Published On : Sat, Dec 22nd, 2018

शहर में Mid Day Meal देने वाली संस्था Akshaya Patra पर योजना के क्रियांवयन में लापरवाही बरतने का लगा आरोप

द अक्षय पात्र फाउंडेशन आरोपों को किया ख़ारिज

नागपुर: नागपुर में स्कूली छात्रों को दिए जाने वाले माध्यान्न भोजन में शिकायत मिलने के बाद शहर की आरटीई एक्शन कमेटी ने द अक्षय पात्र फाउंडेशन के किचन का दौरा किया। इस दौरे में बच्चों का भोजन तैयार करने वाली जगह में भारी अनियमितता मिलने का दावा किया गया है। कमेटी के द्वारा इस दौरे के दौरान खींची गई तस्वीरों को भी सार्वजनिक किया गया है जिसमें चावल में कीड़े और सड़े आलू पाये जाने का आरोप लगाया गया है। कमेटी के अध्यक्ष शाहिद शरीफ के मुताबिक 20 दिसंबर को पश्चिम नागपुर में मिड डे मील योजना के तहत एक स्कुल में कच्चा खाना परोसे जाने की शिकायत मिली थी । जिसके बाद उन्होंने खुद खाने को चखा। भोजन में इस दिन चावल और आलू-मटर की सब्जी बच्चों को दी गई थी। इसमें चावल अधकच्चे और मटर पके हुए नाही थे। जिसके बाद कमेटी के सदस्यों से द अक्षय पात्र फाउंडेशन के किचन का दौरा किया जिसमे उन्होंने भारी अनियमितता देखने को मिली।

शरीफ का कहना है कि मुख्यमंत्री के शहर में मिड डे मिल योजना को प्रभावी रूप से अमल में लाने के लिए खुद मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी ने अक्षय पात्र फाउंडेशन का उद्घाटन किया था। इस दौरान गुणवत्ता को लेकर बड़े-बड़े दावे भी किये गए थे लेकिन संस्था का काम दावों से एकदम भिन्न है। वर्त्तमान समय में इस संस्था के पास 14 हजार बच्चों को भोजन उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी है।

नियम के मुताबिक कक्षा 1 से 5 के बालक के लिए 100 ग्राम चावल और कक्षा 6 से 8 वी तक के लिए 150 ग्राम चावल और अन्य सामग्री के लिए 4 रूपए 13 पैसे प्रति छात्र के लिए सरकार द्वारा दिए जाते है। मिड डे मील के नियम के अंतर्गत बच्चो को अंडे,मांस,मछली देने का प्रधान है मगर यह संस्था अंडे तो दूर फ़ीकी सब्ज़ी और दाल बच्चों को खिला रही है क्यूँकि सब्जी में लहसुन और प्याज का इस्तेमाल ही नहीं होता है।

इतना ही नहीं फाउंडेशन के किचन में बनने वाले खाने की गुणवत्ता का कोई प्रमाण नहीं है। नियम के तहत कैटरिंग के लिए एफडीए का लाइसेंस दर्शनीय स्थल में लगा रहना चाहिए। तैयार होने वाली भोजन की गुणवत्ता की जाँच का रिकॉर्ड मैंटेन करने के लिए रजिस्टर में हर दिन की एंट्री होनी चाहिए लेकिन यह रजिस्टर ही नदारद था। न्यूट्रीशियन वैल्यू का डाटा उपलब्ध नहीं था। एमडीएम ऑनलाइन अपडेट नहीं था। यहाँ काम करने वाले कर्मचारियों का मेडिकल जाँच प्रमाणपत्र भी उपलब्ध नहीं था। यह सारी बातें आरटीई एक्शन कमेटी के दौरे में सामने आयी।

इतना ही नहीं किचन में रखे चावल में इल्लियाँ और सड़े आलू पाये गए। शरीफ के अनुसार उन्होंने इन सब बातों को लेकर फाउंडेशन के अधिकारियों से जवाब माँगा लेकिन वह देने में असमर्थ रहे। उनका कहना है कि जब शिक्षा अधिकारी के माध्यम से फ़ूड कॉर्पोरेशन ऑफ़ इंडिया के स्थानीय गोडाऊन से A क्वालिटी का चावल उपलब्ध कराया जाता है तो चावल में इल्लियाँ कैसे पायी गई। बीते दिनों इस किचन में एक महिला कर्मचारी का हाँथ रोटी बनाने की मशीन में चला गया था इसकी कोई जानकारी या कर्मचारी की मेडिकल रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हो सकी है।

राज्य में मिड डे मील योजना का क्रियांवयन सरकार के वर्ष 2002 के निर्णय के अनुसार हो रहा है। बच्चों को परोसे जाने वाले भोजन की व्यवस्था संभालने की जिम्मेदारी स्कुल व्यवस्थापन समिति और शिक्षा कार्यालय के अधीक्षक के माध्यम से होती है। लेकिन इस फाउंडेशन को लेकर खुद मुख्यमंत्री सकारात्मक दृश्टिकोण रखते है इसलिए इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रहा। शहर की 350 स्कूलों में भोजन देने की जिम्मेदारी बिना टेंडर प्रक्रिया के सीधे इस फाउंडेशन को दे दी गई। द अक्षय पात्र फाउंडेशन पर कई तरह के गंभीर आरोप लगाने वाली आरटीई एक्शन कमेटी अपने आरोपों पर कहती है कि वह गंभीरता से आरोप लगा रही है इस मामले की जाँच होनी चाहिए।

वही इस पुरे मामले पर द अक्षय पात्र फाउंडेशन का कहना है कि उन पर लगाए जा रहे सभी आरोप निराधार है। नागपुर में ऑपरेशन हेड प्रशांत भगत का कहना है कि फाउंडेशन का अपना नाम और काम है देश भर में हम काम कर रहे है। कही ऐसी शिकायत नहीं है। बच्चों को भोजन देने का करार स्कुल से है। आवश्यक सभी दस्तावेज उनके पास है। नागपुर में 65 कर्मचारी कार्यरत है जिनकी नियुक्ति सरकार के नियमों के तहत हुई है। हमारे पास स्थाई क्वलिटी कंट्रोल ऑफिसर है। किचन में बनने वाले भोजन की थर्ड पार्टी से जाँच कराई जाती है।

हमारे पास स्कूलों के खुद आवेदन आ रहे है कि हम अपनी सेवा दे मगर किचन की क्षमता की वजह से हम ऐसा करने में असमर्थ है। मिड दे मील योजना के तहत बच्चों के भोजन में कितनी कैलरी दी जानी चाहिए उस निर्देश के अनुसार हर दिन अलग-अलग मेन्यू के हिसाब से खाना दिया जा रहा है। नागपुर में जब हमने काम शुरू किया था तो पायलट प्रोजेक्ट के अंतर्गत 5000 बच्चो को मुफ्त में भोजन दिया जा रहा था सितंबर 2017 से हमने काम शुरू किया है और आज भी हम मुफ्त में भोजन दे रहे है। फाउंडेशन का काम सेवा भाव का है उसी के तहत हम कार्य कर रहे है। आरोप किस भावना से लगाया जा रहा है इसकी जानकारी उन्हें नहीं है।