
नागपुर: साइबर क्राइम से लड़ने वाली पुलिस अब खुद सवालों के घेरे में आ गई है। एक बड़े खुलासे में नागपुर के साइबर थाने के इंचार्ज समेत कुल 9 पुलिसकर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। इस सख्त कार्रवाई के बाद पूरे पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
निलंबित अधिकारियों में वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक बलिराम सुतार, सहायक निरीक्षक योगेश घारे, विजय राणे और अन्य कर्मचारियों में प्रफुल्ल ठाकरे, सतीश वाघ, श्रीकांत गोनेकर, सुशील चांगोले, अजय पवार और सौरभ हिवरकर शामिल हैं।
कैसे खुला मामला?
सूत्रों के अनुसार, यह पूरा मामला ऑनलाइन सट्टा नेटवर्क से जुड़ा हुआ है। एक बुकी ने साइबर थाने में आर्थिक धोखाधड़ी की शिकायत दर्ज कराई थी। हालांकि मामला लंबित होने के बावजूद उसे जल्दबाजी में दर्ज किया गया, जिससे संदेह और गहरा गया। इसी दौरान पुलिसकर्मियों पर उगाही (वसूली) के गंभीर आरोप भी सामने आए।
बताया जा रहा है कि हाल ही में थाने के भीतर अधिकारी विजय राणे और कर्मचारी प्रफुल्ल ठाकरे के बीच हुए विवाद ने इस पूरे मामले का पर्दाफाश कर दिया।
जांच में क्या सामने आया?
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस आयुक्त ने तत्काल जांच के आदेश दिए और जिम्मेदारी डीसीपी को सौंपी गई। पूछताछ और साक्ष्यों के आधार पर सभी संबंधित पुलिसकर्मी दोषी पाए गए। रिपोर्ट मिलते ही पुलिस आयुक्त ने बिना देरी किए सभी 9 आरोपियों को सस्पेंड कर दिया।
अंदरूनी कलह बनी वजह
सूत्रों के मुताबिक, साइबर थाने में लंबे समय से अंदरूनी खींचतान चल रही थी। ‘तेरी भी चुप, मेरी भी चुप’ के माहौल में मामला दबा हुआ था, लेकिन हाल ही में हुई मारपीट ने पूरी सच्चाई उजागर कर दी।
चौंकाने वाली बात यह भी है कि कार्रवाई की भनक लगते ही थानाधिकारी पहले से ही लंबी छुट्टी पर चले गए थे।
यह मामला सिर्फ धोखाधड़ी तक सीमित नहीं है, बल्कि पुलिस विभाग की साख पर भी बड़ा सवाल खड़ा करता है। जिस थाने पर साइबर अपराध रोकने की जिम्मेदारी थी, वहीं से उगाही और गड़बड़ी के आरोप सामने आना बेहद गंभीर संकेत है।
अब सभी की नजर आगे की कार्रवाई और संभावित आपराधिक मामलों पर टिकी है।








