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    Published On : Thu, Aug 9th, 2018

    सब्र का बांध टूटा,बस ऑपरेटर गए हड़ताल पर

    नागपुर: दिन ब दिन मनपा की आर्थिक हालात गिरते जा रही हैं.गल्ली से दिल्ली तक एक पक्ष की सत्ता सह नागपुरी मुख्यमंत्री व वजनदार केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद मनपा को आर्थिक अड़चन से मुक्ति दिलवाने के लिए अविलंब ठोस उपाययोजना न किया जाना समझ से परे हैं.मनपा प्रशासन भी उपलब्ध राशि से उपजी समस्या को संभालने की जीतोड़ कोशिश कर रही थी लेकिन जब नहीं संभाला तो बस ऑपरेटरों को हड़ताल पर जाने से नहीं रोक पाई.आज से अनिश्चित काल के लिए बस ऑपरेटर चले गए,शहर बस सेवा ठप्प होने से आम नागरिकों को ज्यादा पैसे खर्च कर अन्य संसाधनों से अपने गंतव्य स्थल की ओर जाना पड़ रहा हैं.

    ज्ञात हो कि मनपा प्रशासन खुद की मुलभुत जिम्मेदारियां पूरी करने में असफलताओं का रिकॉर्ड अपने नाम किये हुए.साथ में विभाग दर विभाग का निजीकरण करने का दौर चल ही रहा.कुल मंजूर पद का आधा रिक्त हैं.प्रत्येक छोटे-बड़े कामों के लिए पीएमसी पर आश्रित हैं.बावजूद इसके शहर बस परिवहन,मेट्रो और स्मार्ट सिटी जैसे बड़े-बड़े महत्तवाकांक्षी प्रकल्पों का बोझा मनपा ने अपने कांधो पर लेकर बुरी तरह कुचली जा चुकी हैं.क्यूंकि मनपा नागपुर के पास न खुद की ‘मनी’ और न ही ‘मैन’ पॉवर हैं.प्रशासन पूर्णतः पैसे और अधिकारियों के मामले में राज्य व केंद्र पर आश्रित हो गया हैं.

    जहाँ तक शहर बस सेवा का सवाल हैं,सूझ-बुझ में कमी की वजह से परिवहन व्यवस्थापक और बस संचलन की जिम्मेदारी डिम्ट्स का चयन करने में चूक कर गई.दूरदर्शिता होती तो जो पहल आज करने की कोशिश जारी हैं,शुरुआत में कर दी गई होती तो आज यह नौबत नहीं आती.जल्दबाजी में खुद की पीठ थपथपाने के चक्कर में मनपा प्रशासन ने अपने पेअर पर कुल्हाड़ी मार ली हैं.

    कल दोपहर बाद तीनों लाल बस ऑपरेटरों ने परिवहन व्यवस्थापक और मनपा प्रशासन को एक संदेशा भिजवाया जिसमें ‘
    With reference to our letter no. Rkcitybus/Outgoing/2018-19/57 dated 07-aug-18, we have not received any update from your office , regarding payment clearance.So, as already communicated there will be “operational failure” from 09 Aug 2018 onwards….Due to non availability of funds.’ very sorry 🙏.

    जिसके बाद भी प्रशासन ‘चु से चा’ नहीं की.एक पदाधिकारी के अनुसार मनपा प्रशासन भी चाहता हैं कि २,४,१० दिन बस बंद भी रही तो कोई बात नहीं,लेकिन बस ऑपरेटरों के समक्ष नहीं झुकेंगे। बस ऑपरेटरों ने आज सुबह से शहर बस संचलन बंद कर दिया। इनकी महत्वपूर्ण समस्या यह हैं कि बस चालकों का मासिक वेतन,ईंधन खरीदने हेतु शहर के सभी पेट्रोल पंप धारकों ने संयुक्त रूप से उधारी में ईंधन देने मामले में हाथ खड़े कर दिया,बस मरम्मत आदि अन्य खर्च भी उधारी में होने के कारण,सबसे बड़ी समस्या यह हैं कि बस ऑपरेटरों ने ५०-५० से अधिक बसें बैंकों से कर्ज के रूप में लिए,पिछले कुछ माह से नियमित क़िस्त न भरने के कारण सम्बंधित बैंक ने इन्हें काली सूची में डालने का नोटिस से अवगत करवा चुके हैं.

    फिर भी जैसे तैसे बस ऑपरेटर दिन काट रहे थे.लेकिन मनपा की परिस्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जाने प्रशासन मूक प्रदर्शन करना शुरू कर दिया।अंत में बस ऑपरेटरों ने हड़ताल पर जाने का निर्णय लिया।हड़ताल में जाने से १.२५ लाख यात्रियों को आज सुबह से आवाजाही हेतु नाना प्रकार की दिक्कतें शुरू हो गई.तो दूसरी ओर समाचार लिखे जाने तक सभी लाल बस ऑपरेटरों के बस चालक अपने अपने ऑपरेटरों पर मासिक वेतन जारी करने का दबाव बनाना शुरू कर दिए हैं.

    प्रशासन विरोधी खुश

    इस हड़ताल से मनपा प्रशासन विरोधी काफी खुश हैं,क्यूंकि प्रशासन पर रोजाना नई ,नई आफत आते जा रही हैं.कल विपक्ष नेता ने ठेकेदारों के अनशन को समर्थन देकर प्रशासन पर नाराजगी जताई।साथ ही यह भी नाराजगी जताई कि मनपा आयुक्त व सत्तापक्ष ने संयुक्त रूप से मनपा संचलन के लिए निर्मित ‘कोर कमिटी’ में विपक्ष नेता को दूर रखा.सवाल यह हैं कि क्या मनपा संचलन में विपक्ष नेता का योगदान नहीं होता हैं.अगर होता हैं तो विपक्ष नेता के अधिकार का प्रशासन ने हनन किया।


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