Published On : Wed, Nov 10th, 2021

विधान परिषद के लिए कुकरेजा, बावनकुले में खींचतान

– भाजपा उम्मीदवार की जीत पक्की,उम्मीदवार तय करेंगे गडकरी-फडणवीस

नागपुर – स्थानीय स्वराज संस्था से विधानपरिषद के लिए आगामी चुनाव में भाजपा की पकड़ मजबूत होने के कारण उन्होंने कल चुनावी आचार संहिता लागु होने के बाद चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी.क्यूंकि उम्मीदवारों का चयन केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और राज्य में विपक्ष नेता देवेंद्र फडणवीस करने वाले है इसलिए भाजपा के संभावित उम्मीदवारों में पूर्व स्थाई समिति सभापति वीरेंद्र कुकरेजा बतौर युवा उम्मीदवार आगे चल रहे हैं.इन्हें प्रतिस्पर्धा राज्य के पूर्व ऊर्जा मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले बतौर ओबीसी उम्मीदवार खासकर तेली समाज से ताल्लुक रखने के कारण कड़ी स्पर्धा दे रहे.

इससे पहले भी उक्त भाजपा नेताओं ने खासकर देवेंद्र फडणवीस ने युवा भाजपाइयों को मौका देकर उन्हें विधानपरिषद सदस्य बनवा चुके है,इनमें परिणय फुके और प्रवीण दटके का समावेश है.इस दफे भी वीरेंद्र कुकरेजा का नाम उन्हीं के गुट से सामने आया हैं.अगर ओबीसी या तेली समाज का मामला/मुद्दा सामने नहीं आया तो कुकरेजा ही उम्मीदवार होगा लेकिन ओबीसी या तेली समाज का मुद्दा उठा और उसे नज़रअंदाज किया गया तो मतों का विभाजन होना तय,जैसा स्नातक क्षेत्र चुनाव में भाजपा देख चुकी है,भाजपा का गढ़ रहते भाजपा उम्मीदवार संदीप जोशी को हार का सामना करना पड़ा था.
नागपुर जिला स्थानीय स्वराज संस्था से वर्त्तमान विधानपरिषद सदस्य गिरीश व्यास का कार्यकाल अंतिम चरण में है.इसलिए अगले विधानपरिषद सदस्य के चयन के लिए कल मंगलवार 9 नवंबर को राज्य चुनाव आयोग ने चुनावी आचार संहिता लागु करने के साथ ही चुनावी कार्यक्रम की घोषणा कर दी.
तय चुनावी कार्यक्रम के अनुसार 10 दिसंबर को मतदान होने वाला हैं.


याद रहे कि पिछले चुनाव में सत्ताधारी भाजपा ने कांग्रेस के साथ मुंबई और नागपुर के लिए आपसी समझौता किया था,इसलिए कांग्रेस ने नागपुर और भाजपा ने मुंबई में अपने-अपने उम्मीदवार का नाम वापिस ले लिया था,नतीजा दोनों ही पक्षों के उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे.मुंबई से कांग्रेस के भाई जगताप और नागपुर से भाजपा के गिरीश व्यास MLC चुने गए थे.लेकिन इस दफे ऐसी कोई समझौता होने की उम्मीद दूर-दूर तक नज़र नहीं आ रही.

नागपुर महानगरपालिका में कुल 151 सदस्य हैं। इनमें से भाजपा पार्षदों की संख्या 108 है। यह भाजपा के लिए एक बड़ी संख्या के साथ जीत का मार्ग प्रसस्त कर रही है। कांग्रेस के पास 29, बसपा के पास 10, राकांपा के पास एक और शिवसेना के पास दो हैं। वहीं जिला परिषद में 58 सदस्य हैं। यहां कांग्रेस के 32 सदस्य आगे है। नगर परिषद में कुल 341 सदस्य हैं।

भाजपा का दावा है कि यदि कुल मतों की समीक्षा की जाए तो भाजपा के पास 60 से अधिक मत हैं। इसी ताकत के दम पर BJP को चुनाव जीतने की उम्मीद है. हालांकि मतदान गुप्त तरीके से होना है। कोई भी दांव लगा सकता है। इससे पहले इस सीट से राजेंद्र मुलक जीते थे तब भी कांग्रेस की ताकत कम थी और उन्होंने भाजपा मतों में सेंध लगाई थी।

कांग्रेस में चुनाव को लेकर निराशा,गुटबाजी सर चढ़ कर बोल रही
पूर्व राज्य मंत्री और उक्त निर्वाचन क्षेत्र के प्रतिनिधि रहे राजेंद्र मुलक का नाम इस समय कांग्रेस में चर्चा में है। उनके अलावा इस निर्वाचन क्षेत्र में कोई दूसरा उम्मीदवार नहीं है जो भाजपा को सीधी टक्कर दे सके। हालांकि कांग्रेस में किसी एक उम्मीदवार के नाम पर आम सहमति की संभावना नहीं है। कांग्रेस उम्मीदवार का चयन ऊर्जामंत्री नितिन राऊत और पशुपालन मंत्री सुनील केदार के साथ पश्चिम नागपुर के विधायक शहर कांग्रेस के अध्यक्ष विधायक विकास ठाकरे,नागपुर जिला ग्रामीण के अध्यक्ष राजेंद्र मूलक और एमएलसी अभिजीत वंजारी को संयुक्त रूप से करना हैं.यह कहना जितना आसान है,लेकिन मूर्त रूप देना उतना ही कठिन है क्यूंकि केदार और राऊत की दोस्ती किसी से छिपी नहीं है.केदार का नागपुर ग्रामीण और राऊत का सिर्फ उत्तर नागपुर का कुछ हिस्सा में दबदबा है.जबकि राऊत जिले के पालकमंत्री है.

ऐसे में केदार-राऊत का उम्मीदवार चयन मामले में एकमंच पर आना महज एक पक्ष हित में औपचारिकता रहेगी।

वैसे दोनों ने पक्ष हित में विचार किया और सक्षम उम्मीदवार मैदान में उतारा तो स्नातक निर्वाचन क्षेत्र चुनाव की भांति नया चमत्कार कर सकती है.इसलिए भी कि कांग्रेस सत्ता में है और पिछले कुछ चुनावों में उल्लेखनीय सफलता हासिल कर चुकी है.कांग्रेस के पास सक्षम उम्मीदवार के नाम पर राजेंद्र मूलक ही अंतिम पर्याय है,उसे दोनों ने पूर्ण साथ देने का ठोस आश्वासन दिया तो ही वे चुनावी जंग में नज़र आएंगे।

अब देखना यह है कि कांग्रेस आलाकमान और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष उक्त चुनाव को कितनी गंभीरता से लेते हैं।