Published On : Tue, Aug 17th, 2021

6 माह टलेगा मनपा चुनाव

– फरवरी 2022 में हो रहा वर्तमान कार्यकाल का अंत,बाद में प्रशासन बैठाने पर चल रहा विचार -विमर्श ताकि भाजपा को न हो फायदा

नागपुर -मनपा में वर्तमान कार्यकाल की अवधि फरवरी 2022 में समाप्त हो रही,इस हिसाब से अभी से ही अगले चुनाव की प्रशासकीय तैयारियां शुरू हो जानी चाहिए थी,लेकिन कोरोना की आड़ लेकर यह चुनाव 6 माह टालने की कोशिशें जारी है। ताकि अगले चुनाव में भाजपा को लाभ न होने पाए।

याद रहे कि राज्य सरकार ने अगला चुनाव वार्ड पद्धति से करवाने का निर्णय 6 माह पूर्व ले चुकी है। जिसका सत्ताधारी एनसीपी और शिवसेना समर्थन कर रही तो दूसरी ओर कम से कम 2-2 वार्डो का प्रभाग बनाकर चुनाव करवाने के लिए भाजपा और कांग्रेस जोर मार रही। क्योंकि इस संबंध में कोरोना के मद्देनजर अंतिम निर्णय नही लिया गया,इसलिए आगामी मनपा चुनाव 6 माह टलने की संभावना से इंकार नही किया जा रहा।

विधिवत आगामी विधान मंडल की शीतकालीन सत्र में मनपा चुनाव को लेकर अंतिम निर्णय लिया जाएगा,इसके बाद वार्ड या प्रभाग की रचना/कटिंग और बाद में आरक्षण फिर इसके साथ ही नए -पुराने मतदाता का पंजीयन/अपडेट आदि करने में लगभग 6 माह लगेंगे।
फरवरी 2022 में मनपा में भाजपा का कार्यकाल समाप्ति बाद प्रशासक बैठाने के लिए योजना बनाई जा रही। प्रशासक बैठाने से राज्य में सत्ताधारी तीनों पक्षों का मानना है कि इसका सीधा असर भाजपा पर होगा।

जमीनी हकीकत यह है कि 6 माह चुनाव टालने से या फिर वार्ड या प्रभाग स्तर पर चुनाव करवाने के निर्णय भाजपा को बहुत ज्यादा नुकसान नहीं होने वाला क्योंकि उनके पास मजबूत संगठन है वह भी एक नहीं बल्कि लगभग एक दर्जन। तो दूसरी ओर कांग्रेस के पास लगभग एक दर्जन गुट है,जो उनको सत्ता से दूर रखने के लिए काफी है,इसके अलावा एनसीपी और शिवसेना का शहर में जनाधार नही होने से वे प्रभाग पद्धति या वार्ड पद्धति में 10-10 सीटों के भीतर सिमट जाएंगे।बाद में वे दोनों निर्दलीयों को अपनी ओर खींच अपने पक्ष की संख्या बढ़ा ले तो और बात होगी।
राज्य में त्रिपक्षीय सरकार मनपा चुनाव खासकर नागपुर शहर की मनपा पर कब्जा पाने के लिए कितनी भी हाथ-पांव मार ले आज की हालात के हिसाब से भाजपा के नगरसेवक 108 से कम जरूर हो सकते है लेकिन एकल बड़ी पक्ष भाजपा ही रहेगी। वही वार्ड स्तर पर अगला मनपा चुनाव हुआ तो सबसे ज्यादा बागी उम्मीदवारों से भाजपा को ही सामना करना पड़ेगा,वार्ड स्तर के चुनाव में हमेशा की तरह निर्दलीय नगरसेवकों की संख्या निर्णायक साबित होगी।

उल्लेखनीय यह है कि मनपा चुनाव को लेकर भाजपा की तैयारी कुछ माह पूर्व शुरू हो चुकी है,नगरसेवकों के कार्यो की समीक्षा हो चुकी है,आधे से अधिक नगरसेवकों को घर बैठाया जाएगा,अर्थात अगले चुनाव में भाजपा आधे से अधिक नए उम्मीदवारों को अवसर देने के मूड में है। वही कांग्रेस अभी तक किसके नेतृत्व में अगला मनपा चुनाव लड़ने वाली है यह तय नही हो पाया है। नितिन-सतीश या फिर ठाकरे-केदार….पालकमंत्री या फिर शहराध्यक्ष…वर्तमान शहराध्यक्ष या फिर नया शहराध्यक्ष… इस मामले में रुचि रखने वाले सभी असमंजस में है। कांग्रेस की परंपरा रही है कि मतभेद को तरजीह देते हुए अपने की पक्ष के दूसरे गुट के उम्मीदवारों को हराया जाए,भले ही पुनः विरोध में बैठना पड़े। यह नीत अधिकतर विधायको की रही है क्योंकि उनका वक़्त निकल गया,उन्हें पक्ष या पक्षीय उम्मीदवारों से कोई लगाव नही होता है।
एनसीपी नेताओं के मोह में पिछले 6 माह में जितनों ने भी एनसीपी में प्रवेश किया,उनका संयम मनपा चुनाव तक ही बताया जा रहा,इसके तुरंत बाद घर वापसी या पक्ष छोड़ने का तांता लग जाएगा।शिवसेना ने नागपुर शहर में सेना को कभी गंभीरता से नही लिया,इसलिए सेना नागपुर में सिमट गई,इनके पूर्व और वर्तमान में रहे नगरसेवक अपनी खुद की काबिलियत पर पक्ष का नेतृत्व कर रहे है। यह परंपरा कायम रहेगी,भले ही नेतृत्व बदल दिया गया हो…..।

बसपा वर्तमान में मनपा में तीसरी बड़ी पक्ष है लेकिन संकीर्ण मिजाज के कारण नागपुर शहर के लिए उल्लेखनीय छाप नही छोड़ पाई,भविष्य में 10 के आसपास ही आंकड़ा रहने वाला है क्योंकि यह कभी भाजपा तो कभी कांग्रेस हित में पलटी मरती रही है।