Published On : Sat, Sep 8th, 2018

महापौर झुकी, दी उपमहापौर को तरजीह

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Mayor Nanda Jichkar

नागपुर मनपा में एक ही पक्ष की सत्ता रहने के बाद सत्तापक्ष के शीर्षस्थों में आपसी रंजिश सर चढ़ कर बोल रही थी. इस रंजिश के कारण मनपा पर सत्तापक्ष की पकड़ ढीली पड़ गई. इसी क्रम में महापौर द्वारा ‘एकला चलो’ की नीति को नागपुर टुडे ने प्रमुखता से सार्वजानिक किया. नतीजा सकारात्मक रूप में सामने आया कि अंततः एक कार्यक्रम के दौरान पहली मर्तबा महापौर ने उपमहापौर को आगामी विदेश दौरे पर जाने की जानकारी दी.

महापौर अबतक आधा दर्जन के आसपास विदेश दौरे कर चुकी हैं. इसके अलावा अन्य शहरों के भी दौरे किए. सभी के सभी दौरे विभिन्न विषयों पर आधारित थे. पर दौरे के विषय सह दौरों का अनुभव आज तक गोपनीय ही रहा. जब महापौर के बनी उनके ६ माह तक मनपा में सत्तापक्ष के वरिष्ठ नगरसेवकों के व्यवहार से बड़ी कश्मकश में गुजारी, महापौर कार्यालय के तत्कालीन कर्मियों से काफी असहज रही. इसके बाद वह पुराने कर्मियों को हटा कर अपने मनचाहे कर्मी को महापौर कार्यालय में तैनात किया. इसके बाद इन्हीं की पहल पर विदेश यात्रा का लुफ्त उठा रही हैं.

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विडंबना यह है कि शहर के १५५ में से १२५ नगरसेवक प्रशासनिक दिक्कतों से अड़चन में हैं और प्रशासन आर्थिक अड़चनों से बुरी तरह जूझ रही चुनावी वर्ष में जनता बदहाल शहर, स्वास्थ्य सेवा, जलापूर्ति, कचरों से होने वाली समस्याएं आदि मामले में हलाकान हो रही है और ऐसे में महापौर के बार बार विदेश यात्रा पर लगातार उंगलियां उठ रही हैं. इनके ही कार्यकाल में शिक्षकों,मनपा कर्मियों,मनपा में ठेकेदारी कर रहे कंपनियों के कर्मियों और मनपा के ठेकेदारों में अनशन,आंदोलन तक किए. विधानसभा के मानसून सत्र में सत्तापक्ष प्रणीत ठेकेदार संगठन ने कांग्रेस के विधायक के मार्फ़त मनपा की अच्छी-खासी खिंचाई करवाई. जिस पर मुख्यमंत्री ने चुप्पी साध मामला को तूल पकड़ने नहीं दिया.

वहीं उन्हें कार्यालय में अतिक्रमण कर बैठे उनके रिश्तेदार का कहना है कि महापौर तो चुनाव नहीं लड़ना चाहती थी, गडकरी-फडणवीस के दबाव में चुनाव लड़ी, उन्होंने दबाव बनाते हुए कहा था कि महापौर पद ओबीसी महिला के लिए आरक्षित है और उनके पास महापौर के अलावा सक्षम उम्मीदवार नहीं है, इसलिए उन्हें मजबूरन चुनाव लड़ना पड़ा. रिश्तेदारों का कहना है कि उन्होंने ही पिछले आर्थिक वर्ष में महापौर निधि का वितरण किया था. इस बार भी उन्हीं के हाथों में कारोबार है.

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इन रिश्तेदारों का यहां तक कहना है कि महापौर का पश्चिम नागपुर से उम्मीदवारी तय हो चुकी है. इतना ही नहीं चुनाव जीतना भी तय है. जीत के बाद मंत्री बनना भी तय होने की जानकारी को प्रचारित करते देखे गए.

दूसरी ओर सत्तापक्ष के सैकड़ों नगरसेवक अपने अपने प्रभाग के विकास कार्य हेतु महापौर के बजाय स्थाई समिति अध्यक्ष और उपमहापौर से निधि हेतु आशांविन्त हैं. बजाय महापौर के. क्यूंकि महापौर निधि देने में पक्ष के ही नगरसेवक,उनके प्रभाग में देने से नियमित आनाकानी कर रही हैं. इसलिए सत्तापक्ष के नगरसेवकों ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात कर महापौर को बदलने या महापौर को पूर्ण सक्रीय रह शहर,जनता हित में काम मामले में दबाव बनाएंगे.

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