Published On : Thu, Sep 3rd, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

नागपुर HC ने प्रमोद मनमोडे की जस्टिस पंसारे से अलग होने की याचिका खारिज की, ₹5 लाख जुर्माना

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Pramod Manmode Recusal Plea Rejected by Nagpur HC; ₹5 Lakh Cost Imposed Over Justice Pansare Allegationsनागपुर: बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड के सचिव प्रमोद नत्थूजी मनमोडे की उस याचिका को खारिज कर दिया, जिसमें उन्होंने अवमानना कार्यवाही से जस्टिस अनिल एल. पंसारे को अलग करने की मांग की थी। यह कार्यवाही नागपुर के उमरेड रोड स्थित निर्मल नगरी में 24 मीटर चौड़ी डेवलपमेंट प्लान (DP) सड़क से जुड़े अदालत के निर्देशों के कथित अनुपालन न होने के मामले में चल रही है।

अदालत ने मनमोडे पर ₹5 लाख का खर्च भी लगाया और उन्हें यह राशि दो सप्ताह के भीतर नागपुर स्थित हाई कोर्ट लीगल सर्विसेज सब-कमेटी में जमा करने का निर्देश दिया।

जस्टिस अनिल एल. पंसारे और जस्टिस निवेदिता पी. मेहता की खंडपीठ कंटेम्प्ट पिटीशन नंबर 71 ऑफ 2026 पर सुनवाई कर रही थी। यह मामला DP सड़क और सड़क के लिए आरक्षित भूमि पर कथित रूप से खड़ी संरचनाओं से जुड़े लंबे समय से चले आ रहे विवाद से संबंधित है।

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प्रमोद मनमोडे ने जस्टिस पंसारे से अलग होने की मांग क्यों की?

मनमोडे ने आरोप लगाया कि जस्टिस पंसारे पहले निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी से जुड़े रहे हैं और उसके पैनल में वकील के रूप में भी शामिल थे। उन्होंने आगे दावा किया कि ऋण खातों और अन्य मामलों को लेकर उनके बीच विवाद हुए थे तथा आरोप लगाया कि न्यायाधीश सोसाइटी के प्रति पूर्वाग्रह रखते हैं।

खंडपीठ ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मनमोडे ऐसा कोई material पेश करने में विफल रहे, जिससे जस्टिस पंसारे और अदालत के समक्ष लंबित मौजूदा विवाद के बीच संबंध स्थापित हो सके।

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न्यायाधीशों ने यह भी सवाल उठाया कि जिस कथित विवाद को मनमोडे ने लगभग 2007-08 का बताया, उसे पहले अदालत के संज्ञान में क्यों नहीं लाया गया। अदालत ने कहा कि मनमोडे कई मौकों पर खंडपीठ के सामने पेश हुए, लेकिन उन्होंने शुरुआती अवसर पर यह मुद्दा नहीं उठाया।

खंडपीठ ने यह भी पाया कि मनमोडे कथित झगड़े के स्थान, समय या प्रकृति समेत उसके बारे में पर्याप्त विवरण नहीं दे सके।

अदालत ने कहा कि जस्टिस पंसारे के भाई से संबंधित एक अन्य आरोप भी दस्तावेजी साक्ष्य से समर्थित नहीं था।

खंडपीठ ने एक मौजूदा न्यायाधीश के खिलाफ लगाए गए आरोपों को गंभीरता से लिया और कहा कि यदि न्यायाधीश के खिलाफ बिना आधार लगाए गए आरोप न्याय प्रशासन में हस्तक्षेप के इरादे से लगाए गए हों, तो वे आपराधिक अवमानना की श्रेणी में आ सकते हैं।

इसके बाद अदालत ने जस्टिस पंसारे के खिलाफ लगाए गए आरोपों पर स्वतः संज्ञान लेते हुए आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू की है। हालांकि, इस मामले की सुनवाई ऐसी खंडपीठ करेगी जिसमें जस्टिस पंसारे शामिल नहीं होंगे।

निर्मल नगरी DP सड़क विवाद की शुरुआत कैसे हुई

इस विवाद का इतिहास काफी पुराना है।

नागपुर के उमरेड रोड स्थित मौजा हरपुर की संबंधित भूमि 24 मीटर चौड़ी स्वीकृत DP सड़क से प्रभावित थी। हाई कोर्ट के 2019 के एक पुराने फैसले में दर्ज है कि भूमि पर ऐसी शर्तें लागू थीं, जिनके तहत DP सड़क से प्रभावित हिस्सा नागपुर नगर निगम को सौंपा जाना था।

