Published On : Sat, Sep 2nd, 2017

शिक्षकों के साथ धोखाधड़ी के मामले में शिक्षा सचिव व शिक्षा आयुक्त शर्मा पर हो कार्रवाई : नागो गाणार


नागपुर:
शिक्षा क्षेत्र के साथ 6916 शिक्षकों की दुर्दशा करने वाले अधिकारियों के निलंबन की मांग विधान परिषद के सदस्य विधायक नागो गाणार ने मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से की है. गाणार द्वारा दिए गए निवेदन में बताया गया कि 3 अक्टूबर 2011 से लेकर 5 अक्टूबर के दौरान स्कूल में उपस्थिती के बारे में विशेष जांच अभियान चलाया गया था. जिसके अनुसार शासन ने निर्णय दिया था कि राज्य की स्कूलों में अतिरक्त पाए गए शिक्षकों का पूर्ण रूप से जब तक समायोजन नहीं होता तब तक निजी एवं स्थानिक स्वराज्य संस्थाओं की स्कूलों में नए शिक्षकों के साथ ही नए कर्मचारियों की भी भर्ती न की जाए. बावजूद इसके इस निर्णय की परवाह किए बगैर राज्य के प्राथमिक विभाग में 796, माध्यमिक विभाग में 4570, उच्च माध्यमिक विभाग में 1550 ऐसे कुल 6916 नई नियुक्तियां की गई. इन नियुक्तियों को शिक्षणाधिकारी व शिक्षा उपसंचालक ने मान्यता भी प्रदान की है. इन सभी नियुक्तियों में करोड़ों रुपए का भ्रस्टाचार होने की शिकायतें आई हैं. गाणार ने अपने निवेदन में आगे बताया है कि शिक्षा विभाग ने अगस्त 2015 को व्यक्तिक मान्यता जांच समिति का गठन किया था.

इस समिति ने सभी 6916 नियुक्तियों की जांच की और इन्हें मान्यता देनेवाले शिक्षणाधिकारी व शिक्षा उपसंचालक को कारण बताओ नोटिस दिया. साथ ही 6916 प्रकरण की सुनवाई करने के आदेश भी दिए. इस निर्देश के अनुसार मान्यता देनेवाले शिक्षणाधिकारी और शिक्षा उपसंचालक ने सुनवाई की और प्राथमिक विभाग के 160, माध्यमिक विभाग के 338 व उच्च माध्यमिक विभाग के करीब 111 ऐसे कुल 609 शिक्षकों और कर्मचारियों की मान्यता रद्द की. इस प्रकरण के बाद इसके खिलाफ मुंबई उच्च न्यायलय में दाखिल की गई जनहित याचिका 14 अगस्त 2017 को निकाली गई. इस निर्णय में मुंबई उच्च न्यायलय ने याचिका में निरक्षण कर व्यक्तिक मान्यता रद्द करने के आदेश के साथ ही इस विषय से सम्बंधित शिक्षा आयुक्त द्वारा निकाले गए सभी नोटिफिकेशन रद्द किए गए.

गाणार ने बताया कि लातूर जिले में 262 बोगस लोगों को मंजूरी देने को लेकर सरकार की करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी करने के मामले में शिक्षणाधिकारी व अन्य लोगों के खिलाफ लातूर पुलिस स्टेशन में अपराध दर्ज कराने के आदेश उच्च न्यायलय के औरंगाबाद खंडपीठ ने 3 अगस्त 2017 को दिए थे.

इस पूरे मामले में कुल 6916 शिक्षकों के साथ धोखाधड़ी की गई है. साथ ही सभी शिक्षकों को आरोपियों की तरह कटघरे में खड़ा कर सुनवाई की गई. इस तरह से शिक्षकों की गरिमा को ठेस पहुंची है. शिक्षकों की भर्ती से सम्बंधित सभी निर्णय नियमों को ताक पर रखकर निकाले गए थे. जिसके कारण ही शिक्षकों की और शिक्षा विभाग की बदनामी हुई. इस पूरे मामले में लिप्त शिक्षा सचिव नंदकुमार, शिक्षा आयुक्त शर्मा, व अन्य अधिकारियों पर कार्रवाई करने की मांग महाराष्ट्र राज्य शिक्षक परिषद की ओर से की गई है. कार्रवाई नहीं करने पर आंदोलन की चेतावनी भी दी गई है.