Published On : Wed, Nov 15th, 2017

ग्रीन बस: मासिक खर्च रु. २० व कमाई ५ लाख

Green Bus in Nagpur
नागपुर: भाजपा के भारी-भरक्कम मंत्री की तीव्र इच्छा पर नागपुर शहर में इथेनॉयल से चलने वाली ५ ग्रीन बसें शुरू की गई थी. इससे मनपा को मासिक १५ लाख रुपए से अधिक का नुकसान हो रहा है. यह नुकसान और बढ़ेगा क्योंकि बेड़े में जल्द ही, संभवतः शीतकालीन अधिवेशन के दौरान, १४ अतिरिक्त ग्रीन बसों को शामिल किया जाएगा.

सूत्रों द्वारा प्राप्त जानकारी के अनुसार उक्त मंत्री की पहल पर देश में स्वीडन की स्केनिया कंपनी, जो ग्रीन बस की निर्माता है, उन्होंने व्यापार करने की इच्छा दर्शाई है। स्केनिया की ग्रीन बस इथेनॉयल से चलती है. देश में इथेनॉयल के व्यवसाय को गडकरी के प्रयासों से तवज्जों मिली। आज स्केनिया को ईंधन गडकरी से जुड़ी कंपनी पूर्ति इथेनॉयल का निर्माण कर पूर्ति कर रही है.


स्केनिया से नागपुर मनपा को ५५ बसें देने का करार हुआ. करार पूर्व स्केनिया ने बैंगलोर के हुबली में ‘एसेम्बलिंग’ यूनिट की स्थापना की.नागपुर शहर में मनपा को पायलट प्रोजेक्ट के तहत स्केनिया की एक बस मार्च २०१५ से शुरू की गई जो १८ फरवरी २०१७ तक चली. १८ फरवरी २०१७ को मनपा को कुल ५ बसें मिल गईं. जिसे मनपा परिवहन विभाग ‘ट्रायल रन’ के तहत मांग के अनुरूप ७ रूटों पर चला रही है. इन पांच बसों के संचलन से मनपा को मासिक २०.५ लाख रुपए खर्च हो रहा है तो आय के नाम पर ‘टिकट कलेक्शन’ से ४.८४ लाख ही जमा हो रही है.

मनपा और स्केनिया के बीच १८ अगस्त २०१७ को करार हुआ,करार के हिसाब से उसे ६ माह के भीतर कुछ ५५ बसों को मनपा परिवहन विभाग को सौंपना है. इन बसों के चालकों को प्रशिक्षित करना और चालकों का वेतन भी स्केनिया को देना है. बसों के कन्डक्टरों की नियुक्ति व वेतन मनपा व मनपा की ओर से जिम्मेदारी संभाल रही कंपनी का जिम्मा तय है. मनपा सिर्फ बसों के लिए स्थानक की जगह और चल रही बसों को प्रति किलोमीटर ८५ रुपए देना तय हुआ है. उक्त बसों के लिए ईंधन भरने का केंद्र खापरी व वाड़ी में प्रस्तावित है.


उल्लेखनीय यह है कि वर्तमान में ५ ग्रीन बसें शहर में ७ मार्गों पर दौड़ रही थी. ५ अन्य बसों का भी आरटीओ से पंजीयन होने के बाद उक्त सात मार्गों पर मांग के अनुरूप दौड़ाई जाएगी। बंगलौर से अन्य ९ बसों का आगमन हो चुका है, जिसका पंजीयन का काम जारी है. ५ ग्रीन बसों से मनपा को १५ लाख रुपए मासिक खर्च आ रही है. शीतकालीन अधिवेशन के आस पास संभवतः सभी १९-२० बसें शहर के विभिन्न मार्गों पर दौड़ती नज़र आ जाएंगी, तब उक्त नुकसान ४ गुणा हो सकता है. इतना नुकसान वहन करने की हिमाकत दिखाने वाली मनपा को आर्थिक तंगी का हवाला देकर बदनाम करना उचित नहीं.