एक अलग कार्यवाही में निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव सोसाइटी ने DP सड़क से प्रभावित भूमि सौंपने और ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (TDR) तथा फ्लोर स्पेस इंडेक्स (FSI) पर नगर निगम के रुख को चुनौती दी थी। बॉम्बे हाई कोर्ट की नागपुर पीठ ने अप्रैल 2019 में इस याचिका को मंजूर किया था। यह मामला मौजा हरपुर के सर्वे नंबर 15, 16, 18 और 20 में 24 मीटर चौड़ी DP सड़क से प्रभावित भूमि से संबंधित था।

इसके बाद सड़क विवाद निर्मल नगरी की निवासी प्रणली रविंद्र पुट्टेवार द्वारा दायर रिट पिटीशन नंबर 4722 ऑफ 2019 में फिर सामने आया।

2025: हाई कोर्ट ने DP सड़क से संरचनाएं हटाने का आदेश दिया

29 अप्रैल 2025 को नागपुर पीठ ने पुट्टेवार मामले में फैसला सुनाया कि स्वीकृत विकास योजना में 24 मीटर चौड़ी सड़क के लिए आरक्षित भूमि को अन्य उपयोगों के लिए तब तक इस्तेमाल नहीं किया जा सकता, जब तक महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम के तहत विकास योजना में संशोधन न किया जाए या आरक्षण कानून के अनुसार समाप्त न हो जाए।

मामले में सड़क के आरक्षण वाले हिस्से पर स्थित सबस्टेशन, ट्रांसफॉर्मर और जल-शोधन से संबंधित बुनियादी ढांचे समेत अन्य संरचनाएं शामिल थीं। हाई कोर्ट ने बाद में इन्हें हटाने का निर्देश दिया और अनुपालन न होने के मामले में सोसाइटी पर ₹5 लाख का जुर्माना लगाया। उस समय की रिपोर्टों में यह भी कहा गया था कि सोसाइटी ने पहले अतिक्रमण हटाने का undertak​​ing दिया था।

2025 के फैसले में निर्मल उज्ज्वल क्रेडिट को-ऑपरेटिव लिमिटेड को प्रतिवादी नंबर 5 बताया गया है और उसके सचिव प्रमोद पुत्र नत्थूजी मनमोडे के माध्यम से उसका प्रतिनिधित्व दर्ज है।

2026: मनमोडे के खिलाफ अवमानना कार्यवाही

पहले के निर्देशों का पूरी तरह अनुपालन न होने के कारण कंटेम्प्ट पिटीशन नंबर 71 ऑफ 2026 दायर की गई। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, अवमानना कार्यवाही फरवरी 2026 में शुरू हुई और जस्टिस पंसारे तथा जस्टिस निवेदिता मेहता की खंडपीठ के समक्ष बार-बार आई।

कार्यवाही के दौरान अदालत ने DP सड़क पर संरचनाओं के बने रहने के संबंध में दिए गए स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए और पहले के आदेश के अनुपालन से जुड़ी सामग्री मांगी।

इसके बाद मनमोडे ने सोसाइटी से जस्टिस पंसारे के कथित पूर्व संबंध और वर्षों पुराने कथित विवाद का हवाला देते हुए उनके अलग होने की मांग की। अदालत ने यह याचिका खारिज कर दी और ₹5 लाख का खर्च लगाया।

हालांकि, अदालत ने यह सुनिश्चित किया है कि जस्टिस पंसारे के खिलाफ लगाए गए आरोपों से जुड़ी अलग आपराधिक अवमानना कार्यवाही की सुनवाई दूसरी खंडपीठ करेगी। इस तरह इस मुद्दे को DP सड़क से संबंधित अवमानना कार्यवाही से अलग रखा गया है।

अब आगे क्या होगा?

मनमोडे को ₹5 लाख का खर्च दो सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया है। मुख्य अवमानना याचिका पर अंतिम सुनवाई 22 सितंबर 2026 को निर्धारित है।

इस मामले में अब दो जुड़े हुए, लेकिन अलग कानूनी मुद्दे हैं—निर्मल नगरी में 24 मीटर चौड़ी DP सड़क से संबंधित हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन का मूल विवाद और जस्टिस पंसारे के खिलाफ लगाए गए आरोपों से उत्पन्न अलग अवमानना मामला।

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