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    Published On : Sat, Mar 9th, 2019

    सट्टोरियों के लिए स्वर्ग बनता जा रहा नागपुर

    अंतर्राष्ट्रीय दिग्गज सटोरिए प्यादों को सामने रख कर रहे हैं क्रिकेट सट्टे का संचलन

    नागपुर : नागपुर शहर को सट्टे खासकर क्रिकेट सट्टे की राजधानी कहा जाए तो अब अतिश्योक्ति नहीं होगी. विदेशों में कुछ देशों में भले ही सट्टे को अधिकृत किया गया हो लेकिन देश में यह अवैध है. बावजूद इसके नागपुर में इस व्यवसाय के अंतर्राष्ट्रीय खिलाड़ी मौजूद हैं. पिछले कुछ सालों इसका संचालन चोरी छिपे होचा था लेकिन इन दिनों वे उतने भयभीत नजर नहीं आ रहे हैं. कल हुई इंडिया -ऑस्ट्रेलिया की मैच के दौरान सट्टे की बाजियां शहर के बाहरी इलाकों खास तौर से ग्रामीण भागों में जमकर चलीं.

    जानकर सूत्रों के अनुसार जिस देश में क्रिकेट का मैच होता है, उस देश का क्रिकेट सट्टा बाजार में पलड़ा भारी रहता है और रुपए में उसकी बोली कम रहती है. इस अवैध व्यवसाय में भरोसा काफी होता और इससे खेल में भरोसेमंदों के साथ ही व्यवहार किया जाता है. चूंकि इसका ठिकाना अस्थाई होता है. इसलिए सारा कारोबार मोबाइल पर निर्भर करता है. वह भी नए-नए मोबाइल नंबर का उपयोग कर इसे अंजाम दिया जाता है. क्रिकेट मैच का सबसे बड़ा सट्टा ‘टॉस’ पर दिग्गज खिलाड़ी लाखों-करोड़ों में लगाते हैं. इसके अलावा प्रत्येक ओवर, विकेट, कैच, चौके, छक्के, हार, जीत पर सट्टा लगाया जाता है.

    जीत-हार की राशि का आदान-प्रदान भी निश्चित नहीं होता है. खास तौर से राशि का आदान-प्रदान किसी न किसी खास व्यापारिक प्रतिष्ठान के मार्फ़त होता आ रहा है. इस अवैध व्यवसाय की सूक्षम जानकारी सभी संबंधितों को होती है. क्यूंकि इस अवैध व्यवसाय के खिलाफ कार्रवाई करने वाले और सार्वजानिक करने वाले सभी सम्बंधित ‘पैक’ है. इसलिए यह धंधा पूरी शबाब पर है.

    व्यवसाय में प्रत्येक मैच के हार-जीत की रकम चुकाने की मोहलत हफ्ते भर की होती है. दिग्गज-सक्षम खिलाड़ियों को पूरी सीरीज के बाद सम्पूर्ण व्यवहार किया जाता है. इस देनदारी में संरक्षकों को दी जाने वाली ‘डोनेशन’ की भी कटिंग की जाती है.

    क्यूंकि इस व्यवसाय में ‘इजी-हैवी मनी’ प्राप्त होती है. इस चक्कर में कई डूब भी चुके हैं. फिर भी सम्पूर्ण शहर में हज़ारों की संख्या में युवा वर्ग इसकी लत में डूबे हुए हैं.


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