Published On : Wed, Oct 24th, 2018

मोदी का मतलब मैन हू डिस्ट्रॉय इन इस्टीट्यूशन – यशवंत सिन्हा

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राफेल जाँच से बचने के लिए सीबीआय में हो रहा ड्रामा

नागपुर: केंद्रीय जाँच एजेंसी सीबीआई में शुरू घटनाक्रम को लेकर पूर्व वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा ने इसे पूर्व नियोजित करार दिया है। नागपुर में पत्रकारों से बात करते हुए सिन्हा ने कहाँ शुरू घटनाक्रम की वजह से संस्था की स्वायत्ता को ख़त्म कर दिया गया है। जो नाटक हो रहा है वह राफेल डील को लेकर केंद्रित है। देश की हाई पावर कमिटी जिसमे सुप्रीम कोर्ट में प्रमुख न्यायाधीश,प्रधानमंत्री और नेता प्रतिपक्ष होते है। यही कमिटी सीबीआई प्रमुख की नियुक्ति करती है। संविधान के प्रावधान के मुताबिक सीबीआई के प्रमुख का कार्यकाल सुनिश्चित,सुरक्षित होता है। जो लोकपाल के अधीन है। इस पद पर बैठे शख्श को हटाने का अधिकार सिर्फ इसी कमिटी के पास है। इसलिए सीबीआई प्रमुख को हटाना असंवैधानिक है। देश में अलोकतांत्रिक तरीके से काम हो रहा है। किसी भी लोकतंत्र के लिए सत्ता और अधिकार व्यक्ति केंद्रित हो जाना खतरनाक है। आज यही हो रहा सारे अधिकार मोदी के पास है। मोदी का मतलब मैन हू डिस्ट्रॉय इन इस्टीट्यूशन,यह सबको पता है कि सीबीआई प्रमुख राफेल डील को लेकर जाँच करने वाले है। हो सकता था कि वो इस मामले को लेकर एफआयआर दर्ज करते। राफेल डील सीधे प्रधानमंत्री दे जुड़ीं है। अरुण शौरी के साथ प्रशांत भूषण ने सीबीआय प्रमुख से मिलकर मामले की जाँच की माँग की थी। अलोक कुमार वर्मा ने इस मामले पर संज्ञान लेते हुए रक्षा मंत्रालय से हमारे द्वारा दिए गए साक्ष्यों की वैधता की पुस्टि के लिए जवाब तलाब किया था। सरकार वर्मा से इसलिए नाराज थी की उन्होंने हमें मिलने का समय क्यूँ दिया। इसके साथ ही राज्य सभा सांसद संजय सिंह ने भी सीवीसी ( मुख्य सतर्कता आयुक्त) को भी पत्र लिखकर जाँच की माँग की थी। जिस पर सीवीसी ने सीबीआय से जाँच की सिफारिश की थी। सीबीआय प्रमुख को जबरन छुट्टी पर भेजा जाना एक तरह की पनिशमेंट है जो नहीं दी जा सकती। जिस सीबीआय के एसपी ने मोदी के करीबी राकेश अस्थाना पर एफआयआर दर्ज कराई उसे अंदमान-निकोबार भेज दिया गया। वर्मा की जगह भ्रस्टाचार के संगीन आरोपों से घिरे और अन्य लोगो के अनुभव को दरकिनार कर नागेश्वर राव को चार्ज दे दिया गया जो भी गलत है। सरकार का यह तर्क की प्रमुख और उपप्रमुख दोनों पर भ्रस्टाचार के आरोप लगे है इसलिए दोनों पर कार्रवाई की जा सकती है यह गलत है दोनों के ओहदे में बहुत फर्क है संस्था के प्रमुख के पास ही सारे अधिकार है। देश में लोकतंत्र नहीं चल रहा है हम बनाना रिपब्लिक होने की ओर बढ़ रहे है। यह मामला सुप्रीम कोर्ट में है। अलोक वर्मा ने भी केस किया है देखते है अदालत क्या फैसला लेती है।

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सरकार के उच्च पदस्थ लोग खुद को बचने के लिए रच रहे ड्रामा
पूर्व वित्त मंत्री के मुताबिक राफेल डील मामले में सरकार सीधे तौर पर फंसी हुई है और सरकार में बैठे लोग खुद बचाने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते है। यह जो नाटक शुरू है ये इसीलिए कि खुद को इससे कैसे बचा जाये। सरकार में बैठे कुछ उच्च पदस्थ लोगों पर सीबीआय प्रमुख मामला दर्ज कर सकते है। इसकी भनक सरकार को लग गई थी। देश में जो स्थिति है वह आपातकाल में भी नहीं थी । एक तरह से अन प्रेसिडेंटेड डेवलेपमेंट हो रहा है। राकेश अस्थाना किसके आदमी है सबकी पता है। अलोक वर्मा को हटाने के लिए चक्रव्यूह बनाया गया है। अस्थाना पर लगे भ्रस्टाचार के मामले को वर्मा पर मढ़ दिया गया। जिसमे सरकार फेल हो गई। देश की जनता सब देख रही है जिसका जवाब वो अपने समय पर देगी। लेकिन गाँव-गाँव में निष्पक्ष जाँच के लिए जिस सीबीआय का नाम लिया जाता था अब उसकी छवि धूमिल हो गई है।

रिस्क बहुत है ये बदला लेने वाली सरकार है- शत्रुध्न सिन्हा
यशवंत सिन्हा के साथ मौजूद बीजेपी सांसद ने कहाँ कि लोकतंत्र को बचाने के लिए जो चीज गलत हो रही है उसके खिलाफ आवाज़ उठाना जरुरी है। हम प्रयास कर रहे है। इसमें खतरा बहुत है ये सरकार बदला लेने वाली सरकार है। व्यक्तिगत स्तर पर खरता है। भारत में लोकतंत्र है और देश संविधान से चलता है। इसमें जैसे त्रुटिया और खामिया आती है। हम जैसे लोग इसमें सुधार करने का प्रयास करते है।

राफेल देश का सबसे बड़ा घोटाला,मोदी इसके केंद्र में – संजय सिंह
आप पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह के मुताबिक राफेल देश के इतिहास का सबसे बड़ा घोटाला है। इसके सारे साबुत उपलब्ध है। इस घोटाले के तीन केंद्रबिंदु फ़्रांस के पूर्व राष्ट्रपति,प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अनिल अंबानी है। अस्थाना गुजरात कैडर के पुलिस अधिकारी है। गोधरा कांड में उन्होंने मोदी को बचाया था। जिसके लिए उन्हें सीबीआय में लाया गया। अब उनके माध्यम से सारा खेल हो रहा है। अस्थाना द्वारा मीफ़ कारोबारी मोईन कुरैशी से रिश्ते है। जिसकी कॉल और व्हॉट्स एप पर हुए वार्तालाप के सारे सबूत है। दुबई के व्यक्ति मनोज प्रसाद के माध्यम से रिश्वत की रकम दी गई। जिसमे सीबीआय के ही डीएसपी देवेंद्र कुमार भी शामिल है।

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