नागपुर – चिमूर से भाजपा विधायक कीर्तिकुमार उर्फ बंटी भांगड़िया ने सोमवार को नागपुर के प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी (विशेष सांसद-विधायक न्यायालय) के समक्ष उपस्थित होकर एनआईटी की लोक गृह निर्माण योजना से जुड़े दो मामलों में जमानत हासिल कर ली। जमानत मिलने के तुरंत बाद उनकी ओर से दोनों प्रकरणों में डिस्चार्ज याचिकाएं भी दाखिल की गईं। अब इन अर्जियों पर अदालत में सुनवाई होगी।
विधायक भांगड़िया के खिलाफ दोनों मामले वर्ष 2020 में अदालत के आदेश पर इमामवाड़ा और सक्करदरा पुलिस थानों में दर्ज किए गए थे। शिकायतकर्ता अधिवक्ता तरुण परमार की ओर से अधिवक्ता सतीश उके ने अदालत में शिकायत दायर की थी। शिकायत में एनआईटी की लोक गृह निर्माण योजना के तहत फ्लैट हासिल करने के लिए कथित तौर पर ऐसे शपथपत्र प्रस्तुत किए जाने का आरोप लगाया गया था, जिनमें संपत्ति संबंधी जानकारी छिपाई गई थी।
अदालत के आदेश के बाद पुलिस ने दोनों मामलों की जांच की और जांच पूरी कर आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। इसके बाद से दोनों प्रकरण न्यायालय में विचाराधीन हैं।
हाई कोर्ट में भी चली लंबी कानूनी लड़ाई
इन मामलों में विधायक भांगड़िया की ओर से प्राथमिकी तथा आगे की आपराधिक कार्रवाई रद्द करने की मांग को लेकर मुंबई हाई कोर्ट की नागपुर खंडपीठ का भी रुख किया गया था। उपलब्ध न्यायालयीन रिपोर्टों के अनुसार, हाई कोर्ट ने प्रारंभिक चरण में निचली अदालत द्वारा एफआईआर दर्ज करने के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया था।
हाल के घटनाक्रम में 4 अगस्त को भांगड़िया की ओर से दोनों मामलों से संबंधित याचिकाएं वापस ले ली गईं। इसके बाद निचली अदालत में दोनों प्रकरणों की कार्रवाई आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ। इसी क्रम में सोमवार को विधायक भांगड़िया अदालत में उपस्थित हुए, जहां उन्हें दोनों मामलों में जमानत मिल गई।
अब बचाव पक्ष की ओर से दाखिल की गई डिस्चार्ज याचिकाओं पर अदालत में सुनवाई होगी। इन अर्जियों पर होने वाली सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि दोनों मामलों में विधायक भांगड़िया के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई आगे जारी रहेगी या उन्हें प्रकरणों से डिस्चार्ज किया जाता है।




