Published On : Mon, Sep 16th, 2019

कुणबी यह एक जात नहीं रहकर एक संस्कृती है – प्रा चौधरी

काटोल : कुणबी कि मुल संस्कृती यह खेती के सण तैवार पर आधारित रहकर आज तक कुणबी समाज ने संत तुकाराम महाराज ने समाज को दिये गयी दिशा पहचान नहीं पाये इस कारण सामजिक ,राजकीय व आर्थिक दृष्टी वजह से वे परवलंबी हुए हैं तभी कुणबी अपनी सँस्कृती जोपासावी. इसके बगेर उनकी परिस्थिती बदलने वाली नही है कुणबी यह एक जात नहीं रहकर एक संस्कृती है यसा प्रतिपादन प्रा दिलीप चौधरी इन्होंने किया है

काटोल के कुषी उत्पादन बाजार समिती संतरा मंडी परिसर में आयोजित कुणबी मेलावे के प्रसंग में कह रही थी इस समय प्रमुख वक्त्या डॉ.छायताई महाले व कुणबी सेवा संघ के रमेश फिस्के ,जाधव कुणबी समाज के अर्जुन शेटे,खैरे कुणबी समाज के शनकररावं वाट,लोणारे कुणबी समाज के देवरावजी पातुर्कर, वैदर्भीय कुणबी महासंघ के सुरेश गुढडे,आशिष तायवाडे,कुणबी जण जागृती अभियान के प्रमोद वैद्य,बाळाभाऊ शिंगणे,अनंत भारसकडे पुरुषोत्तम शहाणे , स्वप्निल राऊत मंच पर उपस्तीत थे।

चौधरी इन्होंने आगे बताया कि इस महाराष्ट्र में 2:30 लाख किसानों की आत्महत्या हुयी है जिसमें कुणबी समाज किसानों की संख्या सबसे अधिक है इस और ध्यान नहीं देने के लिए तैयार नहीं इस लिए कुणबी समाज ने अपना राजकीय दबाव गट तयार कर कोणती राजकीय विचरधारा अपने समाज का भला करेगी उसका विचार करना चाहिए .कुणबी ने सेवा क्षेत्र ताब्यात असे आव्हानं कर उसके बगेर अपनी परिस्थिती बदलने वाली नहीं स्पष्ट किया है .

महीला ने कुणबी समाज में जन्म लिया अभिमान माना चाहिए . शरीर गुनो पहचान कर उसे वाव देने की आज की गरज है . युवकों तथा युवतियों ने स्थिर कुटुंब टीकवण्याची आज अत्यंत गरज है आज की मुख्य संस्कार भूलते जा रहे हैं आधुनिक युग नाम पर घर के घर उध्वस्त होने के मार्ग पर है .कुणबीयो का सण ,परंपरा, प्रथा अर्थकारण से निगडित रहकर वह प्रथांना नयी दिशा देने का काम समाज के युवा वर्ग व युवतियों ने कराना चाहिए . मेळावे के माध्यम से समाज के शैक्षणिक,आर्थिक व आरोग्य विषयक गरज कैसे पूरी हो सकती है इसका विचार करना चाहिए यसा प्रतिपादन डॉ छायाताई महाले इन्होंने मेलावे को सम्बोधित करते हुए कहा .

इस मेळावे के लिए काटोल,नरखेड, वरूड, कोंढाळी, सावरगाव, जलालखेड, परिसर के नजदीक पास 5000 के उपर समाज बंधाव स्वखुशीने अपने खर्चें से आकर सहभागी होकर उपस्थिति दर्शायी .


मेळाव्याला उपस्थित अखिल भारतीय कुणबी समाज के अध्यक्ष डॉ.बबनराव तायवाडे, पूर्व मंत्री रणजित देशमुख, पूर्व मंत्री अनिल देशमुख, विधायक सुनील केदार, पूर्व आमदार आशिष देशमुख, पूर्व नगराध्यक्ष राहुल देशमुख, सलील देशमुख, सभापती तारकेश्वर शेळके, चंद्रशेखर कोल्हे, चंद्रशेखर चिखले, समिर उमप, बबनराव लोहे इसके अलावा समाज के कही बडे . मान्यवर नेता उपस्थित थे

मेळावे सफलता के लिए सुरेश महल्ले, एड दिपक केने, दिलीप ठाकरे, अशोक मोहोड, सूर्याजी राऊत, अशोक काकडे, रत्नकर बोन्द्रे, संजय भोंडे, विजय कडू,विठ्ठलराव काकडे, रमेश पोतदार, सुधाकर साभारतोंडे, समीर उमप, राजेश डेहनकर,जयंत टालाटूले, समीर ठवळे,सौरभ ढोरे, उज्वल भोयर, , प्रशांत पाचपोहर, नरेश अरसडे, रूपेश नाखले, प्रवीण लोहे इनके साथ बड़ी संख्या में सभी शाखें के कुणबी बांधव तथा कुणबी सेवा संघ के सदस्यों ने मेलावे का सफलतापूर्वक संपन्न किया। .

,संचालन डॉ विजय धोटे व प्रशांत अर्डक तर आभार पुण्यवान अडकीने यांनी केले मेळाव्याची सांगता राष्ट्रवंदनेने करण्यात आली.