
घायल छात्राओं की पहचान शिवाली तिवारी और पलक राजपूत के रूप में हुई है। दोनों छात्राएं सिम्बायोसिस लॉ कॉलेज में प्रथम वर्ष की छात्राएं हैं और अधिवक्ता साहिल भांगड़े के यहां इंटर्नशिप कर रही थीं। प्रशिक्षण के तहत वे अदालत की कार्यवाही का अवलोकन करने न्यायालय पहुंची थीं।
जानकारी के अनुसार, घटना उस समय हुई जब न्यायमूर्ति प्रवीण पाटिल की अदालत में सुनवाई चल रही थी। इसी दौरान अदालत कक्ष के प्रवेश द्वार के पास स्थित दीवार के ऊपरी हिस्से का कांक्रीट स्लैब लगभग 12 से 13 फीट की ऊंचाई से टूटकर नीचे गिर गया। गिरने से पहले वह लकड़ी के किनारे से टकराया, जिससे तेज धमाके जैसी आवाज हुई।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आवाज सुनते ही शिवाली तिवारी ने अपने सिर को बचाने के लिए तुरंत हाथ ऊपर कर लिया। इससे उनका सिर सुरक्षित रहा, लेकिन कांक्रीट का टुकड़ा उनके दाहिने हाथ पर लगा, जिससे उन्हें गंभीर चोट आई। वहीं पलक राजपूत के दाहिने घुटने में चोट लगी।
अचानक हुई इस घटना से अदालत कक्ष में मौजूद वकीलों, पक्षकारों और अन्य लोगों में दहशत फैल गई। कुछ क्षणों के लिए लोगों को किसी बड़ी दुर्घटना की आशंका हुई और कई लोग अपनी सीटों से उठ खड़े हुए।
घटना की सूचना मिलते ही न्यायालय प्रशासन सक्रिय हुआ और दोनों छात्राओं को तत्काल प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया। बाद में शिवाली तिवारी ने एक निजी अस्पताल में उपचार कराया, जहां चिकित्सकीय जांच और एक्स-रे रिपोर्ट में उनके हाथ के लिगामेंट में चोट की पुष्टि हुई।
हादसे को गंभीरता से लेते हुए न्यायालय प्रशासन ने संबंधित अदालत कक्ष में न्यायिक कार्यवाही अगले आदेश तक स्थगित कर दी है। इस घटना ने हाईकोर्ट भवन की संरचनात्मक सुरक्षा और रखरखाव व्यवस्था को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
गौरतलब है कि कांक्रीट का टुकड़ा सीधे किसी के सिर पर नहीं गिरा, अन्यथा यह घटना एक बड़े हादसे में बदल सकती थी। घटना के बाद न्यायालय परिसर के अन्य हिस्सों की भी तकनीकी जांच कराने की मांग उठने लगी है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।




