपने-अपने स्तर से चुनावी सर्वे करवाकर जन-भावना को समझने की कोशिश करेंगी. जब सम्पूर्ण महाराष्ट्र के लिए सत्तापक्ष को पुनः मौका देने सम्बंधित रिपोर्ट आएगी तो पृथक विदर्भ नहीं होगा और जब राज्य में स्थिति गड़बड़ दिखेगी तो विदर्भ को अलग कर विदर्भ में सत्ता हासिल करने के लिए अपनी ताक़त झोंक देंगे. फिर विदर्भ की बिजली और अन्य संपत्ति देने के एवज में शेष महाराष्ट्र से आय के स्त्रोत का मार्ग प्रशस्त करेगी.