Published On : Thu, Jul 7th, 2016

महाजनवाड़ी खदान उपयोगी नहीं, पीएमसी की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्यवाही – ऊर्जा मंत्री

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नागपुर:
नागपुर जिले में प्रस्तावित महाजनवाड़ी अंडरग्राउंड कोल माइन्स को लेकर हिंगना, दहापुरा, वानाडोंगरी और धनगरपुरा को लेकर इस इलाकों में बसे लोगो के मन में विस्थापन का डर सता रहा है। लोगो को डर है की इस इलाके में प्रस्तावित माइन्स की वजह से उनका वर्षो और पीढ़ियों ने बसा संसार उजड़ जायेगा। इसी वजह से लोग इस खदान को लेकर विरोध कर रहे है। जनता के इस विरोध को देखते हुए पालकमंत्री ने लोगो को उनके साथ नाइंसाफी न होने का भरोसा दिया है। मुद्दे के राजनितिक रंग ले लेने के बाद पालकमंत्री चन्द्रशेखर बावनकुले ने गुरुवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस लेकर साफ किया की इस माइन्स से महानिर्मिति को किसी भी तरह का फायदा नहीं है इसलिए सरकार का इरादा साफ है की महाजनवाड़ी कोल माइन्स के संबंध में वह केंद्र से प्रोजेक्ट का डीनोटिफिकेशन निकालने का अनुरोध करेगी।

अपनी बात को मजबूती से रखने के लिए आज ही ऊर्जा मंत्री ने इस प्रोजेक्ट की रिसर्च स्टडी के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टंसी के निर्माण के संबंध में आज ही टेंडर निकाल दिया है गठित पीएमसी एक महीने के भीतर अपनी डीटेल रिपोर्ट ऊर्जा मंत्रालय को सौपेगी जिसके आधार पर राज्य सरकार केंद्र से इस प्रोजेक्ट पर रोक लगाने की मांग करेगी। ऊर्जा मंत्री के मुताबिक अगर महाजनवाड़ी माईन्स को शुरू किया जाता है तब भी यह महाजेनको के लिए नुकसान का ही सौदा साबित होगी। इस खदान से 3 मिलियन मेट्रिक टन का उत्पादन होगा जबकि इस प्रोजेक्ट से विस्थापित होने वाले लोगो को पुनर्स्थापित करने का खर्च फायदे की तुलना में ज्यादा खर्चिला होगा। केंद्रसरकार की भूमिधिग्रहण निति ,इलाके के रेडिरेकनर और मेट्रो रीजन प्लान से पुनर्वास का फायदे की तुलना में ज्यादा खर्चे वाला साबित होगा। इसलिए इससे कोई फायदा नहीं होगा। अगर यह खदान शुरू की जाती है तो इससे 7500 हजार एकड़ के ग्रीन बेल्ट में फैले इलाके में एक लाख से भी ज्यादा परिवारों पर असर पड़ेगा। इसलिए भी सरकार इस खदान को शुरू करने में हिचक रही है।

राज्य के लिए उपयोगी नहीं है खदान
केंद्र सरकार ने 6 सितंबर 2013 को महाराष्ट्र और गुजरात को साझा तौर पर महागुज नाम से वेंचर बनाकर महानिर्मिति और जेएससीएल कंपनी को साझा उपयोग के लिए दिया। 31 मार्च 2015 को कोयला मंत्रालय ने महाजनवाड़ी को महाराष्ट्र की बिजनिर्माण करने वाली कंपनी को दिए जाने का निर्णय लिया। 22 अप्रैल 2015 महाजनवाड़ी कोयलाक्षेत्र महानिर्मिति को दिए जाने संबंधी पत्र प्राप्त हुआ। इस खदान से निकलने वाले कोयले को नाशिक, परल और भुसावल बिजलीनिर्मिति केंद्र को मुहैय्या कराने की भी जानकारी दी गई। राज्य सरकार ने इस खदान को अपने पास रखने के लिए सभी प्रक्रिया को पूरा कर बैंक गैरंटी के तौर पर 120 करोड़ रूपए जमा भी करा दिए। पर अब ऊर्जा मंत्री के मुताबिक यह खदान राज्य के लिए उपयोगी नहीं है वैसे भी सरकार को 45 एमएमटी कोयले की जरुरत है वह उसे आसानी से उपलब्ध है और अकेले डब्लूसीएल ही 25 एम एम टी कोयला दे रही है जिसे भविष्य में बढ़ाया जायेगा।

महानिर्मिति को आवंटित गटेपालम खदान फायदेमंद
राज्य सरकार को महाजनबड़ी के साथ ही छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में गटेपालम ओपन खदान का आवंटन हुआ है यह खदान ओपन है और खुले इलाके में है जिस वजह से यहाँ लोगो के विस्थापन की चिंता नहीं है जिस वजह से सरकार का लगभग खर्च बचेगा और ओपन खदान होने की वजह से कोयले के उत्पादन का खर्च भी कम है इस खदान से 50 मिलयन मैट्रिक टन उत्पादन होगा। अकेले यह खदान की राज्य के कोयले की जरुरत हो पूरा कर सकती है। यह खदान से वर्ष राज्य को करीब 500 करोड़ का फायदा होगा।

पीएमसी एक महीने में अध्ययन कर देगी जाँच रिपोर्ट
ऊर्जा मंत्रालय ने महाजनवाड़ी खदान की उपयोगिता का अध्ययन करने के पी एम सी का गठन करेगी जो एक महीने में अपनी रिपोर्ट सौपेगी इस रिपोर्ट को आधार बनकर सरकार आगे की रणनीति बनाएगी वैसे ऊर्जा मंत्री ने जनता से किसी राजनितिक बहकावे में न आने की सलाह देते हुए उसके साथ अन्याय न होने की का आश्वाशन दिया है।

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