सुधाकर कोहले के प्रचार के लिए निजी शिक्षण संस्थानों पर कार्रवाई का भय दिखाने का दावा; कांग्रेस ने अभिजीत वंजारी पर फिर जताया भरोसा
नागपुर: नागपुर विभागीय स्नातक मतदारसंघ के चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं। इस बीच, भाजपा उम्मीदवार सुधाकर कोहले के प्रचार के लिए निजी और अनुदानित शिक्षण संस्थानों पर कथित दबाव बनाए जाने के आरोपों से शिक्षा क्षेत्र में नाराजगी की चर्चा है।
सूत्रों के अनुसार, कुछ शिक्षण संस्थानों के संचालकों पर शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को चुनाव प्रचार से जुड़ी बैठकों में उपस्थित कराने का दबाव बनाया जा रहा है। आरोप है कि कर्मचारियों को नहीं बुलाने पर संस्थानों के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई होने का भय दिखाया जा रहा है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।
भाजपा के वरिष्ठ नेता के माध्यम से दबाव का आरोप
सूत्रों का दावा है कि भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के माध्यम से शैक्षणिक संस्थानों के प्रबंधन पर दबाव बनाया जा रहा है। कथित तौर पर संस्थान संचालकों से कहा जा रहा है कि वे सुधाकर कोहले के प्रचार के लिए शिक्षकों और शिक्षकेत्तर कर्मचारियों को बैठकों में लेकर आएं, अन्यथा उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।
बताया जा रहा है कि इस स्थिति के कारण कुछ संस्थान संचालकों में असमंजस और नाराजगी है। विशेष रूप से सार्वजनिक छुट्टियों के दिन बैठकें आयोजित किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रविवार और सोमवार को बैठकों की चर्चा
सूत्रों के मुताबिक, रविवार को खामला क्षेत्र स्थित अर्जुना सभागृह में एक बड़े शैक्षणिक संस्थान की बैठक आयोजित की गई। वहीं, सोमवार दोपहर वर्धा रोड स्थित एक प्रतिष्ठित सीबीएसई विद्यालय में भी इसी तरह की बैठक होने की जानकारी सामने आई।
आरोप है कि कुछ संस्थान संचालक संभावित प्रशासनिक कार्रवाई के डर से इन बैठकों में शामिल होने या कर्मचारियों को भेजने के लिए मजबूर महसूस कर रहे हैं। हालांकि, इन बैठकों के उद्देश्य और उनमें उपस्थिति को लेकर संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष उपलब्ध नहीं है।
भाजपा में टिकट को लेकर पहले भी उभरी थी नाराजगी
भाजपा ने इस चुनाव में सुधाकर कोहले को उम्मीदवार बनाया है। महाराष्ट्र के राजस्व मंत्री एवं नागपुर जिले के पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले को चुनाव की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कोहले की उम्मीदवारी को लेकर पूर्व विधायक अनिल सोले की नाराजगी की खबरें भी सामने आई थीं। बताया गया था कि इस असंतोष को दूर करने के प्रयासों के तहत मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने सोले के निवास पर मुलाकात की थी।
पार्टी की ओर से एकजुटता का संदेश देने के बावजूद, चुनाव के दौरान भाजपा के भीतर असंतोष को लेकर चर्चाएं जारी हैं।
प्रतिष्ठा की लड़ाई बना चुनाव
नागपुर स्नातक मतदारसंघ का चुनाव भाजपा के लिए प्रतिष्ठा का सवाल बनता दिखाई दे रहा है। पार्टी इस सीट पर अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरी ताकत लगा रही है।
ऐसे में शिक्षण संस्थानों पर कथित दबाव के आरोपों ने चुनावी माहौल को और गरमा दिया है। यदि राजनीतिक प्रचार के लिए प्रशासनिक कार्रवाई का भय दिखाकर कर्मचारियों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह संस्थानों की स्वायत्तता और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन सकता है।
कांग्रेस ने फिर अभिजीत वंजारी को बनाया उम्मीदवार
दूसरी ओर, कांग्रेस ने पिछले चुनाव में उल्लेखनीय जीत दर्ज करने वाले अभिजीत वंजारी को एक बार फिर उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस भी इस चुनाव में अपनी पूरी ताकत झोंकने की तैयारी में है।
भाजपा और कांग्रेस के बीच बढ़ती राजनीतिक प्रतिस्पर्धा को देखते हुए नागपुर विभागीय स्नातक मतदारसंघ का चुनाव बेहद दिलचस्प होने की संभावना है। अब देखना होगा कि भाजपा अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत कर पाती है या कांग्रेस अभिजीत वंजारी के नेतृत्व में अपनी बढ़त बरकरार रखती है।



