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    Published On : Fri, Aug 24th, 2018

    कोराडी नाका : कारवाई की आड़ में यातायात पुलिस सेंक रहे रोटी

    नागपुर – न्यायालय के साथ साथ सरकार के कड़क निर्देश पर दो पहिया वाहन चलकों को हेल्मेट पहनना अनिवार्य किया गया है. इस नियम का उल्लघंन एक ओर लापरवाह वाहन चालक तो कर ही रहे, दूसरी ओर शहर यातायात पुलिस ने इस ग़लती को आय का स्त्रोत बना लिया है. इसका जीता जागता उदाहरण कोराडी नाके पर रोज देखने को मिल सकता है.

    ज्ञात हो कि पिछले कुछ वर्ष पूर्व शहर सीमा में भी दो पहिए वाहन चलाने वालों के लिए हेल्मेट की अनिवार्यता शुरू की गई. हेल्मेट पहने बिना पकड़ने के लिए चौक चौक पर मोबाइल कैमरे धारी उनसे बिना कुछ कहे सुने सिर्फ बिना हेल्मेट पहने दो पहिए चालकों का फोटो निकाल कर उन्हें पोस्ट द्वारा ई- चालान भेज देते थे. यह सिलसिला कुछ माह चला. इस दौरान जब समीक्षा की गई तो भेजे गए चालान से १०% भी जुर्माना रकम जमा नहीं हुए. इसी दौरान कुछ पुलिस कर्मी नियम के बाहर जाकर चौराहों से आगे पीछे बिना हेल्मेट पहने वाहन चालकों को रोक कर बदसुलूकी करने के साथ ही साथ लाइसेंस के साथ बिना अनुमति गाड़ी की चाभी निकाल जब में रख लेते थे.

    ई-चालान के नफे-नुकसान की समीक्षा के बाद शहर पुलिस ने नया निर्णय यह लिया कि फोटो खिंचना बंद कर सीधे गाड़ी अड़ा कर कार्रवाई की जाए. इस निर्णय से चौराहों पर तैनात कर्मियों के बाछे खिल गए.क्यूंकि इ-चालान से उन्हें कोई आवक नहीं हो रही थी उलट काम बढ़ गया था.
    इसी क्रम में कोराडी पुलिस सह सभी थानों सहित यातायात पुलिस ने बिना हेलमेट वाले वाहनचालकों के खिलाफ ‘मैन्युअल’ कार्रवाई की मुहीम छेड़ी. महत्वपूर्ण चौराहों पर तैनातगी के लिए सौदे तक हो रहे हैं.

    कोराडी थाना अंतर्गत कोराडी चुंगी नाके के पास एक दस्ता कुछ वर्ष से तैनात है. दस्ते में कभी आधा दर्जन तो कभी उससे भी अधिक दिन रात कार्रवाई करते देखे गए. जब बारीकी से कार्रवाई की पिछले २ दिन से जाँच की गई तो पाया गया कि चालान १०% बनाया जा रहा और शेष से नगदी समझौता कर सरकारी खजाने को चूना लगाने के साथ ही साथ बिना हेल्मेटधारी वाहन चालकों से नगदी वसूल कर उन्हें प्रोत्साहित किया जा रहा है.

    कहावत है न कि चाय से ज्यादा केतली गर्म होती है, उसी की तर्ज़ पर एक ओर शहर में सदभाव, समन्वय सह जनता-पुलिस की दूरी पाटने में पुलिस आयुक्त जद्दोजहद कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर उक्त नाके पर तैनात पुलिस कर्मी खुलेआम नगदी वसूली में लीन देखे गए.

    इस घटना को कैमरे में कैद करने वाले मीडिया कर्मी को उक्त नाके पर तैनात सभी कर्मियों ने एक साथ शाब्दिक हमले करने के साथ ही साथ पुलिसिया कार्रवाई को खींचने का नया नियम-कानून बतलाने लगे और तो और मीडिया कर्मी से एक आरोपी की भांति पेश आने के अलावा उसका छायाचित्र निकालने लगे. यहाँ तक कह दिए उनके वरिष्ठ की अनुमति लेकर आओ फिर फोटो खींचो.

    मामले को बढ़ता देख मीडिया कर्मी ने सीधा पुलिस आयुक्त से संपर्क किया और घटना से रु-ब-रु कर उक्त पुलिस कर्मी पर कार्रवाई की मांग की. साथ ही नाके पर तैनात पुलिस कर्मियों की अगवानी कर रहे हेड कांस्टेबल सिंह से पुलिस आयुक्त की बात कार्रवाई. बातचीत के बाद सिंह ने कहा कि पुलिस आयुक्त हमारे गांव के हैं… अर्थात क्या आला अधिकारी के गांव वाले पुलिस कर्मी को छूट और जनता-जानर्दन-जागरुक नागरिक को दंड का प्रावधान है. इसके बाद भी समाचार लिखे जाने तक उक्त सभी नगदी वसूली कर बिना हेल्मेटधारी वाहन चालकों को प्रोत्साहित करने वाले पुलिस कर्मियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई. अर्थात पुलिस आयुक्त की कथनी और करनी में जमीन आसमान का अंतर साफ़ साफ़ दिख रहा है.

    उल्लेखनीय यह है कि नाके पर एक ओर कैमरा लगा है तो दूसरे छोड़ पर काफी दूर उक्त गोरखधंधा जारी है ताकि कैमरे में कैद न हो.


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