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    Published On : Fri, May 11th, 2018

    मेट्रो के खोदे गए गड्ढों को बुझाने हॉटमिक्स विभाग को ऊपर से मिले आदेश

    Metro pits

    नागपुर: अगर नागपुर महानगरपालिका के कारखाना विभाग में विगत दिनों उठे मामले को घोटाले का नाम दिया गया. हालांकि देखा जाए तो ऐसे घोटाले मनपा के अमूमन सभी विभागों में हैं. जिसमें इन दिनों हॉटमिक्स विभाग अग्रणी बताया जा रहा है.

    हॉटमिक्स विभाग के कार्यकारी अभियंता के अनुसार गत सप्ताह ‘ऊपर’ से मौखिक आदेश आया कि ‘साहब’ का बड़ा कार्यक्रम है, कार्यक्रम स्थल मानकापुर इंडोर स्टेडियम के मुख्य द्वार पर आवाजाही का मार्ग और आसपास के ख़राब रास्ते तो तत्काल दुरुस्त करें. इस आदेश का पालन करते हुए सम्पूर्ण विभाग बिना किसी कागजी कार्यवाही किए मौखिक आदेश पर असमतल मार्ग व आसपास के इलाके को समतल करने में जुट गया.

    जबकि इसे बदहाल मेट्रो रेल प्रबंधन ने बनाया था, क्योंकि मेट्रो रेल के लिए बिजली मानकापुर स्थित बिजली केंद्र से देने के निर्णय के कारण भूमिगत केबलिंग के कारण खोदी जरूर गई लेकिन समतल नहीं की गई. यह क्षेत्र राष्ट्रीय महामार्ग प्राधिकरण के हद में आता है. लेकिन आदेशकर्ता को खुश करने के लिए कार्यकारी अभियंता ने मनपा को चुना लगाने के साथ मनपा नियमों की धज्जियां उड़ाई.

    ऐसा ही कुछ काम कोराडी रोड के एक फ्लैट स्कीम के कर दाता नागरिकों ने महापौर और मनपायुक्त से की. उनका काम में फाइल बना-बना कर मांग का पोस्टमार्टम कर दिया. क्यूंकि उनका काम करना नहीं था, उन्हें जानकारी दी गई कि नासुप्र की जगह है, परिसर निजी है. काम करवाना हो तो मौखिक किसी दिग्गज से कहलवा दो. इस सन्दर्भ में महापौर ने पत्र और तत्कालीन आयुक्त ने चर्चा के लिए कार्यकारी अभियंता को निर्देश दिया था, लेकिन दोनों के आदेश का उल्लंघन किया गया. स्कीम के सामने की बदहाली मनपा ने ही की, उन्हें पीने के पानी की मुख्य जलवाहिनी बिछाने के लिए जगह की जरूरत थी और खुदाई के बाद बदहाल छोड़ गए.

    उल्लेखनीय यह है कि मांगकर्ता स्कीम के पिछले निजी जमीन पर कब्ज़ा कर बैठे अतिक्रमणकारियों को मनपा-नासुप्र और पुलिस विभाग ने संयुक्त कार्रवाई कर जगह मुक्त करवाया. इन जैसे अतिक्रमणकारियों के लिए इसी कार्यकारी अभियंता और मंगलवारी ज़ोन के वार्ड अधिकारी ने स्वच्छ भारत अभियान के तहत मिले निधि से सार्वजानिक शौचालय का निर्माण किया. इन दिनों इसे सुरक्षा दीवार से घेरने का काम जारी है.

    सवाल यह है कि उक्त शौचालय की जगह निजी होने के साथ ही साथ क्षेत्र नासुप्र में होने के अलावा वे न तो करदाता हैं फिर इतनी मेहरबानी क्यों?
    दाल में काला नहीं, बल्कि दाल ही काली है. उक्त मामले पर मनपायुक्त से सकारात्मक पहल की उम्मीद स्कीम में रहने वाले ने जताई है.

    उक्त मामले को लेकर कार्यकारी अभियंता के सहायक ने स्कीम वालों को सलाह दी कि वे ‘आरटीआई’ का आवेदन करने के बजाय मंगलवारी ज़ोन के लोककर्म विभाग के ‘जेई’,डिप्टी आदि से समझौता कर लें. उनके सकारात्मक पहल पर ‘भारी’ काम हल्का कर दिया जाएगा। विभाग के कर्मी कार्यालयीन कामकाज के बाद सीधे सदर में दिखते हैं.


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