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    Published On : Thu, Aug 9th, 2018

    टेस्ट बंद, मरीज हलाकान, लंबी वेटिंग

    नागपुर: मेयो, मेडिकल, डागा सहित शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के 90 फीसदी तृतीय व चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हड़ताल पर जाने से आरेंज सिटी की सरकारी स्वास्थ्य सेवा गड़बड़ा गई है. पैथालाजी, रेडियोलाजी विभाग में भी टेस्ट नहीं हो रहे हैं. मरीजों की लंबी कतार लग रही है. मेडिकल में कोबाल्ट यूनिट को ताला लग गया है. वार्डों में भर्ती मरीजों को भी तकलीफों का सामना करना पड़ रहा है. विदर्भ के विविध क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को निराश होकर लौटना पड़ रहा है.

    मेडिकल, सुपर, मेयो, कामगार अस्पताल, डागा और शासकीय आयुर्वेद महाविद्यालय के करीब 4,000 कर्मचारी काम पर नहीं आ रहे हैं. 2 दिन में मेडिकल में 55 मरीजों के एमआरआई नहीं हो सके, क्योंकि टेक्निशियन हड़ताल पर हैं. तीनों अस्पतालों में सिटी स्कैन भी बंद है. करीब 200 मरीजों को वापस लौटना पड़ा है. प्रशासकीय कामकाज ठप है. अधिकारियों के कमरों की सफाई से लेकर चाय लेकर आने वाले भी नहीं हैं.

    डागा में एकमात्र नर्स
    बीपीएल ग्रस्त महिलाओं के लिए डागा स्मृति शासकीय महिला अस्पताल वरदान है. हर दिन 40 से 45 प्रसूतियां होती हैं. यहां 450 बिस्तरों के लिए 80 नर्सें कार्यरत हैं. लेकिन डागा की नर्सों ने हड़ताल में शामिल होने का निर्णय लिया है. इसमें 79 नर्सें शामिल हुईं हैं. एक मात्र प्रसूति प्रशिक्षणार्थी नर्स ही काम पर आ रही है. अब सवाल यह पैदा हो गया कि यदि किसी महिला की जान को खतरा निर्माण हो गया तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा.

    बुधवार को चतुर्थ श्रेणी 4 कर्मचारी और तृतीय श्रेणी के 7 कर्मचारी कार्यालय में मौजूद थे. शेष 95 फीसदी कर्मचारी नहीं आए. डागा में केवल प्रसूति होती है और गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया जाता है. आपरेशन के दौरान डाक्टरों के साथ ही नर्स और वर्ग-3 कर्मचारियों का अहम रोल होता है. लेकिन 2 दिनों से अस्पताल प्रशासन जैसे-तैसे स्थिति को संभाले हुए है. मरीज व परिजनों का गुस्सा भड़कने लगा है. इस हालत में अप्रिय घटना की संभावना बन गई है.

    रेडिएशन पर लगा ब्रेक
    मेडिकल में कैंसर के मरीजों को रेडिएशन दिया जाता है. हर दिन करीब 80 मरीजों का उपचार होता है. पहले से ही करीब 2 महीने की वेटिंग बनी हुई है. अब हड़ताल ने वेटिंग को और लंबा कर दिया है. दो दिनों के भीतर 165 मरीजों का रेडिएशन नहीं हो सका है. टेक्निशियन नहीं होने से कोबाल्ट शुरू नहीं किया जा रहा है, जबकि कम्प्यूटर बंद होने से ब्रेकी थेरेपी पर भी ब्रेक लग गया है.

    मेडिकल में मंगलवार को 49 आपरेशन तय किए गए थे जिनमें से 30 ऑपरेशन हुए, जबकि 19 टल गए. वहीं इमरजेंसी में 7 ऑपरेशन किए गए. बुधवार को 61 ऑपरेशन किए गए, जिनमें 49 ऑपरेशन हुए. 12 ऑपरेशन को टाल दिया गया, जबकि 23 ऑपरेशन इमरजेंसी में किए गए. सुपरस्पेशलिटी अस्पताल में हड़ताल के कारण पैथालॉजी विभाग सहित रेडियोलॉजी विभाग में जांचें बंद पड़ गई. इस पर विद्यार्थियों की मदद से जांच करने का प्रयास किया गया लेकिन मरीजों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा.

    MCI की टीम को दिक्कतें
    बुधवार को मेडिकल के पीएसएम विभाग में मेडिकल कौंसिल आफ इंडिया की टीम अचानक निरीक्षण के लिए पहुंची. निरीक्षण के दौरान विभाग में एक भी कर्मचारी नजर नहीं आया. इस बीच डाक्टरों को ही प्रशासकीय कामकाज कामकाज करना पड़ा. टीम को डाक्टरों के अनुभव प्रमाणपत्र देना था.

    लेकिन प्रमाणपत्र तैयार करने वाले कर्मचारी नहीं होने से आखिर तक नहीं बनाए जा सके. यह पहला अवसर था कि जब एमसीआई की टीम को हड़ताल की वजह से दिक्कतें आईं.


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