Published On : Mon, Dec 4th, 2017

एसआईटी बर्खास्तगी से पुनः भूमाफिया सक्रीय

Land Mafia

Representational Pic

नागपुर: एसआईटी का गठन भूमाफिया दिलीप ग्वालवंशी की गिरफ़्तारी के बाद हुआ था.एसआईटी की गिरफ्त में जांच के दौरान भाजपाई व उसके समर्थक भूमाफिया के साथ सत्ता में हस्तक्षेप की कूबत रखनेवालों के नाम सामने आने लगे. सरकार पर अपने-अपनों का दबाव बढ़ने लगा तो सरकार ने प्रमुख सरगना को बचाने के लिए सम्पूर्ण शहर-ग्रामीण की आम जनता जो भूमाफियाओं द्वारा छली गई थीं, उन्हें दोबारा उनके हाल पर छोड़ एसआईटी को बर्खास्त कर दिया. इससे यह तो सार्वजनिक हो गया कि सरकार की नीति किस दिशा में दौड़ रही है. दरअसल दिलीप की आड़ में मलाई वर्षों से खाई जा रही है, जिसके एवज में दिलीप को मात्र १५% ही हिस्सा मिल रहा था. एसआईटी सक्रिय रहती तो अगले कुछ माह में अनगिनत आम नागरिकों की जमीनें भूमाफिया के चुंगल से छूट गई होतीं. नीयत में खोट था इसलिए मुख्य सरगना को बचाने के लिए उससे ‘७०’ लेकर न सिर्फ उसे नहीं बचाया बल्कि एसआईटी बर्खास्त कर आम नागरिकों को भूमाफियाओं के चुंगल में छोड़ अपनी कार्यप्रणाली से रु-ब-रु करवाया.

एसआईटी बर्खास्त ,भूमाफिया सक्रीय
खासकर सत्ताधारियों से प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष जुड़े भूमाफिया सह जमीनों के व्यवसायी काफी खुश हैं. इस कार्यकाल में वे ही बेख़ौफ़ जमीनों से संबंधी व्यवसाय कर सकेंगे. इस चक्कर में सत्ताधारियों के वरदहस्त मिलने से पुनः भूमाफिया सक्रिय हो गए हैं.उन्हें यह आश्वासन दिया गया है कि कम से कम इस कार्यकाल में पुनः एसआईटी का गठन नहीं होगा. तो कुछ दर्जन भर सत्ताधारी समर्थक अपने-अपने थाना क्षेत्रों में सक्रिय होकर थानाप्रमुखों के नाम पर जरूरतमंदों में पैठ बना रहे हैं. कुछ तो एसआईटी में शिकायतकर्ता जिन्हें न्याय नहीं मिला उन्हें न्याय के नाम पर थाना को बीच में रख शिकायतकर्ताओं को अल्प देकर उनकी जमीनों को हथिया रहे या हथिया कर अन्य को बेचने का प्रयास कर रहे हैं.

एसआईटी सा वातावरण थानों में नहीं
एसआईटी में शिकायतकर्ता शिकायत करने हेतु जाने के पूर्व अपना पक्ष मजबूती से रखने का माद्दा के साथ सम्पूर्ण काग़जातों सबूतों के तौर पर दिया करते थे. जिनका अवलोकन कर एसआईटी ने ६०० शिकायतकर्ताओं को उनकी हजम सम्पत्तियां दिलवाईं. अभी १००० से अधिक शिकायतें सुलझनी बांकी थीं कि एसआईटी बर्खास्त करने का निर्देश सरकार ने शहर पुलिस को दिया. शहर पुलिस ने बर्खास्तगी के साथ शिकायतकर्ताओं को आव्हान किया कि अब वे अपने इलाके के थानों में शिकायतें करें. थानों की हालत यह है कि यहां चाय से ज्यादा केतली गर्म होती हैं. कोई भी आम थाने पहुंचा की उसे वहां कार्यरत ऐसे पेश आते हैं, मानों वह कोई अपराधी हो और अपराधियों की मेजबानी करते हैं. ऐसे वातावरण में थाना जाने से कम से कम आम नागरिक जरूर घबरा रहे हैं. वहीं दूसरी ओर एसआईटी कार्यालय का वातावरण ऐसा था कि कुछ ही दिनों में १६०० से अधिक शिकायतें दर्ज हुईं. उदाहरणार्थ वर्षों पूर्व इंदोरा चौक के एसीपी के पास भूमाफियाओं की शिकायतें आती थीं तो यह कार्यालय शहर व जिले के असामाजिक तत्वों के भरोसे उन्हें संरक्षण देकर जमीने खाली करवाते थे और अपने हिस्से की मलाई खाते थे.

सैकड़ों एकड़ हड़पी जमीनें
आज भी भूमाफिया दिलीप से सैकड़ों नागरिक व जमीनधारक त्रस्त हैं. दिलीप की आड़ में हड़पी गई जमीनों के लिए सोसाइटी बनाकर प्लाट में तब्दील कर सस्ते में बेच दी. खरीदने वाले भी आम, माध्यम वर्ग के थे,उन्होंने ख़रीदे गए प्लॉटों पर मकान निर्माण कर रह रहे हैं.अब जब मूल जमीनधारक को न्याय मिलने की नौबत एसआईटी के मार्फ़त आ गई तो सरगना को बचा लिया गया, शेष को उन्हें उनके हाल पर छोड़ दिया गया. इस चक्कर में सैकड़ों भूमाफियाओं ने राहत की सांस ली और हज़ारों नागरिकों को जिनकी जमीनें आज भी अटकी पड़ी हैं,जस के तस पुनः अटक गई.


पुनः एसआईटी की गठन की मांग की सिसोदिया ने
सामाजिक कार्यकर्ता विवेक सिसोदिया जो निरंतर सरकारी संपत्ति के जतन के लिए आवाज उठाते रहे हैं, उन्होंने सरकार और पुलिस आयुक्त से मांग की हैं कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल तक एसआईटी की पुनः बहाल की जाए. सरकार और उन्हें पक्ष को काफी जनसमर्थन मिलेंगा, क्योंकि आम नागरिकों की मेहनत की तथा उसके द्वारा जमा पूंजी से खरीदी गई जमीन-प्लॉट जिसे जाने-अनजाने में भूमाफिया ने हड़प ली है. उन्हें एसआईटी की मदद से न्याय मिल रही थी और पुनः गठित हुई तो मिलने का क्रम जारी रहेगा. एसआईटी पुनः बहाल होने से शिकायतकर्ताओं की संख्या दोगुनी हो जाएंगी.