
नागपुर – इंदिरा गांधी शासकीय वैद्यकीय महाविद्यालय (मेयो) में मेडिकल बोर्ड के प्रमाणपत्र के बदले रिश्वत मांगने के चर्चित मामले में गिरफ्तार सर्जरी विभाग प्रमुख डॉ. नंदकिशोर कमलनारायण जायसवाल और कनिष्ठ लिपिक आशीष मेटेकर को न्यायालय ने दो दिन की पुलिस रिमांड (पीसीआर) में भेज दिया है। जिला न्यायाधीश श्री ग्वालानी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश पारित किया।
सरकार की ओर से मुख्य सरकारी वकील नितिन तेलगोटे ने प्रभावी ढंग से पक्ष रखते हुए अदालत को बताया कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है। आरोपियों के आवाज के नमूने (Voice Sample) लेना, उनके घरों की तलाशी, दस्तावेजों की जांच तथा कथित भ्रष्टाचार से अर्जित संपत्ति की पड़ताल के लिए पुलिस रिमांड आवश्यक है। अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार करते हुए दोनों आरोपियों का दो दिन का पुलिस रिमांड मंजूर कर लिया। वहीं, आरोपियों की ओर से अधिवक्ता मिलिंद तोतरे ने पक्ष रखा।
अब एसीबी की जांच का फोकस ‘काली कमाई’ पर
पुलिस रिमांड के दौरान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) की टीम डॉ. नंदकिशोर जायसवाल की आय से अधिक संपत्ति और आर्थिक लेन-देन की गहन जांच करेगी। जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि—
आरोपी के नाम या परिवार के नाम पर कितनी चल-अचल संपत्तियां हैं।
कितने बैंक खाते संचालित किए जा रहे हैं।
कितने बैंक लॉकर हैं और उनमें क्या रखा है।
रिश्वत से अर्जित धन का निवेश कहां-कहां किया गया।
अन्य वित्तीय दस्तावेज, निवेश और लेन-देन का पूरा रिकॉर्ड।
सूत्रों के अनुसार, एसीबी की टीम अगले दो दिनों में कई महत्वपूर्ण दस्तावेज और डिजिटल साक्ष्य जुटाने की तैयारी में है। जांच के दौरान आरोपी डॉक्टर से गहन पूछताछ भी की जाएगी। पुलिस रिमांड अवधि में आरोपी को पुलिस लॉकअप में रखा जाएगा।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता, जो वर्धा आरटीओ में सहायक मोटर वाहन निरीक्षक हैं, मेडिकल अवकाश के बाद दोबारा सेवा में शामिल होने के लिए मेयो के मेडिकल बोर्ड से प्रमाणपत्र लेने पहुंचे थे। आरोप है कि प्रमाणपत्र जारी करने के बदले 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी गई, जो बाद में 20 हजार रुपये में तय हुई।
शिकायत मिलने पर एसीबी ने सत्यापन किया, जिसमें रिश्वत मांगने की पुष्टि हुई। ट्रैप के दौरान आरोपियों को शिकायतकर्ता पर संदेह हो गया और उन्होंने रकम स्वीकार नहीं की, लेकिन रिश्वत मांगने के पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद एसीबी ने दोनों को गिरफ्तार कर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया।
अब दो दिन की पुलिस रिमांड के दौरान एसीबी की जांच इस बात पर केंद्रित रहेगी कि आरोपी डॉक्टर और क्लर्क ने कथित भ्रष्टाचार के जरिए कितनी संपत्ति अर्जित की है और क्या इस मामले में अन्य लोगों की भी भूमिका रही है। जांच के बाद इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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