Published On : Mon, Aug 17th, 2026
By Nagpur Today Nagpur News

नाग नदी के किनारे 5 हजार घरों और झोपड़ियों पर टूटने का खतरा

नाग नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना में वैकल्पिक तकनीक तलाशने के निर्देश
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5,000 Houses and Shanties Face Demolition Threat Along Nag River

नागपुर :नाग नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना के तहत नाग नदी के किनारे बसे करीब 5,000 घरों, झोपड़ियों और अन्य निर्माणों पर तोड़े जाने का खतरा मंडरा रहा है। नदी से करीब 15 मीटर के दायरे में स्थित अनधिकृत बस्तियों और झोपड़ियों पर परियोजना की वजह से असर पड़ने की संभावना है।

यह मामला परियोजना के प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंट (PMC) द्वारा तैयार सर्वे रिपोर्ट के बाद सामने आया। हाल ही में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी की मौजूदगी में हुई बैठक में भी इस मुद्दे पर चर्चा हुई।

गडकरी ने नागपुर नगर निगम (NMC) और नागपुर सुधार प्रन्यास (NIT) को संभावित रूप से प्रभावित करीब 5,000 परिवारों के पुनर्वास के लिए जमीन चिन्हित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही अधिकारियों से ऐसी वैकल्पिक तकनीक और विकल्प तलाशने को कहा गया है, जिससे कम से कम घरों को हटाना पड़े।

टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स ने किया सर्वे
NMC ने नदी के किनारे बने घरों और अन्य निर्माणों का सर्वे करने के लिए टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स को PMC नियुक्त किया था।

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सर्वे के दौरान करीब 5,000 घर, झोपड़ियां और अन्य निर्माण परियोजना से प्रभावित होने की संभावना के रूप में चिन्हित किए गए।

अब स्मार्ट सिटी परियोजना से जुड़े अधिकारियों को सर्वे रिपोर्ट की दोबारा जांच करने और चिन्हित निर्माणों की स्थिति तथा परियोजना की प्रस्तावित लाइन के एलाइनमेंट का सत्यापन करने की जिम्मेदारी दी गई है।

सत्यापन रिपोर्ट मिलने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

15-20 मीटर नीचे सीवर लाइन बिछाने का विकल्प
बैठक में नाग नदी परियोजना की प्रस्तावित 170 किलोमीटर लंबी आउटफॉल सीवर लाइन को जमीन से 15 से 20 मीटर नीचे उपयुक्त तकनीक के माध्यम से बिछाने की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया गया।

यदि यह विकल्प तकनीकी रूप से संभव पाया जाता है, तो बड़ी संख्या में घरों को टूटने से बचाया जा सकता है।

परियोजना के तहत नाग और पीली नदी के किनारे मुख्य सीवर लाइन बिछाने तथा उससे छोटी सीवर लाइनों को जोड़ने की योजना है।

इसका उद्देश्य नदियों में बिना उपचारित सीवेज के प्रवाह को रोकना है।

अधिकारी इस विकल्प पर भी विचार कर रहे हैं कि सीवर लाइन नदी के सिर्फ एक किनारे से बिछाई जाए, ताकि प्रभावित होने वाले निर्माणों की संख्या कम की जा सके।

टेंडर प्रक्रिया में लग सकते हैं 6 महीने
स्मार्ट सिटी अधिकारियों को टाटा कंसल्टिंग इंजीनियर्स की रिपोर्ट का क्रॉस-चेक करने का काम सौंपा गया है।

अधिकारियों के अनुसार, सर्वे का सत्यापन, नई तकनीक को शामिल करना और परियोजना के लिए टेंडर तैयार करने की प्रक्रिया में करीब छह महीने लग सकते हैं।

इसके बाद ही परियोजना का वास्तविक काम शुरू होने की संभावना है।

₹1,926.99 करोड़ की परियोजना
राष्ट्रीय नदी संरक्षण योजना (NRCP) के तहत नाग नदी प्रदूषण नियंत्रण परियोजना के लिए ₹1,926.99 करोड़ की प्रशासनिक मंजूरी दी जा चुकी है।

राज्य के पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग ने 3 मार्च 2025 को परियोजना को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी थी।

NMC ने परियोजना के लिए केंद्र सरकार के समक्ष ₹22,412.34 करोड़ का प्रस्ताव भी प्रस्तुत किया था।

परियोजना में प्रस्तावित प्रमुख कार्य
कुल 459.5 किलोमीटर नई सीवर लाइन बिछाई जाएगी।

110.9 किलोमीटर नई सेकेंडरी सीवर नेटवर्क तैयार होगी।

137 किलोमीटर मौजूदा सीवर लाइन को बदला जाएगा।

कुल 102 MLD नई सीवेज ट्रीटमेंट क्षमता विकसित की जाएगी।

VNIT में 12 MLD STP बनाया जाएगा।

मोरभवन में 35 MLD STP बनाया जाएगा।

आंध्र कॉलोनी में 45 MLD STP बनाया जाएगा।

मोक्षधाम और मनकापुर के मौजूदा 5 MLD STP का अपग्रेडेशन किया जाएगा।

STP परिसरों में सोलर पैनल भी लगाए जाएंगे।

नदी की सफाई के साथ पुनर्वास बड़ी चुनौती
परियोजना का मुख्य उद्देश्य नाग और पीली नदियों में बिना उपचारित सीवेज का प्रवाह रोकना है। हालांकि, इसके कारण करीब 5,000 परिवारों के विस्थापन की आशंका अब एक बड़ी चुनौती बन गई है।

अब सर्वे के सत्यापन और वैकल्पिक तकनीक पर होने वाले अध्ययन से यह तय होगा कि परियोजना को किस तरह लागू किया जाए, ताकि नदी प्रदूषण पर रोक लगाने के साथ कम से कम घरों को हटाना पड़े।

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