Published On : Sat, Sep 8th, 2018

मनपा कर्मचारी बैंक में भर्ती घोटाला, बुलाई गई बैठक में हंगामा होने के आसार

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नागपुर: नागपुर महानगरपालिका की ‘द नागपुर महानगरपालिका कर्मचारी सहकारी बैंक लिमिटेड, नागपुर’ के पूर्व संचालक वीरसिंह जाधव ने उक्त बैंक के वर्तमान संचालक मंडल द्वारा बड़ा घोटाला करने का संगीन आरोप लगाया. इस संगीन आरोप को लेकर आगामी ९ सितम्बर को होने वाली बैठक में हंगामा होने के आसार नज़र आ रहे हैं.

जाधव के अनुसार विगत माह बैंक में जितनी भर्तियां हुईं संचालन मंडल ने नियम-कानून को ताक पर रख के किया. इस भर्ती प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर आर्थिक व्यवहार तो हुआ, साथ ही संचालन मंडल के सदस्यों ने अपने-अपने करीबियों की नियुक्तियां की. इस सम्पूर्ण प्रक्रिया में संचालन मंडल ने बैंक की यूनियन और बैंक के सभासदों को नज़रअंदाज किया.

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जाधव के अनुसार बैंक की अधिकृत यूनियन और बैंक प्रबंधन के मध्य करार हुआ था. इस करार के अनुसार भर्ती सम्बन्धी लिखित परीक्षा लेने के लिए किसी अन्य एजेंसी को अधिकृत न करने की सख्त हिदायत दी गई थी. इसके बावजूद बैंक के संचालन मंडल ने करार के विरुद्ध जा कर भर्ती घोटाले को अंजाम दिया. बैंक कानून के हिसाब से रिक्त पदों पर योग्य कर्मियों को पदोन्नत कर रिक्त हुए पदों पर भर्ती करना चाहिए था. लेकिन प्रबंधन ने योग्य कर्मी का हक़ छीन गैरकानूनी रूप से भर्ती प्रक्रिया पूर्ण की. इससे बैंक में पहले से कार्यरत कर्मियों के साथ अन्याय किया गया है. उक्त मामले को कल ९ सितम्बर को होने वाली बैंक की आमसभा में गंभीरता से उठाया जाएगा.

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जाधव ने बताया कि उक्त मामले के एक प्रकरण में उच्च न्यायालय ने भी बाहरी एजेंसी के माध्यम से लिखित परीक्षा लेने को गैरकानूनी ठहराया है. इस हिसाब से न्यायालय का भी बैंक संचालक मंडल ने अपमान किया है.

संचालक मंडल द्वारा ली गई परीक्षा के परिणाम की ज्येष्ठता सूची तक सार्वजानिक नहीं की गई. इसके बाद भर्ती किए गए उम्मीदवारों का साक्षात्कार भी नहीं लिया गया. भर्ती किए गए उम्मीदवारों पर नया विवाद उत्पन्न न हो इसलिए आनन-फानन में ‘जॉइनिंग’ तक करवा लिया गया. इसमें बैंक के अध्यक्ष की बहू श्वेतांबरी शिंदे और शाखा व्यवस्थापक भिवगड़े के कोटे से अर्चना नागदिवे की भर्ती हुई, जिन्हें पुणे में बैंक के खर्च से ट्रैंनिंग के लिए भेजा गया. जबकि बैंक में पुराने कर्मी थे उन्हें यह अवसर प्रदान नहीं किया गया. इसलिए बैंक की बदनामी न हो इसलिए उक्त सभी भर्तियों को आमसभा में रद्द करने की मांग की जाएंगी.

अनुकंपा पर भर्ती में धांधली
बैंक के मृत कर्मियों के बदले अनुकम्पा पर योग्य पद पर उनके परिजन की भर्ती का नियम है. उक्त भर्ती प्रक्रिया के तहत एक मृत कर्मी के वारिसदार को नौकरी नहीं दी गई. इसकी खिलाफत करने वाले प्रकाश मेश्राम पर दबाव बनाकर अपना उल्लू सीधा कर दिया. सेवानिवृत्तों के कारण बैंक सभा सदस्यों की संख्या कम होते जा रही है. इसका गंभीर असर महसूस किया जा रहा है.

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